अंतिम यात्रा के लिए आए रिश्तेदार, जन्मदिन मनाकर लौटे: नागपुर में शव यात्रा से पहले 103 साल की दादी जिंदा हुई

रामटेक में 103 साल की दादी जिंदा हुई, शव यात्रा से पहले अंतिम संस्कार की तैयारियां कर ली, परिजनों ने जन्मदिन मनाकर लौटे

रामटेक शहर में रहने वाली 103 साल की गंगाबाई सावजी साखरे की बहुत ही दिलचस्प कहानी है। उनकी बीमारी का पता लगाने में इतना समय लग गया था कि अंतिम यात्रा की तैयारियां भी कर ली गईं। लेकिन शव यात्रा से पहले गंगाबाई को जिंदा होने की खबर मिली।

गंगाबाई की मौत की सूचना उनके परिजनों ने 12 जनवरी की शाम को दी, लेकिन शुक्रवार (13 जनवरी) की सुबह अंतिम यात्रा तय थी। इसी दिन उनका जन्मदिन भी होता है। सभी रिश्तेदारों ने उनका जन्मदिन मनाया। परिजनों ने कहा कि उन्होंने इसे उनके नए जीवन का जन्मदिन मानकर मनाने का फैसला किया।

शुक्रवार (13 जनवरी) सुबह 10 बजे अंतिम यात्रा तय थी। लेकिन करीब दो घंटे बाद, शाम लगभग 7 बजे, गंगाबाई के पोते राकेश साखरे ने उनके पैरों की उंगलियों में हलचल देखी। इसके बाद हाथ-पैरों की बांध खोली गई और नाक से रुई हटाई गई।

जब गंगाबाई को जिंदा होने की खबर मिली, तो परिजनों ने हैरानी में बैठ गए। उनके घर मौजूद सभी लोग चौंक गए। कुछ देर पहले उन्हें मरा हुआ मान लिया था, वहीं जिंदा पाई गईं।

रामटेक शहर के रिश्तेदारों ने अपने गंतव्य पर पहुंचने से पहले जम्मू-कश्मीर, बालाघाट समेत कई इलाकों से आए थे। उनकी मृत्यु की सूचना मिलने पर उन्होंने रामटेक लेकर निकल पड़े थे।

इस घटना के बाद घर के सामने लगाया गया मंडप हटाया गया और कुर्सियां वापस कर दी गईं।
 
मैंने यह जानने की कोशिश की है कि 103 साल की गंगाबाई को जिंदा होने की खबर मिलने पर लोग क्या महसूस करते? यार, इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है, और यह बात वास्तव में हमेशा से रही है कि जब हमें सबसे कम उम्र और सबसे ज्यादा उम्र से मरने वालों की बात करें, तो कोई भी उम्मीद या आशा नहीं रहती। लेकिन गंगाबाई की कहानी मुझे यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमें कभी अपने जीवन की दिशा और समय को समझने की जरूरत है?
 
रामटेक में 103 साल की दादी जिंदा हुई, शव यात्रा से पहले अंतिम संस्कार की तैयारियां कर ली, परिजनों ने जन्मदिन मनाकर लौटे 🤯

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे देश में 103 साल की किसी महिला को जिंदा होने की खबर मिलेगी, लेकिन इस गंगाबाई की कहानी बहुत प्रेरणादायक है। उनकी बीमारी का पता लगाने में इतना समय लग गया था, लेकिन जब उन्हें जिंदा होने की खबर मिली, तो यह सब ऐसा हुआ, जैसे सपने में।

यह घटना मुझे सोचने पर मजबूर कर रही है कि जीवन हमेशा अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं से भरा होता है, और हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। गंगाबाई की कहानी मुझे आशा देती है कि जीवन में किसी भी समय जिंदा होने का मौका मिलता है, और हम उसे अपने साथ बिताने का मौका नहीं छोड़ना चाहिए।

मुझे आशा है कि उनके परिजनों ने सही निर्णय लिया, उनके जन्मदिन को मनाने का मौका देना। यह एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी है, जिसे हम सभी सीखने की जरूरत है।
 
अरे, यह तो एक ऐसी भीड़भाड़ है जैसे लोग पागल हो गए हैं। पहले तो अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना अच्छा था, फिर से जिंदा आना... तो मेरे मन में सवाल उठते हैं कि पहले वो मर चुकी थी या नहीं?
मुझे लगता है कि इसे राजनीति करने की जरूरत नहीं है, बस यह बताना होगा कि उसके परिजनों ने जन्मदिन मनाकर लौट गए, तो सबकुछ ठीक है। मैं सिर्फ एक फॉर्मेट फ्रेक हूँ, मेरा कोई अनुभव नहीं है लेकिन लगता है कि उनके घर में बहुत ही अच्छी सार्थकता हुई होगी।
 
