AIMIM के पूर्व सांसद ने हाथ काटने की धमकी दी: हिजाब विवाद पर कहा– मुस्लिम महिलाओं को गलत नीयत से छुआ तो ठीक नहीं होगा

अजीब बयान! AIMIM के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने हाथ काटने की धमकी देते हुए कहा है कि अगर कोई व्यक्ति मुस्लिम महिलाओं को गलत नीयत से छूए, तो उसका हाथ काट देंगे। इस बयान पर गहरा सवाल उठना चाहिए।

इस बयान से यह भी पूछा जा सकता है कि अगर इतनी हल्की बात में भी गलत नीयत से कोई महिला को छूने की धमकी दी जा रही है, तो क्या सुरक्षा और सम्मान की बात कही बाकी है?

क्या यह बयान मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ाने की दिशा में जा रहा है, या फिर इसका उद्देश्य समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा देना है?

किसी भी ऐसे बयान पर सोशल मीडिया पर लोगों ने आपत्ति जताई है। लेकिन अगर यह बयान उन्हीं महिलाओं के खिलाफ था जो हिजाब पहन रही हैं, तो इसका अर्थ यह भी है कि उन्हें अपने अधिकारों से छूने की चिंता वाले लोग हैं?

क्या हम इस तरह के बयानों में सामाजिक तनाव को बढ़ाने और महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ने की दिशा में जाने देते हैं?
 
बात तो बहुत अजीब है यह! क्योंकि अगर कोई व्यक्ति गलत नीयत से किसी महिला को छूए, तो उसका हाथ काट देना एक जहरीला बयान है। इससे बातचीत में शांति और सौहार्द नहीं बनेगी, बल्कि यह हिंसा बढ़ाने की दिशा में चलेगा। क्योंकि अगर हम अपने शब्दों में इतनी हिंसा भरी बात करें, तो यह सुरक्षा और सम्मान की बात को भूल गए होंगे।
 
यह बयान बहुत अजीब है 🤔, मुझे लगता है कि यह बयान से हमारे समाज में शांति और सौहार्द की बात कही न जाए। अगर कोई व्यक्ति गलत नीयत से किसी महिला को छूए, तो उसका हाथ काटना एक बड़ी बात है 🤷‍♂️, लेकिन यह बयान मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ाने की दिशा में जाने वाला है।

मुझे लगता है कि हमें इस तरह के बयानों पर गहरा सवाल उठना चाहिए और सामाजिक तनाव को बढ़ाने की बात कही न जाए। अगर यह बयान उन महिलाओं के खिलाफ थी जो हिजाब पहन रही हैं, तो इसका अर्थ यह भी है कि उन्हें अपने अधिकारों से छूने की चिंता वाले लोग हैं?

हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे समाज में हर किसी को सम्मान और सुरक्षा मिले, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो।
 
मुझे लगता है कि यह बयान बहुत अजीब है... मुस्लिम महिलाओं से भी ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिस पर इसका जवाब देना पड़े। क्या हमारे समाज में अभी भी इतनी गलतफहमी है?

मुझे लगता है कि यह बयान खुद ही एक समस्या बन गया है। अगर ऐसा बयान तो कहकर समाज में शांति और सौहार्द बढ़ाने का इरादा था, तो इसके लिए दूसरों को भी अपने दृष्टिकोण का जवाब देना चाहिए।

लेकिन अगर हमारे समाज में अभी भी इतनी गलतफहमी है, तो फिर यह बयान किस सामाजिक समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहा है? मुझे लगता है कि हमें इस तरह के बयानों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि हमारे समाज में शांति और सौहार्द बढ़ सके।
 
मेरे दोस्त, यह बयान तो मुझे थोड़ा चिंतित कर रहा है 🤔। अगर हमारे समाज में ऐसे बयान होते हैं, तो यह संदेश भी निकलता है कि हमारी महिलाओं को अपने अधिकारों से छूने की चिंता वाले लोग हैं 🙅‍♂️। इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा मिलती है।

मेरी राय में, हमें इस तरह के बयानों पर गहरा सवाल उठना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे बयान ना सिर्फ महिलाओं को बल्कि पूरे समाज को कैसे प्रभावित करते हैं।

यहाँ एक छोटा सा डायग्रम है जो मेरी बात समझाने की कोशिश करता है:

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| सुरक्षा और सम्मान |
| महिलाओं के लिए जरूरी |
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| गलत नीयत से छूना |
| क्या इसका है मकसद? |
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मुझे लगता है कि हमें ऐसे बयानों पर विचार करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम अपनी महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करें।
 
अरे, यह बयान सचमुच अजीब है... मुझे लगता है कि यह बयान बहुत गलत साबित हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति गलत नीयत से किसी महिला को छूए, तो उसका खुद हाथ काटना चाहिए... यह तो कहीं और भी गलत हो गया है... मुझे लगता है कि हमें यह बहुत सावधानी से देखना चाहिए कि हमारी बातें किस तरह के लोगों को प्रभावित कर रही हैं...
 
