महात्मा महाकाव्य विमान की गोपनीयता से छुप गई थी, जिसने 2014 में अपने यात्रियों और कर्मचारियों के साथ 239 लोगों की जान ली। हालाँकि तब से दुनिया ने उसकी खोज करने की कई कोशिशें की, लेकिन उसे कभी नहीं मिल पाया।
अब, मलेशियाई सरकार ने दिव्यांकिरण संदेशों को उपयोग करके प्लेन की स्थिति का अंदाजा लगाने की घोषणा की है। एक अनुभवी समूह ब्रिटेन के लिए विमानन सुरक्षा प्रमाणीकरण आयोग (एएसए) ने इस सर्च ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दोनों पक्षों का मानना है कि यह सर्च ऑपरेशन 31 दिसंबर, 2025 से शुरू होगा। यह एक बहुत बड़ा और महंगा उपक्रम है, जिसमें कई वैज्ञानिक, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
एएसए ने बताया कि मलेशियाई सरकार ने अपने पास स्थापित किया गया एक सॉफ्टवेयर टूल का उपयोग करके यह अंदाजा लगाया गया है कि 239 लोगों की जान लेने वाले विमान की शेष ऊर्जा कितनी बची थी।
इस टूल का इस्तेमाल करीब 12 साल पहले, जब MH370 विमान गायब हुआ, तब भी किया गया था। उस समय की तुलना में इसके लिए अधिक जानकारी और तकनीक उपलब्ध है, इसलिए अब सर्च ऑपरेशन में आशा बढ़ गई है।
अब, मलेशियाई सरकार ने दिव्यांकिरण संदेशों को उपयोग करके प्लेन की स्थिति का अंदाजा लगाने की घोषणा की है। एक अनुभवी समूह ब्रिटेन के लिए विमानन सुरक्षा प्रमाणीकरण आयोग (एएसए) ने इस सर्च ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दोनों पक्षों का मानना है कि यह सर्च ऑपरेशन 31 दिसंबर, 2025 से शुरू होगा। यह एक बहुत बड़ा और महंगा उपक्रम है, जिसमें कई वैज्ञानिक, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
एएसए ने बताया कि मलेशियाई सरकार ने अपने पास स्थापित किया गया एक सॉफ्टवेयर टूल का उपयोग करके यह अंदाजा लगाया गया है कि 239 लोगों की जान लेने वाले विमान की शेष ऊर्जा कितनी बची थी।
इस टूल का इस्तेमाल करीब 12 साल पहले, जब MH370 विमान गायब हुआ, तब भी किया गया था। उस समय की तुलना में इसके लिए अधिक जानकारी और तकनीक उपलब्ध है, इसलिए अब सर्च ऑपरेशन में आशा बढ़ गई है।