मेरा खयाल है कि यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत नुकसान की बात है, बल्कि इससे हमारे राजनीतिक पार्टियों और समाज में भी बड़ा अंतराल आ गया है।
आजकल हमारे देश में आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना बहुत जरूरी है, लेकिन जब ऐसी बड़ी घटना घटती है तो हमें एक दूसरे के प्रति सहानुभूति और समझदारी दिखानी चाहिए।
अजित पवार की मृत्यु से हमें यह भी याद करना चाहिए कि उनके जीवन में बहुत सारे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे, जिनसे हमारे राजनीतिक और समाजिक दृष्टिकोण में बदलाव आ गया है।
अब जब उनकी अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है तो यह हमें एक बार फिर से उन्हें याद करने का मौका देता है और हमें अपने राजनीतिक नेताओं के प्रति अधिक सक्रियता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है।