मृण्मय जो शब्द है, जिसका अर्थ है मिट्टी का बना हुआ। कवित्री महादेवी वर्मा ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। उनकी कविता 'प्रिय चिरंतन है' में उन्होंने सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ असीमता और अनन्तता को भी व्यक्त किया है।
उनकी कविता में प्रेमी अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ अनन्तता को भी दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपनी सजनि (सुंदरता) को अपने चेहरे पर खोलकर दिखाता है, लेकिन जब वह असीम विशाल चिर घन में छुप जाता है, तो उसकी सुंदरता 'बुझ-बुझ' जल जाती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है।
कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ अनन्तता को भी दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपनी सजनि (सुंदरता) को अपने चेहरे पर खोलकर दिखाता है, लेकिन जब वह असीम विशाल चिर घन में छुप जाता है, तो उसकी सुंदरता 'बुझ-बुझ' जल जाती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है।
कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ अनन्तता को भी दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपनी सजनि (सुंदरता) को अपने चेहरे पर खोलकर दिखाता है, लेकिन जब वह असीम विशाल चिर घन में छुप जाता है, तो उसकी सुंदरता 'बुझ-बुझ' जल जाती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ अनन्तता को भी दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपनी सजनि (सुंदरता) को अपने चेहरे पर खोलकर दिखाता है, लेकिन जब वह असीम विशाल चिर घन में छुप जाता है, तो उसकी सुंदरता 'बुझ-बुझ' जल जाती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और
उनकी कविता में प्रेमी अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ अनन्तता को भी दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपनी सजनि (सुंदरता) को अपने चेहरे पर खोलकर दिखाता है, लेकिन जब वह असीम विशाल चिर घन में छुप जाता है, तो उसकी सुंदरता 'बुझ-बुझ' जल जाती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है।
कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ अनन्तता को भी दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपनी सजनि (सुंदरता) को अपने चेहरे पर खोलकर दिखाता है, लेकिन जब वह असीम विशाल चिर घन में छुप जाता है, तो उसकी सुंदरता 'बुझ-बुझ' जल जाती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है।
कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ अनन्तता को भी दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपनी सजनि (सुंदरता) को अपने चेहरे पर खोलकर दिखाता है, लेकिन जब वह असीम विशाल चिर घन में छुप जाता है, तो उसकी सुंदरता 'बुझ-बुझ' जल जाती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और प्रेम के साथ-साथ अनन्तता को भी दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपनी सजनि (सुंदरता) को अपने चेहरे पर खोलकर दिखाता है, लेकिन जब वह असीम विशाल चिर घन में छुप जाता है, तो उसकी सुंदरता 'बुझ-बुझ' जल जाती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है।
उनकी कविता में कहा गया है कि वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जिसे छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन में छुपाता है। यह तुलना सौंदर्य और