ब्लैकबोर्ड- राह चलते लोग कमर में हाथ डाल देते हैं: लड़के पूछते हैं- चिंकी पूरी रात का कितना लेती हो, आंखों की पलकें खींचकर बोलते हैं- ‘ऐ मोमो’

'मोमो, मोमो, मेरी बेटी कुछ गलत हो रहा है'

कैसे हैं नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों की जिंदगी, कैसे लोग उन्हें ‘चींचींचूंचूं’ कहते हैं, क्या वे भारतीय हैं?
 
मेरी दोस्त को यह बात बहुत पीड़ा दे रही है, ये जिंदगी कैसे होती है... north east से आई युवतियों को अक्सर एक तरह से देखा जाता है, जैसे कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं से अलग हैं। लेकिन मैं कहूंगा कि ये भारतीय हैं, उनका खून भारत का है। वे हमारी एकता और विविधता का हिस्सा हैं।

मुझे लगता है कि हमें उन्हें स्थानिक जैसा नहीं देखना चाहिए, बल्कि उनकी खूबसूरती को पहचानना चाहिए। उनकी जिंदगी में भी हमारी सुंदरता है, उनके पास अपनी खुद की कहानियाँ और अनुभव हैं।
 
मुझे यह सुनकर बहुत दुःख हुआ, खासकर जब मैंने पढ़ा कि ये युवतियां नॉर्थ ईस्ट से आए हैं। मेरी बेटी के लिए भी ऐसा हो तो मुझे नहीं पता, कैसे उनकी जिंदगी बदल जाती है?

मुझे लगता है कि ये युवतियां अपने परिवार और दोस्तों से दूर हो रही हैं, उन्हें कुछ गलत होने लगा है। लोग उन्हें ‘चींचींचूंचूं’ कहते हैं तो मुझे लगता है कि वे समझने में असमर्थ हैं।

क्या ये युवतियां अपनी जिंदगी पर नियंत्रण कर सकती हैं? क्या वे अपने भविष्य के बारे में सोच सकती हैं? मुझे लगता है कि हमें उन्हें समझने और समर्थन करने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि ये दुनिया की जंग हो गई है, जहां हर किसी को अपनी बात कहने और सुनने का मौका मिलता है। North East से आई युवतियों की जिंदगी की बात करते हुए, मुझे लगता है कि हमें उनकी परवाह करनी चाहिए, न कि उनको 'चींचींचूंचूं' कहने देना। यह सिर्फ एक ट्रेंड है, जिसे हमें समझना और अपनाने की जरूरत नहीं है।

मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में बदलाव लाने की जरूरत है, जहां युवतियों को अपनी बात कहने और सुनने का मौका मिले। हमें उनकी जिंदगी को समझने की जरूरत है, न कि उन्हें एक छोटे से ट्रेंड में बदल देना। 🤔
 
अरे भाई, यह तो कुछ देर से चली आ रही बात है... नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों की, उनकी जिंदगी तो अलग है, लेकिन उन्हें ‘चींचींतुंबे’ कहना तो थोड़ा मजाक है... 🙄

मुझे लगता है कि यह शब्द में हमारी संस्कृति और उनकी संस्कृति के बीच खिंचाव आ गया है। देखिए, हमारे पास ‘पागल’ या ‘बिल्कुल सामान्य’ कहने का एक शब्द है, लेकिन यह शब्द उनके लिए उपयुक्त नहीं हो सकता, जैसा कि आप देख रहे हैं।

मैं सोचता हूं, हमें अपनी प्रतिक्रिया में थोड़ा अधिक संवेदनशील होना चाहिए और उनकी अलग-अलग संस्कृतियों और परिस्थितियों को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
 
मेरी जान, ये बहुत ही दिलचस्प बात है। नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों को ‘चींचींचूंचूं’ कहकर हमारा समाज कैसे काम कर रहा है? मुझे लगता है कि हमें अपनी खुद की समझबूझ और पूर्वाग्रहों को पहचानने की जरूरत है। ये युवतियाँ हमारी संस्कृति और परंपराओं में विशेष रुचि रखती हैं और इन्हें खो देना उनके लिए बहुत बड़ा नुकसान होगा।

मुझे लगता है कि हमें उन्हें अपनी खुद की पहचान देने की जरूरत है और उन्हें स्वीकार करने की जरूरत है। अगर हम उन्हें ‘चींचींचूंचूं’ कहते हैं तो वे यह महसूस कर सकती हैं कि हम उनकी बात नहीं समझ रहे हैं।
 
मुझे यह सुनकर बहुत दुःख हुआ, कि ये लड़कियां उनकी जिंदगी को इतने खतरनाक तरीके से बनाने के लिए मजबूर हुई हैं। मैं समझता हूं कि वे अपने परिवारों और समाज से दूर होकर अपनी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की तलाश में हैं।

