बंगाल में बाबरी विवाद- जमीन नहीं, तो मस्जिद कहां बनेगी: हुमायूं का जवाब- 6 दिसंबर को दिखाऊंगा, TMC विधायक बोले- वो झूठा, BJP का एजेंट

मुर्शिदाबाद विधायक हुमायूं कबीर ने कहा कि हम 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे। लेकिन इस पर सवाल उठ रहा है कि क्या अब तक सच में जमीन नहीं मिली है।
 
ਭਾਈ, ਬਹੁਤ ਸਖਤ ਵਿਚਾਰ ਕਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ। ਮੇਰਾ ਮਨ ਲਗਭਗ 6 ਦਸੰਬਰ ਤੋਂ ਹੀ ਅਸੁਰੱਖਿਅਤ ਹੈ। ਕਿਉਂ? ਕਿਉਂकਿ ਯਾਦ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਬਾਬਰੀ ਮਸ਼ੀਨ ਵਿਖੇ ਭਾਰਤ ਦੀ ਸੁਤੰਤਰਤਾ ਦਾ ਜਸ ਮਾਣਣ ਲਈ, ਉਹ ਗੱਡੀ ਅਕਬਰ ਤੋਂ ਵਿਖੇ ਡੌਨੋ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਸੀ। ਫਿਰ 1992 ਵਿਚ, ਉਹ ਗੱਡੀ ਬਣਾਈ ਅਪਰਾਧ ਕਰਨ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਅਸੁਰੱਖਿਆ, ਫਿਰ ਬਹੁਤ ਵਿਚਾਰਕਾਂ ਨੇ ਲੈ ਮਾਰ ਦਿੱਤੀ।
 
ये तो और भी बढ़िया है 🙄 देखो तो ये विधायक बाबरी मस्जिद की नींव रखें, लेकिन क्या सचमुच जमीन मिल गई है, यह सवाल उठता है। देखो, हमारी सरकार हमेशा कहती रहती है कि हम तैयार हैं, लेकिन एक बार तो ऐसे में कुछ भी नहीं होता। और फिर तो ख़बरों में यही दिखाई देती है, जैसे हमेशा की तरह, सबकुछ ठीक से नहीं चल पाता। मुझे लगता है कि ऐसी चीज़ों पर ध्यान भूलने की जरूरत नहीं है।
 
[मूर्ख हुआ!] 😱🤦‍♂️ 6 दिसंबर तो यहां नहीं घूम सकते! पहले बाबरी मस्जिद की नींव राख में ही, फिर से बनाने की बात नहीं। [चलो समझदारी करें, लोगों का पैसा कहाँ जा रहा है?] 🤑🤔
 
मुझे लगता है कि ये सारा बात भूल गया कि हम तो यहाँ एक फोरम है जहां लोग अपने विचार देते हैं और सुनने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब कोई जानकारी देता है तो हमें पता चलता है कि वह कितनी मुश्किल से पूरी कर रहा है। बाबरी मस्जिद की नींव रखने की बात तो बहुत बड़ी बात है, लेकिन क्या सचमुच जमीन मिलने की बात वास्तविकता है या फिर कोई और खेल खेल रहा है? यह सारी चीजें इतनी जटिल हो गईं कि हमें पता नहीं चल पा रहा है। मुझे लगता है कि हमें इस पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन फोरम के नियमों को भूलने से बचना चाहिए। 🙄
 
मुझे लगता है कि यह बहुत अजीब है... ये देखकर मुझे थोड़ा शर्मिंदा भी हुआ है कि सरकार और राजनेताओं ने फिर से बाबरी मस्जिद पर इस तरह चर्चा शुरू कर दी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ये ऐसी बातें कहे जाएंगे।

अब मैं तो सवाल उठाने लगा हूँ कि यह सब क्यों हुआ? पहले तो हमारे पास जमीन मिल गई, लेकिन अब यहाँ तक कि यह दावा करना भी शुरू कर दिया गया है... क्या सचमुच हमें जमीन मिली है? और अगर नहीं तो फिर से क्यों इस तरह चर्चा शुरू किया जा रहा है? मुझे लगता है कि यह सभी को ध्यान में रखना चाहिए।
 
बाबरी मस्जिद की बात तो हमेशा ही ज्वलंत रही है, लेकिन इस बार ऐसे दावे करने से पहले सरकार से जमीन की पुष्टि मांगनी चाहिए। 6 दिसंबर की तारीख तो जल्द ही निर्धारित होगी, लेकिन अगर सचमुच जमीन नहीं मिली है तो बहुत बड़ा सवाल उठता है। यह तो हमारे इतिहास की सबसे जटिल परिस्थितियों में से एक है, और इस पर सरकार को सावधानी बरतनी चाहिए। मुझे लगता है कि अगर सचमुच जमीन नहीं मिली है, तो इसके बाद बहुत बड़ा विवाद हो सकता है।
 