शव यात्रा से पहले तो हमें रास्ता ढूंढ लेते हैं। यहां गंगाबाई जी की कहानी एकदम ऐसी है जिससे सोचने पर मजबूर होते हैं 😊
 
अरे, यह तो एक बहुत ही रोचक मामला है 🤔, जिंदा होने की खबर सुनकर सभी परिजनों ने चौंककर बैठ गए थे। लेकिन फिर जब उन्हें पता चला कि उनकी दादी वास्तव में मरी हुई थी, तो हर्ष और खुशी का भाव लिए। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें परिवार के सदस्यों को अपनी राहों में उतार-चढ़ाव का अनुभव करना पड़ता है, जहां आप एक पल में जीवन और मृत्यु के बीच को स्वीकार करते हैं।

यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में किसी भी समय परिवर्तन होता रहता है, चाहे वह अच्छा हो, खास, फिर भी, हमें हर पल को स्वीकार करना चाहिए।
 
बड़ी जिंदगी है 103 साल की, तो फिर भी यह घटना मुझे अच्छी तरह से चौंकाने के लिए मजबूर करती है 🤔। कैसे पता चलता है, जिंदा होने की खबर मिलती है, तो इतनी जल्दी मरने की बात कौन सोचता है? यह हमेशा से चली आ रही घटना ही, लेकिन कभी-कभी ऐसी भी होती है जिसमें सबकुछ अजीब सा लगता है। गंगाबाई की कहानी तो मुझे वास्तविकता से बिल्कुल अलग लगती है, और मैं सोचता हूँ कि यह एक बड़ी रहस्यमय घटना होगी, अगर सब पूरी सच्चाई में बताया जाए।
 
यार, यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है 🤔 गंगाबाई जी की। उनकी उम्र 103 साल है, लेकिन उनके पास जिंदगी का जादू नहीं छोड़ा। मुझे लगता है कि यह एक देश की समस्या है कि हमारी बीमारियों को तेजी से देखें और इलाज करें, लेकिन उनकी उम्र बढ़ने पर हम उन्हें जिंदगी छोड़ देते हैं 🤷‍♂️
 
बिल्कुल तो यह तो जिंदा होने की गड़बड़ी का एक खास मामला है 🤯, अंतिम संस्कार की तैयारियां भी कर ली गईं तो फिर? 😂, शव यात्रा क्यों नहीं कर रहे थे? यह तो एक दिलचस्प स्थिति है, मुझे लगता है कि उनके परिजनों ने बहुत अच्छा फैसला लिया। जन्मदिन मनाकर वापस आना उनकी यादों और संबंधों को बनाए रखने का एक शानदार तरीका था।
 
रामटेक में 103 साल की गंगाबाई साखरे जिंदा होने की खबर सुनकर मैं थोड़ा आश्चर्यकारी महसूस हो रहा हूँ 🤔। उनकी शव यात्रा तय करने के बाद से तो लोगों की दिशा में बदलाव आ गया है, पर यह जिंदा होने की खबर निकालकर रोक देने से मुझे थोड़ा आश्चर्यचकित हुआ है। शव यात्रा की तैयारियां पूरी करने के बाद से हमें अपने प्राणों पर विश्वास करने की जरूरत होती है, न कि उनके अंतिम यात्रा की तैयारियां रोकने की। लेकिन फिर भी, मैं इस दिलचस्प घटना से जुड़कर प्रसन्न महसूस कर रहा हूँ। शुभकामनाएं गंगाबाई साखरे को! 🙏
 
🤔 तो यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है कि गंगाबाई जिंदा हुईं, खासकर जब उनकी मौत के बारे में हमें पता चला था। लेकिन लगता है कि शव यात्रा से पहले अंतिम संस्कार की तैयारियां करने के बाद वो अचानक जिंदा हो गईं। यह तो बहुत ही दिलचस्प है। मैं समझ नहीं पाया कि उनकी बीमारी का पता लगाने में इतना समय लग गया था, तो अंतिम यात्रा की तैयारियां भी कर ली। लगता है कि कुछ ऐसा हुआ जिसे हम समझ नहीं पा रहे हैं। 🤯
 
अरे, ये तो रामटेक की बहुत ही अजीब गड़बड़ी है। 103 साल की माँ तो जिंदा हुई, लेकिन शव यात्रा के बाद थोड़ी देर में तो मर गई। यह तो भारी है और फिर भी जन्मदिन मनाने का मौका मिला। उनकी परिवार ने तो इसे उनके नए जीवन का जन्मदिन बनाकर मनाया, जो बहुत अच्छी बात है। लेकिन इतनी अजीब सी घटना क्यों हुई? किसी को पता नहीं है और यह हमेशा रहेगा।
 