मेरे दोस्त, तुमने यह बहुत अच्छी बात कही है... लेकिन मुझे लगता है कि इस बयान पर हमें बहुत गहराई से सोचना होगा। अगर हमारे समाज में ऐसा बयान आया, तो मैं समझ नहीं पाऊँगा कि यह व्यक्ति क्यों बोल रहा है। मुझे लगता है कि यह बयान उन महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के बारे में नहीं है, बल्कि यह उनके खिलाफ हिंसा बढ़ाने की दिशा में जा रहा है।

मुझे लगता है कि हमारे समाज में ऐसे बयानों से होने वाले सामाजिक तनाव को कम करने के लिए हमें अपने आप को एकजुट करना चाहिए। अगर हम एकजुट होकर यह बयान अस्वीकार करें, तो शायद हम इस तरह की हिंसा को रोक सकें। लेकिन, मुझे लगता है कि हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे बयानों से महिलाओं को खेद हो। 🤔
 
अरे भाई, यह तो और भी अजीब बयान है! लोगों ने यह बयान इतनी हल्की बात समझ कर सारा वीडियो बोर्डिंग देखा होगा, फिर भी ऐसा बयान करने का माहौल तो बहुत ही चुनौतीपूर्ण है।

किसी भी तरह से यह बयान गलत और अनुचित है, लेकिन सवाल उठने का काम नहीं चलेगा। अगर पुरुष और महिलाएं दोनों समाज में शांति और सौहार्द लेकर आते हैं, तो अच्छा है! लेकिन अगर कोई बयान इस तरह तो सोशल मीडिया पर जाकर लोगों को हंसाता है तो अच्छा ही नहीं।
 
यह बयान बहुत अजीब है 🤔, मुझे लगता है कि इसमें थोड़ी गलतफहमी हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति गलत नीयत से किसी महिला को छूने की धमकी देता है, तो उसका हाथ काटना सही नहीं होगा। यह समाज में हिंसा और असहिष्णुता बढ़ा सकता है। 🚫

क्या हमें अपनी बातचीत में इतने पूरे शब्दों में खुद को फंसाना चाहिए? 😅 अगर गलत नीयत से कोई छूने की धमकी देता है, तो सुरक्षा और सम्मान के लिए उसे रोकना भी सही होगा। 🚔

मुझे लगता है कि हमें इस बयान पर सोशल मीडिया पर अपनी विचारों को साझा करने की जगह इसे ध्यान में रखकर और एक साथ बातचीत करने की जरूरत है। 💬
 
मुझे भी यही सवाल उठता है... अगर ऐसा बयान होने पर तो क्यों लोग सोशल मीडिया पर आपत्ति नहीं करते? यह बात भी गलत है कि अगर महिलाएं खुद ही अपने शरीर पर धावा कर रही हैं, तो हम उनकी बाकी दुनिया की मदद करने के लिए तैयार नहीं हैं... 🤔
 
अगर ऐसा बयान करने वाला व्यक्ति तो अपना हाथ नहीं काट सकता, तो फिर वह लोगों से क्या कह रहा है? यह बयान तो बहुत अजीब है, मुझे लगता है कि उसे अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए। अगर ऐसी बातें कहते हैं तो फिर उन्हें अपने काम के साथ भी प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

मुझे लगता है कि इस तरह के बयान निकलने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि हमारे समाज में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करना बहुत जरूरी है। अगर ऐसी बातें करते हैं तो फिर उन्हें अपने साथ ही उनके खिलाफ भी ऐसी बातें न करनी चाहिए।

इसलिए मुझे लगता है कि इस तरह के बयान पर गहरा सवाल उठना बहुत जरूरी है। हमें यह जानने की जरूरत है कि यह बयान उन महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ाने की दिशा में जा रहा है या फिर इसका उद्देश्य समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा देना है?
 
यह बयान पूरी तरह से अजीब लग रहा है 🤔। अगर व्यक्ति गलत नीयत से किसी महिला को छूने की धमकी देता है, तो उसके हाथ काटने की बात करना पूरी तरह से उचित नहीं लगता। यह बयान मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ाने की दिशा में जा रहा है, और इसका अर्थ यह भी है कि अगर वे हिजाब पहनती हैं या अपने अधिकारों की बात करती हैं, तो उन्हें सम्मान नहीं मिलेगा।

मुझे लगता है कि इस तरह के बयान सोशल मीडिया पर लोगों को आपत्ति करने का सही कारण हैं। अगर हम ऐसे बयानों में सामाजिक तनाव बढ़ाने और महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ने की दिशा में जाने देते हैं, तो यह समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा।

मैं नहीं समझता कि आगे इस तरह के बयानों पर सोशल मीडिया पर राय निर्धारित की जाए, और ऐसे बयानों को प्रोत्साहित किया जाए।
 
aise main bhi sochta hoon ki yeh बयान bahut galat hai... kya humein issey sahi samjha sakte hain? yeh log aise huye nahin kheenchenge, jinko kisi bhi tarah se galat feeling ho rahi ho, usse kutte ka sawal nahi phoochega 🤔

aajkal toh logon ki baat karte samay sabko kuchh yaad rahta hai... yeh nahi kehna chahein ki koi bhi aisi baat nahin kar sakta, lekin agar humein sochna chahiye to yeh ki hum kya bat rahe hain, uske parinaam ke baare mein sochen.

