ब्लैकबोर्ड-इंटरनेशनल टीटी प्लेयर की पत्नी गहने बेचकर घर चला रही: पति की मौत के बाद नौकरी का वादा किया था, 4 साल से दफ्तरों के चक्कर लगा रही

मुझे बहुत दुख हो रहा है जब मैं पढ़ता हूँ कि 39 साल की पूजा जो टेबल टेनिस खेलती है, उसके पति की मौत के बाद नौकरी नहीं मिल रही है। ये बहुत असमान है 🤔। वह अपने पति की जगह खेलने आती थी, लेकिन अब उसका पति नहीं है। शायद पुरुषों को और भी ज्यादा अवसर मिलने चाहिए, ताकि महिलाओं को भी सambiंधित रूप से सम्मान मिल सके।

कुछ बातें खूब विचार करनी पड़ती हैं - यह पूरा आधार कौन तय करता है, और क्या यह पूरी तरह से लिंग आधारित है? मुझे लगता है कि हमें सबको समान अवसर देना चाहिए, नहीं तो बहुत से लोग निराश महसूस करेंगे।
 
इस दुनिया में जो लोग अच्छे से अच्छे से बोलते हैं और दूसरों का मुँह ढकते रहते हैं, उनकी चीजें सबसे पहले टूट जाती हैं। पूजा जी ने सचमुच अपने पति की जगह नौकरी के लिए तैयारी की, वह बिल्कुल सही थी। अगर लड़की भी काम करने के लिए तैयार होती, तो दुनिया अच्छी तरह से चलने लगेगी। मैं उसकी जगह खेलती और नौकरी करती, फिर मेरे जीवन कैसा था? शायद सब कुछ आसान था। 🤔
 
मैंने एक दोस्त को बात किया जिसकी भाई ने खेलों में पदक जीत लिए हैं। वाह! वह बहुत परफॉर्मेंस करता है, लेकिन अभी तो मुझे ये सुनकर अच्छा लगा कि दिल्ली की पूजा ने अपने पति की जगह नौकरी चाहती थी। वह टेबल टेनिस खेलती हुई इतनी तेज़ और अच्छी थी, लेकिन आजकल उसकी जिंदगी और भी मुश्किल हो गई। हमें उनकी स्थिति को समझने का प्रयास करना चाहिए, खासकर जब हमारे पास अपने परिवारों के लिए इतने मौके नहीं होते। तो हम दोस्त उनके साथ खड़े रहेंगे और उन्हें सहारा देने की कोशिश करेंगे।
 
अरे, यह तो बहुत दुखद बात है🤕। पूजा जी की तबीयत बहुत खराब हो गई, वह रोज टेबल टेनिस खेलने के लिए अपना सारा समय दे रही थी, परिणामस्वरूप उसकी पत्नी की मौत हो गई। अब वाही वो नौकरी नहीं मिल पाई। यह तो बहुत बड़ा झटका लगा। अगर वह पति नहीं थे तो शायद साथ में खेलने का मौका भी मिल जाता, लेकिन अब तो वह एकल खिलाड़ी बन गई है।
 
अरे, इस दुनिया में इतनी तेजी से बदलने की क्या जरूरत? पहले वो खेलती थी, अब कोई नौकरी भी नहीं मिल रही। उसकी पत्नी की मौत के बाद जो सब हुआ, वही सब वो लोगों को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का दमदार अभिनेता बनकर नौकरी करने की ताकत कहां?
 
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