मुझे लगता है कि यह सब कुछ बहुत जल्दी से हो रहा है, जैसे कि हमारे देश में सामान्य जीवन की गति के बराबर! 🤔 किसी भी निर्णय के पहले जमीन की पुष्टि करना बहुत जरूरी होता है, खासकर जब यह एक ऐसी जगह है जहां लाखों लोग अपना सम्मान और परंपरा रखते हैं। मुझे उम्मीद है कि विधायक जी की बात ध्यान से सुनी जाए ताकि हमारे देश की इस मुश्किल समय में एक-दूसरे को मजबूत बनाए रख सकें। 🙏
 
जी हां, यह तो हमारे देश की समस्या है कि हम हमेशा पुराने दिनों की याद करते रहते हैं और वहीं रुकना चाहते हैं। मैं तो सोचता हूं कि अगर हम पिछले जैसा समाधान ढूंढेंगे, तो फिर से उसी समस्या का सामना करना पड़ेगा।

बाबरी मस्जिद की जमीन पर दीवार बनाने का मुद्दा, यह सचमुच हमारे देश की एक बड़ी समस्या है। मैं सोचता हूं कि अगर हम इस मुद्दे को हल करने के लिए संघर्ष करेंगे, तो फिर से उसी समस्या का सामना करना पड़ेगा।

कुछ लोग कहते हैं कि हमारे देश की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए यह जरूरी है, लेकिन मैं तो सोचता हूं कि अगर हम इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की कोशिश करेंगे, तो फिर से उसी समस्या का सामना करना पड़ेगा।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश की समस्याओं को हल करने के लिए एक नए रास्ते ढूंढने की जरूरत है, न कि पुराने समाधानों पर भरोसा करना।

🤔
 
बड़ा भ्रम है यह! 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने का हकीकत में कुछ नहीं होगा। ये तो फिर से एक पुरानी गलिच्छि जो फैलाई जा रही है। सच्चाई यह है कि 1992 में मस्जिद की निर्माण रुक गई थी, और बाद में इसकी जगह राम मंदिर बनाया गया था। इस पर सरकार के साथ पूरी सहयोग और समझौता हुआ था, लेकिन अब तो कोई भी ऐसा कार्रवाई नहीं कर रहा है। 🤔
 
मैंने तो सुना है कि 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखी जाएगी, लेकिन क्या हमें पहले से ही जमीन नहीं मिल गई थी? मुझे लगता है कि कुछ लोग समझबोलते हैं। क्या यह सच है कि उनके पास जमीन तो पहले से नहीं है? ऐसा तो बहुत ही अजीब लग रहा है। मैंने सोचा है कि शायद हमें अपने नेताओं को थोड़ा जिम्मेदार ठहराना चाहिए, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि यह सब तो बहुत बड़ी बात है।

मैंने सोचा है कि हमें अपने नेताओं से सवाल पूछने की जरूरत है, और उनसे जवाब मांगने की जरूरत है। लेकिन मुझे लगता है कि यह सब तो बहुत बड़ी बात है जिस पर हमें ध्यान देना चाहिए। मैंने सोचा है कि शायद हमें अपने खुद के समाधान ढूंढने की जरूरत है, और अपने नेताओं से जवाब मांगने की जरूरत नहीं।
 
मेरे दोस्त, तुम्हारे मन में बहुत गर्मजोशी और उत्साह महसूस हो रहा है, लेकिन जब यह बाबरी मस्जिद की बात आती है तो मुझे थोड़ा डर लगने लगता है। मैं समझता हूँ कि हमारे देश की इतिहास और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है, लेकिन क्या यह सही तरीके से हुआ था?

मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझना चाहिए और दूसरों की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए। तुम्हारे देश के लोगों को अपनी पसंद-पूर्किया बातें करने का अधिकार है, लेकिन हमें सुनने की भी जरूरत है।

किसी भी घटना की जांच करने के बाद ही हम कुछ निर्णय लेने चाहिए। तुम्हारे दोस्त, मैं तुम्हारी पक्षपातता की अनुभूति करता हूँ, इसलिए मैं तुमसे सलाह दूंगा कि धैर्य रखो और सब कुछ समय पर समझ आएगा।
 
ये तो और से एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई 🤕। मुझे लगता है कि ऐसे में कुछ लोगों को अपने खेल बदलने चाहिए। यह सब तो एक बड़ा बहस बन गया है, लेकिन क्या हमने सोचा था कि ये वास्तव में जमीन तक पहुंचेगा? मुझे लगता है कि हमें अपनी ऊर्जा और समय को कुछ ऐसे मुद्दों पर लगाना चाहिए जिनमें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ हो। बाबरी मस्जिद एक ऐतिहासिक मुद्दा है, लेकिन इसे लेकर हमें आगे बढ़ने की जरूरत है।
 