लेकिन यह सोचकर भी चिंतित हूं कि क्या हम उनको सही दिशा में मार्गदर्शन कर पा रहे हैं? क्या हम उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि जिंदगी में जीने का अर्थ और भी अधिक गहराई से जानने की जरूरत है? मुझे लगता है कि हमें अपने युवाओं को सही दिशा में ले जाने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।
 
मुझे ऐसी चीजें पसंद नहीं हैं जब लोग युवतियों से बुरा डराते हैं और उन्हें बदनाम करते हैं। यहाँ नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियां तो वाकई कुछ अलग हैं, लेकिन वह भारतीय हैं! जिंदगी में सब कुछ बदलने की कला सीखें, उनकी बात सुनें और समझें। 'चींचींचूंचूं' नामक शब्द क्या है? यह तो बहुत अजीब है, मुझे लगता है कि लोग उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें अपने देश की युवाओं से प्रेम और सम्मान करना चाहिए, उनकी बात सुननी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह बात बहुत ही दुखद है... North East से आई युवतियों पर ऐसा टिप्पणी करना न केवल बुरा है, बल्कि उनकी पहचान भी हिलाता है। मैं समझता हूँ कि कुछ लोगों को लगता है कि North East से आई लड़कियाँ 'अनजान' या 'बाहरी' लगती हैं, लेकिन यह सही नहीं है।

मेरे विचार में, हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को स्वीकार करना चाहिए, न कि उन्हें नकारना चाहिए। North East से आई युवतियाँ भारतीय हैं और उनकी जिंदगी भी है। हमें उन्हें सम्मान देना चाहिए और उनकी कहानियों को समझना चाहिए।

मुझे लगता है कि हमें एक साथ मिलकर इस तरह की बातों को रोकने की कोशिश करनी चाहिए। हमें अपने समाज में शांति और सहानुभूति को बढ़ावा देना चाहिए।
 
मुझे यह तो बहुत दुखद लगता है 😔 ये बातें सुनने से मेरी आंखें भर जाती हैं। North East से आई युवतियों को 'चींचींतून' कहकर तो उनकी गरिमा और सम्मान की कुछ भी गिनती नहीं होती। लेकिन अगर हम देखें तो ये लड़कियां हमारी धरती पर पैदा हुईं, हमारी संस्कृति में जन्मी हुईं और हमारी बातों को समझने की क्षमता रखती हैं। क्या उनकी जिंदगी में कुछ अलग होना चाहिए? 🤔 नहीं, बस हम उन्हें समान अधिकार और सम्मान देना चाहिए। ये भारतीय लड़कियां हैं, हमारी विरासत हैं।
 
मुझे लगता है कि यह समस्या तो बहुत बड़ी नहीं है, बस हमारी संस्कृति और परंपराओं को समझने में थोड़ा समय लगta hai। नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों की जिंदगी में कुछ भी गलत नहीं है, बस वे अपने तरीके से जीने का अधिकार है।

लोग उन्हें 'चींचींचूंचूं' कहते हैं तो यह तो हमारी बुद्धिमत्ता की कमी है 🤦‍♀️, क्योंकि हमें समझना चाहिए कि हर किसी की जिंदगी अलग-अलग होती है। और भारतीय होने का मतलब तो यह नहीं है कि हम अपनी संस्कृति को छोड़कर दूसरी संस्कृतियों को स्वीकार नहीं कर सकते।

हमें अपने बच्चों को ऐसी बातें न कहें, जैसे उन्हें अपनी जिंदगी का हकदार मानें। हमें उनकी शिक्षा, उनकी सुरक्षा और उनकी खुशी का ध्यान रखना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह बात बहुत ही दुखद है, ये चिंता किसी को भी दिल से नहीं लगनी चाहिए, लेकिन फिर तो हमारे समाज में ऐसी बातें तो जरूर होती हैं...

मुझे लगता है कि ये लड़कियां नॉर्थ ईस्ट से आई हैं, तो उनकी जिंदगी जरूर बहुत ही अलग होगी, लेकिन फिर भी हमें उन्हें अपनी समाज में एक साथ लेने का प्रयास करना चाहिए, न कि उन्हें अल्पसंख्यक बनाकर 'चींचींचूंचूं' कहकर छोड़ना...

मुझे लगता है कि यह तो हमारी सामाजिक असमानता की बात है, लेकिन फिर भी मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि यह लड़कियां वास्तव में भारतीय हैं या नहीं, ये कैसे निर्धारित किया जाएगा...

