चार पुरुषार्थ किताब हमें बताती है कि जिंदगी सिर्फ पैसे कमाना या मजे करना नहीं, बल्कि सद्गुण, समृद्धि, प्रेम और मुक्ति का संतुलन है। यह किताब आसान भाषा में लिखी गई है जैसे कोई दोस्त आपको समझा रहा हो। इस किताब में हमें बताया गया है कि अगर आप इन चारों चीजों को अपनी जिंदगी में बैलेंस करेंगे, तो इंस्पिरेशन, सुंदरता, शांति और बड़े मायने से भरी जिंदगी जी सकते हैं।
इस किताब में लिखा है कि अगर आप अपना उद्देश्य पता है, तो ये किताब उसे जीने का ब्लूप्रिंट देती है। अगर नहीं पता, तो खुद को बेहतर समझने के टूल्स देती हैं। इस किताब में लेखक हमें बताते हैं कि धर्म, अर्थ और काम का संतुलन है, तो मोक्ष खुद आता है।
इस किताब में लिखा गया है कि पैसे के बिना जिंदगी मुश्किल हो जाती है। यह हमें बताता है कि धर्म और अर्थ को संतुलित रखें।
इस किताब में लेखक हमें बताते हैं कि इच्छाओं को दबाना नहीं, उन्हें सही तरीके से पूरा करना।
यहां कुछ विशेष बातें हैं जिन पर इस किताब अधिक ध्यान देती है:
1. धर्म: यह हमें बताता है कि जिंदगी में सबसे पहले हमें अपने असली कर्तव्य समझना चाहिए।
2. अर्थ: यह बताता है कि जिंदगी चलाने के लिए जरूरी समृद्धि है। लेकिन सिर्फ पैसों को नहीं बल्कि धर्म और अर्थ को भी।
3. काम: काम यानी इच्छाएं, प्रेम, सेंसुअल खुशियां।
4. मोक्ष: यह हमें बताता है कि अपने असली रूप को पहचानना।
इस किताब में लिखा है कि अगर आप अपना उद्देश्य पता है, तो ये किताब उसे जीने का ब्लूप्रिंट देती है। अगर नहीं पता, तो खुद को बेहतर समझने के टूल्स देती हैं। इस किताब में लेखक हमें बताते हैं कि धर्म, अर्थ और काम का संतुलन है, तो मोक्ष खुद आता है।
इस किताब में लिखा गया है कि पैसे के बिना जिंदगी मुश्किल हो जाती है। यह हमें बताता है कि धर्म और अर्थ को संतुलित रखें।
इस किताब में लेखक हमें बताते हैं कि इच्छाओं को दबाना नहीं, उन्हें सही तरीके से पूरा करना।
यहां कुछ विशेष बातें हैं जिन पर इस किताब अधिक ध्यान देती है:
1. धर्म: यह हमें बताता है कि जिंदगी में सबसे पहले हमें अपने असली कर्तव्य समझना चाहिए।
2. अर्थ: यह बताता है कि जिंदगी चलाने के लिए जरूरी समृद्धि है। लेकिन सिर्फ पैसों को नहीं बल्कि धर्म और अर्थ को भी।
3. काम: काम यानी इच्छाएं, प्रेम, सेंसुअल खुशियां।
4. मोक्ष: यह हमें बताता है कि अपने असली रूप को पहचानना।