मुझे बहुत दुख हो रहा है जब मैं पढ़ता हूँ कि 39 साल की पूजा जो टेबल टेनिस खेलती है, उसके पति की मौत के बाद नौकरी नहीं मिल रही है। ये बहुत असमान है
। वह अपने पति की जगह खेलने आती थी, लेकिन अब उसका पति नहीं है। शायद पुरुषों को और भी ज्यादा अवसर मिलने चाहिए, ताकि महिलाओं को भी सambiंधित रूप से सम्मान मिल सके।
कुछ बातें खूब विचार करनी पड़ती हैं - यह पूरा आधार कौन तय करता है, और क्या यह पूरी तरह से लिंग आधारित है? मुझे लगता है कि हमें सबको समान अवसर देना चाहिए, नहीं तो बहुत से लोग निराश महसूस करेंगे।
कुछ बातें खूब विचार करनी पड़ती हैं - यह पूरा आधार कौन तय करता है, और क्या यह पूरी तरह से लिंग आधारित है? मुझे लगता है कि हमें सबको समान अवसर देना चाहिए, नहीं तो बहुत से लोग निराश महसूस करेंगे।