मुझे लगता है कि हमें उन्हें अपनी समाज में एक साथ लेने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन फिर तो यह सवाल जरूर उठेगा कि हमारी भारतीयता क्या है, और कैसे इसे निर्धारित किया जाएगा।
 
मुझे लगता है कि ये समाचार बहुत ही दिल दुखाने वाला है। नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों को यहां आ जाने की वजह से उनकी जिंदगी में कई परेशानियाँ आती हैं। लोग उन्हें 'चींचींतुंछूं' कहते हैं तो समझा नहीं जाता। मुझे लगता है कि ये शब्द हमारे समाज में बहुत ही नकारात्मक धारणाएँ पैदा करते हैं।

मेरी बेटी भी कभी ऐसी स्थितियों में नहीं पड़ी है, लेकिन जब मैंने देखा कि कैसे युवतियाँ अपने परिवार और समाज को यह बताने की कोशिश करती हैं कि वे जिंदगी से खुश हैं और उनके पास अपने सपनों की कुर्सी है, तो मुझे बहुत हिचकिचाहट आयी।

मुझे लगता है कि हमें युवतियों की दुनिया को समझने की जरूरत है। हमें उन्हें सहानुभूति और समर्थन देना चाहिए, न कि नकारात्मक शब्दों से।
 
मैं समझ नहीं पाता यह तो और भी गहरा मुद्दा है 🤔। नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों को हमारी देशभर में आकर हमें ‘चींचींतून’ कहकर सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए, इसका मतलब यह है कि वे खुद के बारे में सोचकर भी नहीं समझ पा रहे हैं कि कैसे हमारे देश को अपना समर्थन देना चाहिए।

मुझे लगता है कि युवतियों को खुद के परिवेश को समझने की जरूरत है, कैसे उनकी जिंदगी और संस्कृति भारतीय है, इसकी बात तो हम सब समझ सकते हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं करना चाहिए कि मेरी जिंदगी कुछ गलत हो रहा है और अब वह मुझे सहारा देने के लिए हैं 🤝। मैं उनके प्रति सम्मान करता हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपनी संस्कृतियों और जिंदगी को समझने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि यह तो बहुत ही दिलचस्प मुद्दा है। जब हमारी युवतियाँ नॉर्थ ईस्ट से आती हैं और वहाँ की जिंदगी के बारे में लोग उन्हें ऐसे शब्दों से संबोधित करते हैं, तो यह वाकई एक बड़ा मुद्दा है।

क्या हम दोनों ही भारतीय हैं? नहीं, तो फिर क्या है? क्या हमारी पहचान सिर्फ राष्ट्रीयता तक ही सीमित है या इसके लिए और भी बहुत सारी चीजें ज़रूरी हैं?

मुझे लगता है कि हमें अपनी देशभक्ति और सम्मान को बढ़ाने के लिए इस मुद्दे पर बात करनी चाहिए। हमें यह समझने की जरूरत है कि हमारी पहचान क्या है और हम एक दूसरे के साथ कैसे सहयोग कर सकते हैं। 🤔
 
मेरे दोस्त, यह बहुत ही दुखद बात है कि नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों को इतनी असहायता और अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है। उनकी जिंदगी में ऐसी बातें होना नहीं चाहिए, जैसे कि उनकी ताज़ा ताज़ा छवियों को शेयर करने के बाद लोग उन्हें ‘चींचींतुन्चूं’ कहते हैं।

यह बहुत ही असहज और अपमानजनक है, खासकर जब ये लड़कियां हमारे देश में अपने परिवारों और समुदायों को प्यार से लेकर सहयोग से जोड़ती हैं। उनकी बातचीत में ऐसे शब्द नहीं होने चाहिए जो उन्हें असहाय बना दें।
 
मेरे दोस्त, यह बात तो बहुत पेचीदा है 🤔। नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों की जिंदगी का मायना क्या है? वे हमारी देशभूमि की हैं, हमारी संस्कृति की हैं, और हमारी भाषा की हैं। तो फिर क्यों उन्हें 'चींचींतूंचूं' कहते हैं? यह तो बिल्कुल सही नहीं है 🙅‍♂️

मेरी राय में, युवतियां जो नॉर्थ ईस्ट से आती हैं, वे अपने इलाके की बहुत खूबसूरती और समृद्धि लेकर यहाँ आती हैं। उन्हें हमारा देश बहुत पसंद है, और वह यहाँ अपने सपनों को पूरा करने के लिए आती हैं। तो फिर उन्हें 'चींचींतूंचूं' कहने का क्या मतलब? 🤷‍♂️

हमें युवतियों के प्रति सहानुभूति और समझदारी दिखानी चाहिए। हमें उन्हें अपने सपनों को पूरा करने में मदद करनी चाहिए, और उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। तो चलें, मेरे दोस्त, आइए हम नॉर्थ ईस्ट से आई युवतियों के प्रति सहानुभूति और समझदारी दिखाएं 🙏
 
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