मेरी जिंदगी में चुनाव के बाद की बातें सुनने से तो कई तरह की भावनाएं उत्पन्न होती हैं। अगर हुमायूं कबीर के परिवार ने दंगों में शामिल होने का वादा किया है, तो यह एक बहुत बड़ा चिंताजनक संकेत है। क्या हमें लगता है कि चुनाव के बाद लोग अपने स्वार्थ की वजह से दूसरों को नुकसान पहुंचाएंगे?
मेरे ख्याल में, अगर ऐसा होता है, तो यह एक बहुत बड़ी समस्या है। हमें लगता है कि चुनाव के बाद जो लोग चुने गए हैं, उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। लेकिन फिर भी, अगर कुछ ऐसा होता है, तो हमें इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।