अयोध्या हनुमानगढ़ी के संत को जिंदा जलाने की कोशिश: महेश दास बोले- आधी रात बिस्तर पर जलती आग फेंकी - Ayodhya News

आयोध्या में हनुमान गढ़ी के संत महेश दास को जिंदा जलाने की कोशिश हुई है, पुलिस बताते हैं कि वहीं रात 2:45 बजे आश्रम के कमरे की जाली काटकर अज्ञात लोगों ने ज्वलनशील पदार्थ फेंका और भाग गए।

संत महेश दास ने बताया, "मैं कमरे में जमीन पर ही सो रहा था। आग जैसे ही मेरे बिस्तर तक पहुंची।" उन्होंने कहा, "आग लगने के आधे घंटे में पानी और बालू से आग बुझाई। तब तक कंबल और बाकी सामान जलकर राख हो चुका था।"

अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। पुलिस CCTV और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर छानबीन में जुट गई है।

संत महेश दास ने आरोप लगाया कि बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा, "वह मेरे खिलाफ षड्यंत्र करते रहते हैं और मुझे फंसाने की साजिश पहले भी कई बार बनाई हुई है।"

उन्होंने बताया कि उन्होंने 1661 घंटों में एक करोड़ 51 लाख बार कपालभाति प्राणायाम के स्ट्रोक लगाए हैं। यह रिकॉर्ड गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

आयोध्या सर्किल के CO आशुतोष तिवारी ने बताया कि महेश दास ने तहरीर दी है, जिसमें उनके कमरे में आग लगने के बारे में बताया गया है।

इस घटना से निकलने वाली रंजिश के चलते आग लगने की संभावना है।
 
मुझे ये देखकर चिंतित हूँ कि लोगों को ऐसी गड़बड़ी में खींच लिया जा रहा है। पहले तो यह नहीं समझ में आता था कि क्यों पुलिस इतनी सावधानी बरत रही है लेकिन जब बात आग लगने की आती है, तो तुरंत साजिश की बात करने लगते हैं।

क्या हमें यह नहीं समझ में आता कि संत महेश दास ने वाकई तो अपने कमरे में आग लगने की बात कही है? और क्यों तो उन्होंने बताया कि पहले भी ऐसी घटनाएं हुई थीं? यह सब चीजें थोड़ी अजीब लगती हैं।
 
मैंने यह पढ़ा तो लगता है कि भगवान ने फिर से आश्रम में रह रहे महेश दास जी की रक्षा की है 🙏। अगर वो सीधे चार चंद्र प्रयोग कर लेते तो क्या होता। उन्होंने इतनी तेज़ी से कपालभाति प्राणायाम किया था की यहां तक कि उनके कमरे में आग लगने को भी रोक दिया गया 🚒। और वह जो कह रहे हैं कि बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास उन्हें फंसाने की साजिश बना रहे हैं, यह तो उनकी सच्चाई ही हो सकती है 🤔
 
ये सब तो बसंतिया पट्टी की दुश्मनी और रामचरण दास के बुरे मन का परिणाम ही होगा। उन्हें ऐसा करने का मौका मिल गया, फिर तो वे लोग ऐसा ही क्यों नहीं कर रहे थे। संत महेश दास ने जो कहा, वह ठीक है, लेकिन क्या कोई उनकी बात समझ रहा था? आग लगने के पीछे कुछ और भी हो सकता है... मेरा अनुमान है।
 
यह तो बहुत बड़ा संदेश है 😕। यह अच्छा है कि संत महेश दास ने जल्दी से आग बुझाई और फिर पुलिस की मदद ली। लेकिन ये घटना इतनी गंभीर है कि हमें यह सोचना चाहिए कि ऐसी चीजें कभी भी हो सकती हैं।

मैं समझता हूँ कि बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास ने संत महेश दास पर आरोप लगाए हैं, लेकिन हमें यह जानना चाहिए कि यह तो एक बड़ा मामला है और इसकी जांच अच्छी तरह से होनी चाहिए।

संत महेश दास की बातें भी बहुत यादगार हैं 🙏, उन्होंने इतनी लंबी करपालभाति प्राणायाम के स्ट्रोक लगाए हैं। यह उनकी शुद्धता और धैर्य को दिखाता है।

लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमारे समाज में ऐसी घटनाएं होने से पहले भी कई बार ऐसी बातें हुई हैं। इसलिए, हमें विश्वास करना चाहिए कि पुलिस इस मामले की अच्छी तरह से जांच करेगी।
 
बसंतिया पट्टी की साजिश? नहीं समझ रहा हूँ, सिर्फ मेंढकों और कीड़ों पर ध्यान देते हैं 🐜😒। संत महेश दास जी को फंसाने की बात करने से पहले उन्हें अपनी पूजा-पाठ कोशिश कर लेना चाहिए। कोई भी ऐसा काम नहीं करता, जिसके लिए तैयारी नहीं होती। और क्यों ना देखें कि आग लगने से पहले संत जी तो खुद अपने बिस्तर में कहीं तक न हों? 🤔😂
 
आग लगने की घटना बहुत जघन्य है ... ऐसा लगता है कि लोग धार्मिक राजनीति में ही नहीं बल्कि अपने निजी जीवन में भी दुश्मनी भरे संबंध बनाते रहते हैं ... अगर हम यह समझ लेंगे तो फिर आग लगने की घटना के पीछे कुछ और है जो हमारे समाज के बाहर है ... बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास ने संत महेश दास पर आरोप लगाए हैं लेकिन फिर भी उन्हें अपनी सच्चाई बताने का मौका नहीं मिला ... यह घटना हमारे समाज को डरा रही है और हमें एक दूसरे के प्रति अधिक संवेदनशील बनकर रहने की जरूरत है
 
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