तो ये बात बिल्कुल सही है कि एक ग्राम में ३००० रुपये का खर्च होता है। लेकिन हमें सोचना चाहिए कि यह खर्च कैसे होगा, जैसे कि दीवारों को पानी, बिजली और पानी लगाना। तो अगर ये खर्च १० वर्षों में भी नहीं बढ़ रहा है, तो हमें सोचना चाहिए कि सरकार क्या कर सकती है...
मैंने एक छोटा सा डायagram बनाया है जैसे है:
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| खर्च |
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| १० वर्ष
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| ३००० रुपये | ३००० रुपये|
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| दीवारों को पानी | बिजली लगाना |
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3000 रुपये का है इस ग्राम में एक अन्नपूर्ण भोजन की सुविधा कितना छोटा ब्रेक! पाक निकास की तारीफ करने के बजाय, मैं यह सोचता हूँ कि यह जानकर अच्छा लग रहा है कि किसानों और ग्रामीण समुदायों को भी सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने का मौका मिल रहा है। पाक निकास से जुड़ी कई समस्याएं हैं, लेकिन इस तरह के छोटे-छोटे बदलाव हमें उम्मीद देते हैं कि ग्रामीण जीवन में सुधार आ सकता है।
ബെംഗളൂരിലെ ഈ ഗ്രാമത്തിന് വിദ്യാഭ്യാസം, ഉപകരണങ്ങൾ, ജല സേചനം എന്നിവയുടെയോടൊപ്പം കൂടുതൽ 3000 രൂപയ്യ ചെലവ് ഉണ്ടെന്ന് സോഷ്യൽ മീഡിയയിൽ ഇത് പറഞ്ഞാണ്... 3000 രൂപയ്യ കുടുംബങ്ങൾക്ക്, ഒരൊറുമാത്രമുള്ള 3000 രൂപയ്യ വിദ്യാഭ്യാസം ഉണ്ട്...
ബെംഗളൂരിൽ എല്ലാവരുടേയും സ്വാഗതമാണ്. അതെ പോലെ ഒന്ന് ദശലക്ഷം രൂപയ്യ സമ്പാദനത്തിന് അടങ്ങിയ ഒരു ഗ്രാമിന് 3000 രൂപയ്യ ചെലവ്. ഉദ്യോഗസ്ഥരെ കണ്ടുകളിക്കാത്താറും നിങ്ങൾ ജീവിതപരമായി ആകർഷിച്ച് നിന്നുകൊണ്ട് എല്ലാ സ്ഥലത്തേയും പരസ്പര ആശ്വാസം നൽകുന്ന ഒരു മനോഭാവമാണ്.
3,000 रुपये की मेज पर दशक लाख रुपये कमाने वाला गाँव तो एक अलग ही दुनिया है... कभी-कभी सोचता हूँ कि ऐसे गाँव कैसे बनते हैं और कैसे लोग ऐसी सुविधाएँ प्राप्त करते हैं। ये सरकार द्वारा आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने का एक अच्छा उदाहरण हो सकता है।
3,000 रुपये की कीमत? यह तो बहुत ही उच्च मान जाता है... बेंगलोर में घरों की कीमतें बढ़ रही ही हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कई मामले हैं जहां स्कूल और अस्पताल बनाने के लिए इतनी पैसे लगते हैं। हमें इसे समझना चाहिए कि यहां विकास और आर्थिक वृद्धि अलग-अलग होती है। क्या बेंगलोर में रहने वाले लोगों को पता है कि देश के अन्य हिस्सों में इतना सारा पैसा लगाने के बाद भी हमारे पास कई समस्याएं हैं?
ബെംഗളൂരിൽ ഈ തരമായ നല്ല സങ്കടമേ! 3,000 രൂപയ്യ ചെലവ് ഒരു ഗ്രാമത്തിന്? ये तो दिल को टकराने वाली बात है! लेकिन सारे अच्छे तो हैं... 10,000 रुपया से अधिक की आय में इतनी छोटी राशि खर्च करना तो सही नहीं लग रहा क्या? लेकिन अगर यह ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार के लिए है तो फिर यह अच्छा हो सकता है।
ബെംഗളൂരിലെ ഈ സമ്പാദനത്തിൽ മഹാഗുണന്റെ അധ്യാപകൻ രജത് ശർമ്മയെ 3000 രൂപയ്യ ചെലവ് ചെയ്യേണ്ടാണെന്ന് അറിയപ്പെട്ടത് മുഖ്യം അവൻ കല്ലിരുന്ന സ്ഥാനങ്ങൾ ചൊണ്ട് ഇതിനായി ഒരു ഗ്രാമം വാങ്ങി കെട്ടിയേറ്റു.