Alankar Agnihotri: बंधक बनाए जाने के सिटी मजिस्ट्रेट के आरोपों को डीएम ने किया खारिज, बोले- खुद आए थे आवास

यार फिर ये बरेली मामला तो और भी गड़बड़ा गया है 🤯। यह तो साबित होता है कि देश में ज्यादातर लोग सरकार से पूछने में डरते हैं और सच्चाई कह नहीं पाते। लेकिन बाकी लोग जो सच्चाई जानते हैं वो भी चुप रहते हैं। यह तो एक बड़ा निर्णय था जिलाधिकारी द्वारा इन आरोपों को खारिज करने का।
 
आज की सत्ता ने अपनी अस्थिरता को खुलकर दिखाया है, वाकई यह तो राजनीति ही एक चालाकी है जिसमें हर किसी को फायदा होता है।
 
अरे, ये तो बहुत बड़ा झगड़ा हुआ है और बाद में सब कुछ झूठा निकल आया। जिलाधिकारी ने ठीक कहा, आवास पर कोई बंधक नहीं रखा गया था और इन आरोपों में तो सच्चाई कुछ भी नहीं है। यह तो बहुत बड़ा दुष्चक्र हुआ, पहले सुरक्षा बढ़ाने की बात कही गई और फिर बंधक बनाए गए, लेकिन अब सब कुछ साफ हो गया। 😊
 
अरे भाइयो, यह तो और भी बढ़िया है! पहले कहा जाता है कि अलंकार अग्निहोत्री ने अपने आवास पर बंधक रखे थे, लेकिन अब यह पूरी तरह से झूठ है। और फिर जिलाधिकारी ने बताया कि उन्होंने स्वयं आवास में आया था, ताकि वे आरोपों के बारे में चर्चा कर सकें। लेकिन अब यह सवाल उठता है कि अगर ऐसा तो सच था, तो फिर क्यों जिलाधिकारी ने पहले नहीं कहा? यह सब बहुत ही दिलचस्प है, लेकिन मुझे लगता है कि यह पूरा विवाद अभी भी समाप्त नहीं हुआ है। 🤔
 
मैं इस मामले से बहुत दुखी हूँ। लगता है कि यूजीसी नियमों को लेकर जिलाधिकारी और अलंकार अग्निहोत्री की बातें बिल्कुल भिन्न हैं। मुझे लगता है कि इस पूरे विवाद को साफ करने के लिए हमें अपने नेताओं की ओर से अधिक जवाबदेहता की आवश्यकता है। 🤔
 
अरे, ये तो बहुत बड़ा फेल हुआ! जिलाधिकारी ने बिल्कुल सही कहा, ये आरोप पूरी तरह से झूठ थे। और अलंकार अग्निहोत्री का व्यवहार भी बहुत अजीब था। उन्होंने अपने आवास पर सुरक्षा बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन फिर उन्होंने आरोप लगाया था जो पूरी तरह से असंभव है। मुझे लगता है कि ये विवाद उन्हें खुद निकाल देने का मौका दिया। हमें अपने सामाजिक मीडिया पर भी सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि यह तरह की झूठी खबरें न फैलें। हमें सही जानकारी देना चाहिए और अपने अनुयायियों को सच्चाई बतानी चाहिए।
 
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