ब्लैकबोर्ड पर एक ऐसी कहानी है जो सभी को सुननी चाहिए। आकांक्षा, बरेली की रहने वाली युवती, ने अपने परिवार के खिलाफ अपने पति शोएब से शादी करने का फैसला किया। आकांक्षा और शोएब दोनों गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते हैं।
आकांक्षा के पापा ने उनकी शादी से पहले काफिर कहा, 'तुम किस धर्म को बदल रही हो।' आकांक्षा ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने माना नहीं और आगे भड़क गए।
आखिरकार आकांक्षा ने अपने सपनों पर विजय पाई और अपने पति शोएब के साथ दिल्ली आकर शादी कर ली। लेकिन इस दौरान उनके परिवार और समाज में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
आकांक्षा कहती हैं कि हमने कई चुनौतियों का सामना किया, जैसे कि शादी करने के लिए एसडीएम ऑफिस पहुंचना था और वहां पर विभिन्न दस्तावेजों को जमा करना था।
शोएब कहते हैं कि हमनें घरवालों से बातचीत करके एक नोटिस दिया जिसमें उन्हें 30 दिन की अवधि में अपने पति और पत्नी के दर्जी होने का पता नहीं लगाना था।
लेकिन घरवालों ने आकांक्षा को बहिष्कार कर दिया और उन्हें परिवार से दूर रहने का फैसला किया।
आकांक्षा कहती हैं कि मेरे पति शोएब ने जब एक बार मुझसे कहा कि तुम मेरे साथ जाने के लिए मजबूर हो, तो मैंने मना कर दिया।
शिवा, बरेली की रहने वाली युवती, ने अपने परिवार के खिलाफ अपने पति शिवा से शादी करने का फैसला किया।
शिवा और महविश के पापा ने उनकी शादी से पहले काफिर कहा, 'तुम दोनों एक ही धर्म में नहीं हो।'
शिवा कहते हैं कि हमारे परिवार ने उन्हें बहिष्कार कर दिया और उन्हें घर से बाहर कर दिया।
आखिरकार शिवा और महविश ने अपनी शादी करने का फैसला किया और दिल्ली में एक होटल में रुकने के लिए कहां पहुंचने से पहले उस जगह पर हो तो उसे कमरा नहीं दिया।
दोनों शादी के सर्टिफिकेट साथ रखते हैं।
अगर उनकी शादी वास्तव में एक हिंदू और एक मुस्लिम दो अलग-अलग धर्मों में शादी करने का फैसला करते, तो किसी भी जगह पर बैठने के लिए कहां पहुंचने से पहले उस जगह के निजी कमरे नहीं मिलेगा।
दोनों एक ही समय में पति-पत्नी के रूप में पहचानी जाती नहीं।
आज भी दोनों अपने परिवार और समाज का सामना करती रहती हैं।
आकांक्षा के पापा ने उनकी शादी से पहले काफिर कहा, 'तुम किस धर्म को बदल रही हो।' आकांक्षा ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने माना नहीं और आगे भड़क गए।
आखिरकार आकांक्षा ने अपने सपनों पर विजय पाई और अपने पति शोएब के साथ दिल्ली आकर शादी कर ली। लेकिन इस दौरान उनके परिवार और समाज में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
आकांक्षा कहती हैं कि हमने कई चुनौतियों का सामना किया, जैसे कि शादी करने के लिए एसडीएम ऑफिस पहुंचना था और वहां पर विभिन्न दस्तावेजों को जमा करना था।
शोएब कहते हैं कि हमनें घरवालों से बातचीत करके एक नोटिस दिया जिसमें उन्हें 30 दिन की अवधि में अपने पति और पत्नी के दर्जी होने का पता नहीं लगाना था।
लेकिन घरवालों ने आकांक्षा को बहिष्कार कर दिया और उन्हें परिवार से दूर रहने का फैसला किया।
आकांक्षा कहती हैं कि मेरे पति शोएब ने जब एक बार मुझसे कहा कि तुम मेरे साथ जाने के लिए मजबूर हो, तो मैंने मना कर दिया।
शिवा, बरेली की रहने वाली युवती, ने अपने परिवार के खिलाफ अपने पति शिवा से शादी करने का फैसला किया।
शिवा और महविश के पापा ने उनकी शादी से पहले काफिर कहा, 'तुम दोनों एक ही धर्म में नहीं हो।'
शिवा कहते हैं कि हमारे परिवार ने उन्हें बहिष्कार कर दिया और उन्हें घर से बाहर कर दिया।
आखिरकार शिवा और महविश ने अपनी शादी करने का फैसला किया और दिल्ली में एक होटल में रुकने के लिए कहां पहुंचने से पहले उस जगह पर हो तो उसे कमरा नहीं दिया।
दोनों शादी के सर्टिफिकेट साथ रखते हैं।
अगर उनकी शादी वास्तव में एक हिंदू और एक मुस्लिम दो अलग-अलग धर्मों में शादी करने का फैसला करते, तो किसी भी जगह पर बैठने के लिए कहां पहुंचने से पहले उस जगह के निजी कमरे नहीं मिलेगा।
दोनों एक ही समय में पति-पत्नी के रूप में पहचानी जाती नहीं।
आज भी दोनों अपने परिवार और समाज का सामना करती रहती हैं।