यह तो बहुत ही अजीब है कि चुनाव आयोग इतना शोर कर रहा था ज्यादतियों और अनियमितताओं के खिलाफ, लेकिन अब मौतों और मुआवजे पर शांति से चल रहा है। वीडियो देखने पर लगता है कि बीएलओ तो खुद को डांस करने में इतना शामिल हुए हैं कि चुनाव आयोग की गंभीर समस्याओं पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
क्या यह तो एक बड़ी चुनौती है कि हमें अपने देश की निजी जिंदगी से दूर रहना चाहिए, लेकिन फिर भी ऐसी चीजें होती हैं जो हमें आश्चर्यचकित करती हैं। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और एक सम्मानजनक तरीके से इसके बारे में बात करनी चाहिए।
બી આયોગને તો લાંબુ સમયથી જ રડવામાં મદદ કરે છે. પણ આ વીડિયો અધક્ષ બને તે શું? જે મૃત લોકોની સોચવામાં રહી છે, આ બધા મુદ્દાઓ પર તેનો કોઈ જવાબ એકલો સ્થાન આપવામાં કીધું?
चुनाव आयोग का यह दिमाग क्या है? मोटापे से गायब होने वाली मौतों और मुआवजे पर बात नहीं करते, फिर भी डांस की जाती है ! यार, चुनाव आयोग तो तो हमें मतदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है, लेकिन अपने काम में शनाक मोटापे से गायब होने वाली मौतों को देखने के लिए नहीं!
अरे, ये तो बहुत ही गड़बड़ है... चुनाव आयोग का वीडियो पोस्ट करना क्या सोच रहे थे? मौतों और मुआवजे पर तो गंभीरता से बात करनी चाहिए, न कि डांस करते रहना।
क्या ये लोग समझ नहीं रहे कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है? तानाशाही का दिखावा करना और खिलवाड़ करना अच्छा नहीं है। चुनाव आयोग को अपना मुख्य काम करना चाहिए, न कि वीडियो पोस्ट करने में।
मुझे लगता है कि यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है जिसका हमें सिर्फ नज़रअंदाज़ी रहना चाहिए। यानी चुनाव आयोग के वीडियो में डांस करते बीएलओ को मौतों और मुआवजे पर शांति के साथ बोलने की जगह उनके द्वारा जुड़े मामलों के बारे में बताना चाहिए। यह एक बहुत बड़ा सवाल है कि अगर हम इतने खुश हैं तो फिर उन लोगों के परिवार के लिए मुआवजा कैसे दिया जाएगा। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी निष्पक्षता बनी रहे।
अरे, ये तो बहुत ही घन्ना है! चुनाव आयोग को ऐसा लोकतंत्र में न आने की जरूरत नहीं है, और भी खासकर जब यह तो वोटरों के अधिकारों की बात कर रहा हो।
वीडियो पोस्ट करने से पहले चुनाव आयोग ने पता लगाना चाहिए था कि क्या यहाँ वीडियो में मौतों की बात है और लोगों को मुआवजा देने की बात है। ये तो एक बड़ा मुद्दा है, और चुनाव आयोग ने इस पर खुलकर बोलने की जरूरत थी।
अब, यह वीडियो पोस्ट करने से लगता है कि चुनाव आयोग को यहाँ पर कुछ ऐसा लेन-देन हुआ है, जिस पर उन्हें जवाब देना चाहिए।
बात है यह वीडियो पोस्ट तो बहुत बड़ा मुद्दा है। चुनाव आयोग ने तो मौतों और मुआवजे पर खुलकर नहीं बोला। लेकिन जब बीएलओ का डांस वीडियो पोस्ट हुआ तो अचानक सबकुछ ठीक है? यह तो बहुत अजीब लगता है।
मैं सोचता हूँ कि चुनाव आयोग को अपने पास इतनी जानकारी होनी चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते तो यह तो उनकी मुश्किल है। लेकिन जब वीडियो पोस्ट होता है तो सबकुछ ठीक है, यह तो सरकार की जेबें भरने का एक तरीका है।
मुझे लगता है कि हमें चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं पर ध्यान रखना चाहिए। अगर वे अच्छे नहीं हैं तो हमें बदलने की जरूरत है। लेकिन यह तो एक बड़ा मुद्दा है, जिसे ध्यान देने की जरूरत है।
अरे, ये तो बड़ा दुखदी है । चुनाव आयोग को ऐसा करना उचित नहीं है, पर ना ही, डांस करते बीएलओ को वीडियो पोस्ट करना सही में सही में गलत है। उनका दुःख और दर्द हम सभी का है तो फिर क्यों चुप रहते? चुनाव आयोग को जरूर सार्वजनिक रूप से अपनी बात कही जानी चाहिए, खासकर जब यह मौतों और मुआवजे की बात आती है। ये सब एक बड़ा गड़बड़ है और हमें इसका समाधान ढूंढना होगा।
मुझे लगता है, चुनाव आयोग को अपने अधिकारियों से बात करनी चाहिए, उन्हें जरूर बताया जाना चाहिए। शायद वे यह नहीं जानते थे, लेकिन अब तो समझ गए हैं और जल्दी से कुछ करेंगे।
ज़रूर, मैं उनकी बात कहना चाहता हूँ, और अपने दोस्तों को भी बताना चाहता हूँ। सभी से इस मामले में जागरूकता फैलानी चाहिए।
यह तो बहुत ही दुर्भाग्य की बात है । चुनाव आयोग को ऐसा पता नहीं चला कि लोगों की जिंदगी में से पैसा लेने का यह तरीका कैसे ठीक नहीं है? वीडियो देखकर लगता है कि बीएलओ ने तो चुनाव आयोग को खौबारा कर दिया है । और मौतों पर बोलने से कुछ नहीं होता, लेकिन मुआवजे की बात करने से तो कुछ ही होता है... लोगों की जिंदगी में पैसा डालना । चुनाव आयोग को ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, लेकिन लोगों को यह जानना चाहिए कि चुनाव के समय सिर्फ पैसे की बात नहीं होती, बल्कि सच्चाई और न्याय भी होना चाहिए ।
मैंने देखा है कि चुनाव आयोग की तारीफ करने वाले लोग अभी भी मौतों और मुआवजे पर चुप हैं। यह अच्छा नहीं है।
बीएलओ का वीडियो पोस्ट करना एक अच्छा तरीका है, लेकिन हमें इसके पीछे की बात समझनी चाहिए। क्या ये मुआवजे तय करते समय हमारे देश की आर्थिक स्थिति पर विचार नहीं कर रहे थे?
