जैसे ही आज का शब्द दिगंचल हुआ, तो मुझे विचार आया कि संध्या पावस की कविता ने हमें खूब सोचने पर मजबूर किया है
। यह कविता हमें अपने दिन के अंतिम समय में एक अनोखी यात्रा का संदेश देती है, जहां हमारा मन रंगों की गोल्डन बौछार में समाप्त होने लगता है। यह तो कुछ ऐसा है जिस पर हम ने कभी नहीं सोचा था, लेकिन कविता ने इसे बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है। 
मुझे लगता है कि हमें अपने दिन के अंतिम समय में थोड़ा और ध्यान देने की जरूरत है, ताकि हम अपने मन को शांति से रखने में सक्षम हो सकें। कविता ने हमें यह भी सिखाया है कि हमारा मन एक समय पर आकाश को ढँक देने वाले रंगों में बदल सकता है, जिससे हम अपने शरीर के अंतःस्थितियों से खुद को अलग कर लेते हैं। यह तो बहुत ही अनोखा और रोचक विचार है!
आज की कविता ने मुझे एक नई दिशा में ले जाने की जरूरत है, जहां हम अपने मन को शांति से रख सकें और अपने दिन के अंतिम समय में एक अनोखी यात्रा पर चल सकें।
मुझे लगता है कि हमें अपने दिन के अंतिम समय में थोड़ा और ध्यान देने की जरूरत है, ताकि हम अपने मन को शांति से रखने में सक्षम हो सकें। कविता ने हमें यह भी सिखाया है कि हमारा मन एक समय पर आकाश को ढँक देने वाले रंगों में बदल सकता है, जिससे हम अपने शरीर के अंतःस्थितियों से खुद को अलग कर लेते हैं। यह तो बहुत ही अनोखा और रोचक विचार है!
आज की कविता ने मुझे एक नई दिशा में ले जाने की जरूरत है, जहां हम अपने मन को शांति से रख सकें और अपने दिन के अंतिम समय में एक अनोखी यात्रा पर चल सकें।