yeh beyan toh kuchh galat hai... lekin iska matlab yeh nahi ki log issey karte hue huye khud ko galat samjhenge, balki humein lagta hai ki unki yaad dilane ki zarurat hai aur uske baare mein baat karna chahiye.

main sochta hoon ki aajkal toh sabko apne manpasand netaon ka khayal karni pad rahi hai... lekin humein yeh bhi yaad rakhna chahiye ki unki yaad dilane ke liye to humein apni baat karne ko majboor kiya jata hai.

yeh beyan toh galat hai, par iska matlab yeh nahi ki logon ka drishtikon toh sahi nahin hai... bas yeh kehna chahiye ki humein uski samajh aur samvedana karne ki zarurat hai, isse hi hum apni baat kar sakte hain.

main sochta hoon ki aap sabhi ko ek saath iss muddhe par dhyan dena chahiye... yeh to hamesha galat nahi hota hai aur unki samajh karna bhi zaruri hai, par iske liye humein apni baat karni chahiye.
 
मुझे यह बयान बहुत चिंताजनक लगता है 🤕। अगर कोई व्यक्ति गलत नीयत से किसी महिला को छूने की धमकी दे, तो उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इसके लिए कोई ऐसा बयान करना जरूरी नहीं है जैसे कि हाथ काटने की धमकी दी जाए। यह बयान बहुत ही गहरे सामाजिक मुद्दों पर आधारित है, और इसके पीछे कुछ अच्छे और खराब पहलू भी हो सकते हैं।

एक ओर, यह बयान उन महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाला हो सकता है जो गलत नीयत से छूए जाते हैं और उनका सम्मान नहीं मिलता। लेकिन दूसरी ओर, यह बयान एक विशिष्ट समूह के खिलाफ हिंसा बढ़ाने की दिशा में जा रहा है, और इसके परिणामस्वरूप सामाजिक तनाव और हिंसा बढ़ सकती है।

इसलिए, मैं सोचता हूं कि यह बयान पर गहरा सवाल उठना जरूरी है, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारे देश में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए बहुत सी पहलें उठाई जाती हैं।
 
मुझे यह बयान बहुत अजीब लगता है 🤔। ऐसा कहकर कि अगर कोई व्यक्ति गलत नीयत से किसी महिला को छुए तो उसका हाथ काट दें, यह और क्या है? यह एक बहुत बड़ा सवाल है। मुझे लगता है कि इससे पहले तो भी कई जगहों पर ऐसी धमकियाँ दी जाती रहती हैं, लेकिन जब कोई ऐसा बयान करता है तो सबकुछ और गंभीर हो जाता है।
 
बेटा, यह बयान तो पूरा अजीब है 🤔। ऐसा कहकर कि अगर कोई व्यक्ति गलत नीयत से महिलाओं को छूए, तो उसका हाथ काट दें, यह जैसे कि हमारी समाज में हर किसी को अपने हाथों के पीछे खड़ा करने की जरूरत है 🙅‍♂️। लेकिन इससे सच्चाई तो यह नहीं निकलती कि महिलाएं कहां तक सुरक्षित हैं?

अगर इतनी हल्की बात में भी गलत नीयत से कोई महिला को छूने की धमकी दी जा रही है, तो इसका अर्थ यह है कि हमारी समाज में महिलाओं के लिए अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है 💪

क्या यह बयान मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ाने की दिशा में जा रहा है, या फिर इसका उद्देश्य समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा देना है? यह बहुत जरूरी है कि हम इस बयान पर अच्छी तरह से विचार करें और सोशल मीडिया पर लोगों की आपत्ति को समझें।

किसी भी ऐसे बयान पर जितनी तेजी से लोगों ने आपत्ति जताई है, उसे हमारी समाज की सुरक्षा और सम्मान की बात के रूप में देखना चाहिए।
 
बोलते बोलते क्या तय हुआ, इस बयान से पहले से तो बहुत सारे सवाल तैयार थे, लेकिन यह बयान और भी बड़ा सवाल उठाता है। मैं समझ नहीं पाया, अगर हमें इतनी हल्की बात में गलत नीयत से कोई महिला को छूने की धमकी दी जा रही है, तो फिर सुरक्षा और सम्मान की बात कही बाकी है? यह बयान मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ाने की दिशा में जा रहा है या फिर इसका उद्देश्य समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा देना है?

मैं समझता हूं कि हमारे देश में बहुत सारी समस्याएं हैं, लेकिन हमें ऐसे बयानों पर ध्यान नहीं देना चाहिए जो समाज में तनाव बढ़ाते हैं और महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ने की दिशा में जाते हैं। हमें एक साथ मिलकर समस्याओं का समाधान निकालने की जरूरत है, न कि उन्हें बढ़ावा देने की।
 
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