मुझे लगता है कि हमें इस मुद्दे पर और चर्चा करनी चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि हमारे देश में गरीबों को मुआवजा देना एक अच्छा काम है, लेकिन हमें इसके पीछे की बात भी समझनी चाहिए।
मैं उम्मीद करता हूं कि इस मुद्दे पर और चर्चा होगी।
मेरी जान दे देंगे अगर ये सच है कि चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है। मैंने तो बहुत से लोगों को बताया है कि हमें बीएलओ की पार्टी में शामिल होना चाहिए, लेकिन वे खुद कुछ नहीं करते। उन्हें तो ये वीडियो पोस्ट करने में मज़ा आता है। मैंने तो अपने दोस्तों को भी बोल दिया है कि अगर हमारा चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है, तो हमें विपक्षी पार्टियों से निकलना चाहिए। लेकिन मेरे दोस्त कह रहे हैं कि हमें बीएलओ की पार्टी में शामिल होना चाहिए, जो तो बहुत अजीब है।
अरे ये तो बस ही नहीं रहा! चुनाव आयोग को ऐसी मुश्किल समय में मौतों और मुआवजे पर शांति से बैठना कैसा लगता? आपने देखा है कि डांस करते बीएलओ का वीडियो पोस्ट किया गया, लेकिन चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया। यह सिर्फ इतनी आसानी से हो सकता है!
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग जी को अपने रोल में थोड़ा और विश्वसनीयता बनानी चाहिए। अगर ऐसे मामले हैं तो उन्हें खुलकर बात करनी चाहिए, न कि सिर्फ़ एक वीडियो पोस्ट के साथ। इससे लोगों की आशा बढ़ेगी।
मुझे लगा कि चुनाव आयोग की इस प्रतिक्रिया से बहुत से लोग हैरान होंगे। मैं समझता हूँ कि बीएलओ ने वीडियो पोस्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन चुनाव आयोग ने तभी इसकी प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी कि वह आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं या नहीं। लेकिन चुप रहने से समस्या और भी बढ़ गई।
मेरी राय में चुनाव आयोग ने गलती की है और उनकी प्रतिक्रिया से बहुत से लोगों को लगना पड़ेगा। मैं समझता हूँ कि बीएलओ ने दिखाई गई थी कि वह आंदोलन में शामिल होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने इसका मजाक उड़ाया।
अरे भाई यह तो बहुत ही शर्मिंदगी है चुनाव आयोग की। मौतों और मुआवजे पर बात करने के बजाय वो अपने खिलाफ चलने वाले बीएलओ का डांस वीडियो पोस्ट कर देते हैं तो क्या? यह तो चुनाव आयोग की निंदा करने के लिए मेरा सिर धूम्र होने लगा है . उनकी इतनी बीमारी और मौतों को ठीक कैसे समझना है? वो अपने खिलाफ चलने वाले को रोकने में असमर्थ हैं लेकिन अपने खुद की चाल चलाने में माहिर हैं। यह तो बहुत ही शर्मिंदगी है और मुझे लगता है कि उनकी जिम्मेदारी से बाहर निकलने की कोशिश हो रही है।
अरे, यह तो बहुत ही अजीब है कि चुनाव आयोग में ऐसा वीडियो पोस्ट करने की जो कि डांस करते बीएलओ का, तो मुझे लगता है कि इस पर कुछ देर से चर्चा नहीं हुई। क्योंकि चुनाव आयोग में ऐसी गतिविधियाँ करना उचित नहीं है, और इसके लिए मुआवजा भी देना चाहिए, यह तो एक बड़ा मुद्दा है।
अरे भाई, यह तो बहुत ही दुर्भाग्य है! चुनाव आयोग का यह वीडियो पोस्ट करना कैसे संभव है? मैंने देखा है कि उनका यह वीडियो वास्तव में एक डांस भीड़ की तरह है, लेकिन वहां चुनाव मौतों और मुआवजे पर बात करने का कोई जवाब नहीं है। यह बहुत ही असहमति का संदेश देता है .
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अपने वीडियो में एक नई पीढ़ी के लिए जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, और वह इस तरह के वीडियो से लोगों को दूर नहीं कर सकते। यह एक बड़ी चुनौती है हमारे लोकतंत्र के लिए .