बरेली की आकांक्षा शर्मा ने परिवार के खिलाफ जाकर मुस्लिम लड़के से शादी की, परिवार ने अपनी बेटी को छोड़कर चला गया।
आकांक्षा और उसके पति शोएब दोनों गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते हैं। आकांक्षा ने अपने परिवार को बताया कि वह शोएब से शादी करना चाहती थी, लेकिन उसके पिता ने कहा कि उनका धर्म बदलना पड़ेगा, तो शादी नहीं होगी।
आकांक्षा ने बताया कि उसके परिवार ने उसे शादी से रोकने के लिए कहा, लेकिन आकांक्षा ने मुस्लिम लड़के से शादी करने का फैसला कर लिया। वह अपने परिवार को बताने के बाद, उसके पिता और माता-पिता ने उसे छोड़कर चला गया।
आकांक्षा और शोएब ने जिस तरह से शादी की, उसके लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्हें स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने के लिए कई प्रकार की बाधाएं हुईं, जैसे कि आधार कार्ड में पता और गवाहों के आधार कार्ड पर भी उसी शहर का पता होना।
आकांक्षा ने बताया कि जब उन्होंने सिग्नेचर करने के लिए साथ जाने की कोशिश की, तो उस रूम में अकेली थीं। क्लर्क ने पूछा कि मुस्लिम लड़के से शादी करने का यह क्यों कर रही है? आकांक्षा ने जवाब दिया कि कानून ने हक दिया है मुझे शादी करने का।
आकांक्षा और शोएब की शादी के पांच साल बाद, उनके घरवालों ने उन्हें फिर से मिलने की इजाजत देना शुरू कर दिया। आकांक्षा ने बताया कि उसके परिवार ने पहले उन्हें छोड़कर चला गया था, लेकिन अब उनके घर के घरवालों ने उन्हें फिर से मिलने की इजाजत देना शुरू कर दिया।
आकांक्षा और शोएब की जिंदगी में भी कई बदलाव आए हैं। आकांक्षा के परिवार ने उसकी मान्यता स्थापित करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
आकांक्षा और शोएब की कहानी एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है कि हर किसी को अपने धर्म या जाति के आधार पर निर्णय लेने की अनुमति नहीं है।
आकांक्षा और उसके पति शोएब दोनों गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते हैं। आकांक्षा ने अपने परिवार को बताया कि वह शोएब से शादी करना चाहती थी, लेकिन उसके पिता ने कहा कि उनका धर्म बदलना पड़ेगा, तो शादी नहीं होगी।
आकांक्षा ने बताया कि उसके परिवार ने उसे शादी से रोकने के लिए कहा, लेकिन आकांक्षा ने मुस्लिम लड़के से शादी करने का फैसला कर लिया। वह अपने परिवार को बताने के बाद, उसके पिता और माता-पिता ने उसे छोड़कर चला गया।
आकांक्षा और शोएब ने जिस तरह से शादी की, उसके लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्हें स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने के लिए कई प्रकार की बाधाएं हुईं, जैसे कि आधार कार्ड में पता और गवाहों के आधार कार्ड पर भी उसी शहर का पता होना।
आकांक्षा ने बताया कि जब उन्होंने सिग्नेचर करने के लिए साथ जाने की कोशिश की, तो उस रूम में अकेली थीं। क्लर्क ने पूछा कि मुस्लिम लड़के से शादी करने का यह क्यों कर रही है? आकांक्षा ने जवाब दिया कि कानून ने हक दिया है मुझे शादी करने का।
आकांक्षा और शोएब की शादी के पांच साल बाद, उनके घरवालों ने उन्हें फिर से मिलने की इजाजत देना शुरू कर दिया। आकांक्षा ने बताया कि उसके परिवार ने पहले उन्हें छोड़कर चला गया था, लेकिन अब उनके घर के घरवालों ने उन्हें फिर से मिलने की इजाजत देना शुरू कर दिया।
आकांक्षा और शोएब की जिंदगी में भी कई बदलाव आए हैं। आकांक्षा के परिवार ने उसकी मान्यता स्थापित करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
आकांक्षा और शोएब की कहानी एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है कि हर किसी को अपने धर्म या जाति के आधार पर निर्णय लेने की अनुमति नहीं है।