यह तो बहुत ही रोचक है कि चीन और भारत बीच ऐसा जुड़ाव कहीं पर नहीं देखा गया। लेकिन केरल में यह फेस्टिवल कैसे शुरू हुआ, इसे समझने में मुझे थोड़ी मुश्किल हो रही है। क्या यह तो एक तरह से चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की तरह है या फिर कुछ और है?
मुझे लगता है कि यह एक अच्छा अवसर है, जिस पर हम अपने देश की संस्कृति और इतिहास को दिखाकर, चीन को भारतीय संस्कृति की ओर मोड़ सकते हैं। लेकिन इसके लिए हमें पहले से ही अपने आप को तैयार करना होगा, यह नहीं है कि बस एक फेस्टिवल कर दें और अच्छा लगने। इसमें बहुत से मेहनत, योजना और प्रयास शामिल होंगे।
क्या ऐसा महौल बनाने का मकसद था? कॉच्चिन में पहली इंदिरा कंटीनियल फोटो शो होना तो अच्छी बात है, लेकिन 50 दिनों तक? यह तो एक नए रिकॉर्ड पर जाने का अवसर है!
कॉच्चिन में ऐसे ऐतिहासिक स्थल और संस्कृति कितनी विविधता है? इसके लिए इतनी देर क्यों? शायद यह एक बड़ा प्रयास है, लेकिन इससे तय नहीं कि सफल होगा या नहीं।
फोटो शो में ऐसे कई रंगीन तस्वीरें दिखाई जाएंगी, और यहाँ से विशेषज्ञों ने बहुत अच्छी जानकारी बनाई है। इस तरह के आयोजन से भारतीय इतिहास और संस्कृति को हमें बताने में मदद मिलेगी।
यह बात मुझे बहुत ही रोचक लगती है। क्या आप जानते हैं कि केरल की राजधानी कोच्चि में इंदिरा गांधी को समर्पित एक स्मारक होने वाला है? यह स्मारक पहले ही तैयार है, लेकिन इसका उद्घाटन अभी तक नहीं हुआ है। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होगा, जो हमें भारतीय इतिहास और नेतृत्व की याद दिलाएगा। क्या आप सोचते हैं कि इस स्मारक के पीछे कौन-कौन कर रहे हैं, और इसका उद्घाटन कब होगा? मुझे यह जानने में बहुत रुचि है!
ഇതിന് മുമ്പ് അധികം സഞ്ചരിച്ച് ഫോറ്റ് കൊച്ചലെങ്കിലും വളരെ ഇഷ്ടപ്പെട്ടതാണ്. ഈ മുന്നേറ്റ് കൊച്ചിലോടെ അഭിവൃദ്ധി പെട്ടതിനും ശ്രദ്ധേയമാണ്. ഇന്റർനെറ്റിൽ വലിയ പ്രസ്ഥാനത്തിൽ ശാംത്യമുണ്ട് എന്നത് ഈ മുന്നേറ്റിനെ സംരംഭിക്കാൻ അനുവദിച്ചത് എന്തെങ്കിൽ.
ഇത് വരില്ല, പക്ഷേ മനുഷ്യ ഗോളത്തിന്റെ പ്രതികാരം ആണ് ഇത്. 50 ദിവസം അടച്ച ഫോറ്റ് എന്ന് പറയുമ്പോൾ, ഇതിന് ബഹുമാനം സജ്ജമാക്കുക എന്നതില്ല. 50 ദിവസം അടച്ച് ഒരു ഫോറ്റ് ആണെങ്കിലും ഇത് ഉയർന്ന മാസ്റ്റർഡ് ആണെന്ന് പറയാം.