बंगाल में बाबरी विवाद- जमीन नहीं, तो मस्जिद कहां बनेगी: हुमायूं का जवाब- 6 दिसंबर को दिखाऊंगा, TMC विधायक बोले- वो झूठा, BJP का एजेंट

मुर्शिदाबाद विधायक हुमायूं कबीर ने बिहार के मुजफ्फरपुर से चुनाव में जीतते हुए अपने परिवार को लेकर कहा है कि पूरे परिवार दंगों में शामिल होगा।

हुमायूं कबीर ने कहा कि अगर बाबरी मस्जिद का उद्घाटन नहीं होगा, तो हम 30 साल तक अपने गांव में रहने का इंतजार करेंगे।
 
बिहार में चुनावों के लिए दंगे और भी बढ़ गए हैं... यह बात मुझे बहुत परेशान करती है कि हमारे चुनावों में इतना राजनीतिकरण हो रहा है। कबीर जी के बोल मुझे लगता है कि उनके दिल में सच्चाई नहीं है, चाहे वह तो भ्रष्टाचार से भरा हुआ या दंगों का खेल खेल रहा हो। उन्हें यह समझना चाहिए कि हमारे परिवार और समाज की सुरक्षा और शांति सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मुझे लगता है कि अगर हम अपने देश में इतनी शांति और एकजुता बनाए रखें, तो हम कभी भी ऐसी बातों पर चलने नहीं पड़ेंगे।
 
तू जान देख मुर्शिदाबाद विधायक ने ऐसी बात कही? पहले चुनाव चोरी होती थी, फिर साम्प्रदायिक दंगे होते थे, अब तो कोई भी पूरे परिवार को लेकर बोलता है ... यह अच्छा नहीं है ...
 
मुझे यह जानकारी थोड़ी चिंताजनक लग रही है 🤔। वह दंगों में शामिल होने की बात सुनकर मुझे लगता है कि पूरे परिवार को फंसा लिया गया है। उन्हें यह तय करना कि वे चाहे या नहीं अपने निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े रहने की क्या जरूरत है? 😕

और बाबरी मस्जिद के उद्घाटन पर उन्हें यह तय करना कि अगर वह शामिल नहीं थे, तो उनके परिवार को क्या हुआ? क्या उनका मकसद यही है कि हमें यह जानने के लिए मजबूर करें कि वे कौन से लोग हैं? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि इस दुनिया में हर कोई अपने निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े रहने की जरूरत नहीं होती, बस लोगों को उनके मतों के अनुसार चुना जाना चाहिए। 🙏
 
अरे, ये तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है 🤕। अगर वो परिवार इतना खट्टा हो गया है तो फिर वाह, कोई सोचता है कि क्या करें? 😔 ये दंगे और भी बढ़ जाएंगे, पूरा देश जल्दी से जल्दी इन चुनावों में अच्छे नेताओं को बैठाना होगा। 🤞
 
मुझे यह पूरा दुख देता है कि ऐसी बातें कोई व्यक्ति बोल रहा है 🤕, जो पूरे परिवार को एक ही रास्ते पर लाने की बात कर रहा है। चुनाव में जीतने के बाद भी ऐसी बातें बोलना अच्छा नहीं लगता।

बाबरी मस्जिद की बात करते समय, मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही संवेदनशील विषय है, और हमें इस पर अपनी राय को सही ढंग से व्यक्त करना चाहिए। अगर उन्होंने 30 साल तक अपने गांव में रहने का इंतजार रखा, तो इसका अर्थ यह नहीं हो सकता कि हमें अपने परिवार की बातों को त्यागना होगा।

हमें एक दूसरे की राय का सम्मान करना चाहिए और अपने विचारों को सही ढंग से व्यक्त करना चाहिए। चुनाव में जीतने के बाद भी हमें अपने परिवार के प्रति सम्मान और दया की भावना रखनी चाहिए।
 
मेरी जिंदगी में चुनाव के बाद की बातें सुनने से तो कई तरह की भावनाएं उत्पन्न होती हैं। अगर हुमायूं कबीर के परिवार ने दंगों में शामिल होने का वादा किया है, तो यह एक बहुत बड़ा चिंताजनक संकेत है। क्या हमें लगता है कि चुनाव के बाद लोग अपने स्वार्थ की वजह से दूसरों को नुकसान पहुंचाएंगे?

