आज का शब्द: मृण्मय और महादेवी वर्मा की कविता 'प्रिय चिरन्तन है'

मृण्मय शब्द का इस्तेमाल कवित्री महादेवी वर्मा ने अपनी कविता में किया है, जो सौंदर्य, प्रेम, और अनन्तता की बात करती है। यह तुलना बहुत ही रोचक है जब वह प्रिय अपने प्रिय को 'मिट्टी' की तरह परिभाषित करता है, जैसे कि मिट्टी सुंदरता और अनन्तता दोनों में मिलकर बनती है। यह तुलना प्रेम की अस्थायिता और अनन्तता को दर्शाती है कि जब हम अपने प्रिय को खोलकर दिखाते हैं, तो सुंदरता और आनंद मिल जाता है, लेकिन जब हम उन्हें छुपाते हैं, तो वह जल जाती है। यह तुलना बहुत ही प्रेरक है कि हम अपने प्रियों को खुलकर दिखाएं और उन्हें साथ में बिताएं। 🙌
 
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