वाह! यह तो बहुत दिलचस्प घटनाक्रम है... 1971 में ऐसा क्यों हुआ था, मुझे नहीं पता है ... यार, ममता बनर्जी जैसी प्रतिभाशाली नेताओं की बिना राजनीति का क्या अर्थ होगा ... देखकर यह तो बहुत खेद हुआ, वह इतनी सस्ती उम्र में ऐसी गंभीर चोटें पहुंच गईं... और उनकी साड़ी खून से भर गई, यह तो सचमुच एक दृश्य था जिसे कभी नहीं भूल सकता ... क्या यह हमला ही नेताओं को खतरे में डालने का तरीका नहीं बन गया?