मेरे ख्याल में, अगर ऐसा होता है, तो यह एक बहुत बड़ी समस्या है। हमें लगता है कि चुनाव के बाद जो लोग चुने गए हैं, उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। लेकिन फिर भी, अगर कुछ ऐसा होता है, तो हमें इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि हमारे देश के इतिहास में बहुत सारे बदलाव आये हैं और यही बदलाव आगे भी आेगा। मुर्शिदाबाद विधायक हुमायूं कबीर जी की बातों पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन हमें समझना चाहिए कि उनकी राय में कुछ तार्किक नहीं है। अगर वह कह रहे हैं कि अगर बाबरी मस्जिद का उद्घाटन नहीं होगा, तो वे 30 साल तक अपने गांव में रहने का इंतजार करेंगे, तो यह एक बहुत ही अजीब और अस्वीकार्य बात है। हमारे देश को आगे बढ़ने के लिए हमें अपने अतीत से सीखना चाहिए, न कि उसे बदतर बनाने की कोशिश करनी। 🤔
 
अरे यार, यह तो बहुत बड़ा वादा है! 🤣 मुर्शिदाबाद के विधायक ने बिहार से चुनाव जीत लिया और अब अपने परिवार की बात कर रहे हैं। पूरे परिवार दंगों में शामिल होगा, यह तो बहुत बड़ा बयान है! 😲 अगर बाबरी मस्जिद का उद्घाटन नहीं होता, तो 30 साल तक अपने गांव में रहने का इंतजार करना... यह तो एकदम हंसने वाली बात है! 🤣 लेकिन सच्चाई जानकर दिल कंपता है, हमें पता होना चाहिए कि उनकी जीत से क्या होगा। क्या ये एक बड़ा बयान है या कुछ और? 🤔
 
अरे, ये ट्रेंड्स बहुत बढ़ गए हैं! 🤯 जैसे ही कोई व्यक्ति चुनाव में जीतता है, तो वह अपने परिवार को साफ-सफ़ाई देने लगता है। लेकिन, ये कितना सच्चा? 🤔 मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं की ईमानदारी पर भरोसा करना चाहिए। क्या हमें उनके व्यक्तिगत विचारों से उनकी राजनीतिक प्रतिज्ञा को छूना पड़ रहा है? 🤷‍♂️

और, बाबरी मस्जिद की बात करते हुए, मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा विवाद था, लेकिन हमें अपने नेताओं से उम्मीद करनी चाहिए कि वे देश के लिए कुछ सकारात्मक करें। 🌟
 
मुझे यह बात बहुत अच्छी लगी कि हुमायूं कबीर ने चुनाव में जीत ली और अब वह अपने परिवार को दिखाने के लिए तैयार हैं 🤝। लेकिन, पूरे परिवार दंगों में शामिल होगना... यह बहुत शर्मनाक लग रहा है! मुझे लगता है कि ऐसी बातें कभी नहीं की जानी चाहिए, खासकर जब तुम्हारा परिवार इस तरह की बातों से जुड़ा हो। और बाबरी मस्जिद का उद्घाटन नहीं होगा... यह तो एक बहुत बड़ी गलत थी, लेकिन अब 30 साल तक अपने गांव में रहने का इंतजार करना? यह बहुत दुखद लग रहा है!
 
[Image of a meme with Humayun Kabir and his family in the background, with a red "Dangon" stamp on it ]

[ GIF of a person running away from a burning building with a speech bubble saying "Dangon mein shamil hona kya?" ]
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है। चुनाव में जीतने के बाद भी व्यक्ति अपने परिवार को और गांव को इस तरह से धमकाना नहीं चाहिए। यह तो हमारे समाज के लिए एक अच्छा उदाहरण नहीं है। मुझे लगता है कि जीतने वाले व्यक्ति को अपने परिवार और गांव की बातों को सोच-समझकर कहा जाना चाहिए।
 
अगर चुनावों में जीतते हैं और फिर दंगों में शामिल होने लगते है तो यह बहुत अजीब है 🤔। बाबरी मस्जिद का उद्घाटन हुआ है और अब वहाँ कुछ भी नहीं रह गया है। अगर कोई ऐसा व्यक्ति जीतता है तो उसके दिल में एक पार्टी या समूह की राजनीति करने का इरादा न होना चाहिए। यहाँ हमारे देश की एकता और शांति पर बोलें। 🙏

