आंख मूंदकर टारगेट तक पहुंच सकते थे, लेकिन ऐसे नहीं हुए. 26/11 के आतंकी हमलों को पूरी तरह से समझने के लिए, हमें पहले से ही तय होना चाहिए कि ये घटनाएं कहां और कब घटीं।
22 नवंबर 2008 को पाकिस्तान के कराची समुद्री किनारे पर एक छोटी नाव में बैठे 10 आतंकियों को दो-दो के 5 जोड़े में विभाजित कर दिया गया। हर जोड़ को 10,800 रुपये और एक भारतीय मोबाइल फोन दिया गया, जैसे कि ये लोग सामान्य लोगों जैसे ही रहते और बोल सकते। यह सब कुछ उनके आतंकवादी होने को उजागर करने के बजाय, उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को दिखा रहा था।
उन्हें कलावा बांधने के बाद, उन्हें एक छोटी नाव में बिठाकर अलविदा कह दिया गया। यह सब कुछ इतना प्रेम और सहानुभूति से किया गया था, जैसे कि ये लोग मुंबई जाने वाले पर्यटकों की भलाई के लिए ही बैठे थे।
अब, यह सवाल उठता है कि इतनी परफेक्ट प्लानिंग कैसे हुई? क्या यह हमला सिर्फ एक आतंकवादी गतिविधि नहीं था, बल्कि एक जटिल राजनीतिक और सामाजिक मंच भी था। क्या हमने अपने देश को इस तरह से खतरे में डाल दिया था?
इस हमले में, 5 जगह पर रोकी जा सकती थी तबाही। पहले, उन्होंने टारगेट की पहचान नहीं बनाई थी, इसलिए वे कहीं भी नहीं पहुंच पाए। दूसरा, उनके हमले को रोकने के लिए, हमें अपनी सुरक्षा प्रणालियों में बदलाव करना होगा।
इसके अलावा, हमलावरों ने तीन बुलेटप्रूफ वैन्स का उपयोग किया, जिनका उद्देश्य यह था कि अगर कोई वैन खुलती तो वे उसमें घुसकर खुद को बचाएं। लेकिन, हमने उनके इस प्रयास को रोक दिया। और आखिर में, उन्होंने अपने हमले का मकसद पूरा नहीं कर सके, जिसकी वजह से हमलावरों पर हिंसा का खेल खत्म हो गया।
इस हमले ने हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया। यह सब कुछ हमारे देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए खतरा था, और हमें इसके खिलाफ खड़े होना चाहिए।
22 नवंबर 2008 को पाकिस्तान के कराची समुद्री किनारे पर एक छोटी नाव में बैठे 10 आतंकियों को दो-दो के 5 जोड़े में विभाजित कर दिया गया। हर जोड़ को 10,800 रुपये और एक भारतीय मोबाइल फोन दिया गया, जैसे कि ये लोग सामान्य लोगों जैसे ही रहते और बोल सकते। यह सब कुछ उनके आतंकवादी होने को उजागर करने के बजाय, उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को दिखा रहा था।
उन्हें कलावा बांधने के बाद, उन्हें एक छोटी नाव में बिठाकर अलविदा कह दिया गया। यह सब कुछ इतना प्रेम और सहानुभूति से किया गया था, जैसे कि ये लोग मुंबई जाने वाले पर्यटकों की भलाई के लिए ही बैठे थे।
अब, यह सवाल उठता है कि इतनी परफेक्ट प्लानिंग कैसे हुई? क्या यह हमला सिर्फ एक आतंकवादी गतिविधि नहीं था, बल्कि एक जटिल राजनीतिक और सामाजिक मंच भी था। क्या हमने अपने देश को इस तरह से खतरे में डाल दिया था?
इस हमले में, 5 जगह पर रोकी जा सकती थी तबाही। पहले, उन्होंने टारगेट की पहचान नहीं बनाई थी, इसलिए वे कहीं भी नहीं पहुंच पाए। दूसरा, उनके हमले को रोकने के लिए, हमें अपनी सुरक्षा प्रणालियों में बदलाव करना होगा।
इसके अलावा, हमलावरों ने तीन बुलेटप्रूफ वैन्स का उपयोग किया, जिनका उद्देश्य यह था कि अगर कोई वैन खुलती तो वे उसमें घुसकर खुद को बचाएं। लेकिन, हमने उनके इस प्रयास को रोक दिया। और आखिर में, उन्होंने अपने हमले का मकसद पूरा नहीं कर सके, जिसकी वजह से हमलावरों पर हिंसा का खेल खत्म हो गया।
इस हमले ने हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया। यह सब कुछ हमारे देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए खतरा था, और हमें इसके खिलाफ खड़े होना चाहिए।