क्या यह तो एक सच्ची आशा की कहानी है 🤩, जिंदा होने की खबर मिलने पर फिर से रिश्तेदारों ने जन्मदिन मनाया... ये जीवन में हमेशा अच्छे बदलाव का संदेश देता है। और तो और, अगर बीमारी का पता लगाने में इतना समय लिया गया था, तो शायद उनकी जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए एक नई शुरुआत हुई है 🌞। यही उम्मीद है कि उनके परिजनों और रिश्तेदारों को इस घटना से खुशी और आशावाद मिलेगा।
 
मेरे लिए इतनी समय भाग जाने के बाद, मैंने तो अपने फोन पर देखा कि रामटेक की महिला ने 103 साल की आयु की हुई और शव यात्रा पहले ही कर ली गई थी, लेकिन फिर जिंदा हो गई 🤯। मुझे लग रहा है कि यह तो देवताओं की खेल है। उनकी बहुत सारी परिवार वालों ने जन्मदिन मनाकर चले गए, और वहीं पर जब उन्हें मरा हुआ मानकर ले जाया गया था, तो वो जिंदा पाई गईं। यह तो कितना अजीब है। मुझे लगता है कि उनकी उम्र क्या है, 100 साल से भी अधिक होगी।
 
यह तो बहुत ही अजीब बात है! पहले तो लोग उस दादी को मरे हुए मानते, फिर अचानक वह जिंदा हो जाती है और उसका जन्मदिन मनाया जाता है। यह तो एकदम भ्रम है।

मुझे लगता है कि शायद उसके परिजनों ने थोड़ा मजाक में मजाक कर रहे थे। लेकिन इतना बड़ा भ्रम पैदा करना समझदारी नहीं होती।

अब जब घर के सामने मंडप लगाया गया है और कुर्सियां वापस कर दी गईं, तो यह तो एक अच्छा संकेत है। लेकिन अभी भी मुझे लगता है कि यह सब थोड़ा अजीब है।

मैंने पहले कभी ऐसी बात नहीं सुनी है, यह तो एक नई दुनिया की तरह लग रही है।
 
अरे, ये तो जिंदा होने की कहानी है! 🤯 गंगाबाई साखरे की कहानी सुनकर मन में खुशी आती है। उनकी उम्र 103 साल थी, लेकिन जब उन्हें मरा हुआ मान लिया गया तो उन्हें जिंदा पाया गया। यह सचमुच एक आश्चर्यकारी घटना है! 🙌

क्या आप जानते हैं कि गंगाबाई साखरे ने अपने जन्मदिन मनाने का फैसला किया, जब उनका शव यात्रा करने वा रहा था। यह बहुत ही दिलचस्प बात है! 🎉

आपको भी जिंदा होने की कहानी सुननी चाहिए। यह आपके दिनों को नया रोशन कर सकती है! 😊
 
😊 रामटेक में हुई इस दिलचस्प घटना ने हमें एक दूसरे को याद दिलाया है कि जिंदगी में कभी भी कभी ऐसी बातें होती हैं जब हमें सोचना पड़ता है कि क्या वास्तव में मर गया है या नहीं। गंगाबाई जी की कहानी ने हमें यह सिखाया है कि जीवन में हर दिन एक नया अवसर आता है, और हमें उसे खुशियों से लेना चाहिए।
 
मीरा को ये ऐसी ही गड़बड़ी याद है जब पुलिस ने फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' में रानी जैसी अभिनेत्री को मरा हुआ मिलाया था। लेकिन उसके बाद तो सबको पता चल गया था कि वह वास्तव में जिंदा थी। आज भी रामटेक की गंगाबाई सावजी साखरे जैसी कहानियां होती रहती हैं जो हमें आश्चर्यचकित करती हैं।
 
मुझे ये बात बहुत अजीब लगती है... 103 साल की दीदी जिंदा हुई, तो फिर शव यात्रा की पूरी तैयारी हो गई। परिजनों ने जन्मदिन मनाकर लौटे... यह कितना अजीब है? 🤔 मुझे लगता है कि बीमारी में जिंदगी की गुणवत्ता ज्यादा नहीं रहती, तो फिर इतना समय लेने की क्यों? और जन्मदिन मनाना भी कैसे? यह सब बहुत अजीब है...
 
🤯 तो यह जिंदा होने की बात तो पूरी तरह से अजीब है! 103 साल की महिला जिंदा हुई, लेकिन पहले तो परिजनों ने शव यात्रा तय कर दी थी... यह बहुत ही रोमांचक है! 🎉 मुझे लगता है कि इस घटना से हमें यह सीखना चाहिए कि जीवन में कभी भी बिल्कुल नहीं समझ लेना चाहिए, हर समय तैयार रहना चाहिए। और इसके अलावा, जन्मदिन मनाने की बात भी बहुत ही अच्छी है! 😊
 
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