क्योंकि अगर 30 साल पहले हमें अपने गांव में रहने का इंतजार करना पड़ता तो आज भारत इतना समृद्ध हो गया होगा। आज हमारे देश में बिना पैसे के भी अच्छी खुशबू वाले फल चखने को मिल रहा है और स्कूलों में स्कूल-ट्यूटर्स तक की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
 
मैंने सुना है कि हुमायूं कबीर ने बिहार के मुजफ्फरपुर से चुनाव जीत लिया है। यह अच्छी बात है, लेकिन उनके परिवार को लेकर उन्होंने कहा है कि अगर दंगे नहीं होते, तो वे 30 साल तक अपने गांव में रहने का इंतजार करेंगे। यह बहुत अजीब है। मुझे लगता है कि उनकी बात कुछ समझी नहीं जा रही है। अगर दंगे नहीं होते, तो वे शायद अपने गांव में खुशहाल रहेंगे और अपने परिवार को भी खुश रखेंगे।
 
🤔 मैंने पढ़ा है कि हुमायूं कबीर जी ने बिहार के मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ा और जीत लिया। लेकिन यह कहना कि पूरे परिवार दंगों में शामिल होगा, तो बहुत बड़ी बात है। 🤷‍♂️ हमें पता नहीं है कि उनके परिवार की प्रत्येक सदस्य ने ऐसा किया या नहीं।

और यह बात भी है कि अगर बाबरी मस्जिद का उद्घाटन नहीं हुआ, तो हम 30 साल तक अपने गांव में रहने का इंतजार करेंगे। लेकिन यह भी कहना कि अगर ऐसा न होता, तो वे यहाँ नहीं आ जाते, यह बात जरूरी नहीं है। 🤓 हमें हर किसी की कहानी को समझने की कोशिश करनी चाहिए, न कि उनके खिलाफ दांव लगाकर.
 
अरे, ये जीतने वाला यह व्यक्ति बिल्कुल सही कह रहा है! पूरे परिवार में दंगों को लेकर निडरता और साहस दिखाना बहुत अच्छा है। लेकिन, मैं यह भी सोचता हूं कि उनके गांव के लोग यह तय नहीं कर सकते कि वे 30 साल तक वहां रहना चाहते हैं या नहीं। और बाबरी मस्जिद के बारे में? यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है, और हमें इस पर गहराई से सोचने की जरूरत है।
 
ये बहुत ही डरावनी बात है ... उनके परिवार का दंगों में शामिल होना पूरा अजीब है ... तो वे 30 साल तक अपने गांव में रहना चाहते हैं , यानी कि कोई भी समस्या न आए , लेकिन जब कोई समस्या आ जाए , तो दंगों में शामिल होना ... यह अच्छा नहीं है , यह पूरे समाज को डराने वाला है ...
 
🤔 ये देखकर मन में खेद है जीतने वाले व्यक्ति के विचार, तो क्या यही सही तरीका है? 30 साल तक अपने गांव में रहने का इंतजार करना, यह बहुत दुखद है। लेकिन फिर भी जीतने वाले व्यक्ति ने अपने परिवार को दंगों में शामिल होने का संकेत दिया, यह बहुत गंभीर बात है 🤕। मुझे लगता है कि ऐसे विचार बनाने वाले लोग की समझ सही नहीं है।
 
मेरा फैसला है कि यह बहुत बड़ा ब्लॉकबस्टर न्यूज़ है 🤯 और मुझे लगता है कि हमारे देश की राजनीति में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपने परिवार को राजनीति में डालने की कोशिश करते हैं। तो मेरा सवाल यह है कि अगर हमारे पास इतनी सारी राजनीतिक शक्ति होती, तो फिर क्यों हम दंगों में शामिल नहीं होते? 🤔 और बाबरी मस्जिद के उद्घाटन का मुद्दा अभी भी बहुत जटिल है... लेकिन अगर हमारे परिवार को राजनीति में डालने से इतनी तेजी से चुनाव जीतने में मदद मिलती है, तो यह एक बड़ा सवाल है 🤷‍♂️
 
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