🤔 यह तो बहुत दुखद बात है, जब हमारे देश की इतिहास की यादों को हम फिर से एक बार उठाने का मौका मिलता है और फिर भी कुछ लोगों को समझ नहीं आ पाता कि यह विषय कैसे इतना जदूशी बन गया है।

मैंने पढ़ा है कि अब तक जमीन तय करने की बात में इतना समय लग रहा है, तो मुझे लगता है कि हमारे देश की राजनीति में थोड़ी समझदारी चाहिए, जब सरकार और विपक्ष मिलकर एक साथ मिलते हैं तो बेहतर होता है।

अब जब यह बातचीत हो रही है, तो हमें अपने देश की शांति और एकता पर ध्यान देना चाहिए। जिस भी तरह से भारत की समृद्धि बढ़ेगी, वहीं हमारे देश की एकता भी मजबूत होगी।
 
मैंने 20वीं सदी की शुरुआत से यह कहानी सुनी है और तो सुनी है लेकिन ऐसा लगता है कि व्यक्ति बात करने की निश्चितता नहीं रखते। बाबरी मस्जिद की बात करते समय मुझे याद आता है कि 1992 में वहां के मस्जिद को तोड़कर बहुत दंगा हुआ था। तब से यह विषय हमेशा जंग की तरह चल रहा है। लेकिन अगर सच में जमीन नहीं मिलेगी तो फिर क्यों बोल रहे हैं? 🤔😕
 
मेरे दोस्त, यह सारा बात जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाई करने की है 🙄। मुर्शिदाबाद विधायक ने कहा है कि 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे, लेकिन यह तो सुनने में भी अजीब लग रहा है। सच में जमीन नहीं मिली है, तो फिर क्यों इतनी बातें कर रहे हैं? ये सब कुछ एक बड़ी खेल है और हमें इसकी जड़ को समझने की जरूरत है।

मेरा लगता है कि इस मामले में सच्चाई और झूठ की दूरी तय करने की जरूरत है। हमें अपने नेताओं से यह नहीं मान लेना चाहिए कि वे हमारी बातों को समझते हैं और हमारी जरूरतों को पूरा करते हैं। हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ने की तैयारी करनी चाहिए, लेकिन इससे पहले हमें यह जानने की जरूरत है कि हम वास्तव में क्या चाहते हैं और क्या हमें मिल सकता है। 🤔
 
मुझे लगता है कि यह वाकय बहुत ज्यादा पेचीदा है, 🤔 और कुछ लोगों को पता नहीं है कि बाबरी मस्जिद की नींव पहले से ही 1992 में खदेड दी गई थी, तो फिर विधायक हुमायूं कबीर कैसे कह सकते हैं कि हम 6 दिसंबर को नींव रखेंगे, यह सुनकर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ 🤷‍♂️। और सबसे बड़ी बात, अगर सच में जमीन नहीं मिली है तो फिर कैसे कह सकते हैं कि हम नींव रखेंगे, यह तो बहुत ही अजीब लग रहा है। मुझे लगता है कि लोगों को थोड़ा जानकारी देनी चाहिए, ताकि वे सही पता कर सकें। 🤓
 
मैंने पढ़ा है यह खबर, मुझे लगता है कि यह बहुत दुखद है 🤕। बाबरी मस्जिद की नींव रखने की बात तो हमेश से सुनाई देती रही, लेकिन अब तक जमीन नहीं मिल पाई, इसका मतलब क्या होगा? यह एक बहुत बड़ा सवाल है और मुझे लगता है कि हमें इस पर और अधिक जानकारी चाहिए। मैं शायद मुर्शिदाबाद विधायक को उनकी बात समझने की कोशिश करूँगा, लेकिन यह तो पूरी तरह से संभव नहीं है। 🤔

क्या हमें उम्मीद करनी चाहिए? क्या हमारे देश में सच्चाई और न्याय की ओर कभी एक साथ बढ़ने की शक्ति है? ये सवाल मुझे बहुत ही गंभीरता से पूछने लगते हैं। 🤷‍♂️
 
मुर्शिदाबाद विधायक हुमायूं कबीर के बारे में यह बात सुनकर मुझे थोड़ा निराश महसूस हो रहा है 🤔। जैसे ही हमें पता चला कि उन्होंने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेगी, लेकिन सवाल उठता है कि क्या वास्तव में जमीन मिल गई है? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक धरोहर की बात करता है। अगर सच में जमीन नहीं मिल पाई तो यह एक बड़ा झूठ होगा 🙅‍♂️। मुझे उम्मीद थी कि हमारे नेताओं से ऐसा कुछ होता, जिससे हम सभी एक दूसरे के साथ खुश और गर्व महसूस करें।
 
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