अरुणाचल में जमी हुई झील में फिसलकर दो युवक डूबे: शव मिले, दोनों केरल के थे; लेक के ऊपर बर्फ की परत टूटने से हादसा

वाह, ये बहुत ही खतरनाक घटना हुई है 🤯, दोनों युवकों के जान जाने से हमें सबक मिलता है कि पर्यटन के दौरान हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए। यह तवांग जिले में एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है कि जब तक पर्यटन का काम नहीं किया जाता, तब तक इससे दूर रहना चाहिए। 🙏

मुझे लगता है कि तवांग जिला प्रशासन ने सही कदम उठाए हैं कि वार्निंग बोर्ड लगाए गए और पर्यटकों को इन जगहों पर नहीं आने की सलाह दी गई है। इससे आगे की घटनाओं से बचने में मदद मिलेगी। 🤞

हमें अपने पर्यटन गंतव्यों की जानकारी पूरी तरह से जानना चाहिए और हमेशा सावधान रहना चाहिए। इससे हम अपने परिवार, दोस्तों और आपस में रखे गए प्रतिभाशाली लोगों को अपने साथ लेकर निकालने में मदद कर सकते हैं 🌟
 
याद आ रहा है जब हमारे पिता-प्रियजन शिविरों में घूमते थे, जिनमें तवांग जिले की सेला लेक बहुत आकर्षक थी। उन दिनों में, हमारे चाचा जी ने हमें बात करके समझाया था कि इन झीलों में जल्दी ही पहुंचने से पहले बर्फ को साफ कर लेना चाहिए। फिर भी, कई वर्षों बाद जब मैं तवांग जिले गया था, तो देखा कि शीतल वातावरण और ऊंचाई पर जाने की वजह से बर्फ पड़ गई है। यह हादसा हमें एक गहरा सबक सिखाता है कि पर्यटन के दौरान हमें अपने आसपास की सुरक्षा को ध्यान में रखना चाहिए।
 
🌊😱👦🏻🤯 ज़रूरी है कि तवांग जिला में पैर उतारने से पहले डिप्रेशन चेक कर लें। और फिर भी, अगर आप जमी हुई झील पर मौज-मस्ती करना चाहते हैं तो बर्फ से भरे पानी के नीचे नहीं जाना चाहिए। 😂🚨
 
मुझे इस घटना से बहुत गुस्सा आया 🤬। तवांग जिले में पर्यटन का काम करने के बाद भी, शायद शव मिलने के लिए न जाने की सलाह देना चाहिए था। अगर युवकों ने पहले ही उनके दोस्तों को पानी में उतरने की सलाह दी थी, तो इसका मतलब यह होता कि शायद उन्हें पता था कि वह कितना खतरनाक स्थान है। लेकिन फिर भी उनकी मृत्यु हो गई और अब कोई जवाब नहीं देने की बात कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि तवांग जिले में पर्यटन का काम करने वालों को अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और आगे से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए। 🤔
 
🤕 ये दोनों युवक तवांग जिला जैसी ऊंचाई पर मौज-मस्ती करने के लिए तैयार थे, लेकिन सेला लेक की बर्फीली झीलें उन्हें ऐसा नहीं कर पाई। मुझे लगता है कि युवकों को पहले से ही यह बात समझनी चाहिए कि तवांग जिला और उसकी झीलें बहुत खतरनाक हैं।

अगर वार्निंग बोर्ड लगाए गए भी तो पर्यटकों को पता चल गया होगा कि यहाँ खेलने के लिए तैयार होना जरूरी है। लेकिन अभी भी इतनी जिम्मेदारी कैसे संभालनी होती है?

मेरा मानना है कि तवांग जिला प्रशासन ने इस घटना से बहुत बड़ा सबक सीखा होगा। अब इन जगहों पर आने से पहले पर्यटकों को शिक्षित करना जरूरी होगा कि यहाँ मौज-मस्ती करने के लिए तैयार होना चाहिए और खेलने से पहले सावधानियां बरतनी चाहिए।
 
मैंने तवांग जिले में सेला लेक में ऐसी कई घटनाएं देखी हैं। यहाँ की शीतल वातावरण और ऊंचाई पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन इसके साथ-साथ बहुत बड़े खतरे भी होते हैं ❤️। जब तक हमें ऐसे स्थलों पर नहीं जाने देते, तब तक इन्हें खुला छोड़ना उचित नहीं है। तवांग जिला प्रशासन को जरूरी है कि वे अपने पर्यटन स्थलों के आसपास सुरक्षा में सुधार करें। यह एक महत्वपूर्ण सबक है जिसे हमें जरूर सीखना चाहिए।
 
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