पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर टीएमसी समर्थित ऑल इंडिया मतुआ महासंघ ने सोमवार को पूरे राज्य में सड़क जाम का आह्वान किया है। खासतौर पर मतुआ समुदाय में नाराजगी बढ़ती जा रही है कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के इशारे पर मतुआ धार्मिक नेताओं पर सुनियोजित हमला किया है।
मामले में टीएमसी समर्थित मतुआ नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह हमला केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के समर्थकों ने किया। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
राज्य में जारी एसआईआर के दौरान अभी तक 58 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इसके अलावा, करीब 1.36 करोड़ नामों में गड़बड़ी पाई गई है और लगभग 30 लाख मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ बताया गया है। इस तरह लगभग 1.66 करोड़ लोगों को दूसरे चरण की सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है।
मतुआ नेताओं का दावा है कि इनमें बड़ी संख्या मतुआ समुदाय के लोगों की है। इसके अलावा, गौरतलब है कि पूरे पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58,20,898 नाम हटाए गए हैं, जिससे मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई है।
इसके अलावा, करीब 1.36 करोड़ नामों में गड़बड़ी पाई गई है और लगभग 30 लाख मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ बताया गया है। इस तरह लगभग 1.66 करोड़ लोगों को दूसरे चरण की सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है।
मतुआ नेताओं का आरोप है कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के इशारे पर मतुआ धार्मिक नेताओं पर सुनियोजित हमला किया। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
इस दौरान ठाकुरनगर मंदिर इलाका टकराव का केंद्र बन गया था। टीएमसी नेताओं का दावा है कि इस झड़प में राज्यसभा सांसद ममता ठाकुर के कई समर्थक घायल हुए थे। इसके बाद से मतुआ समुदाय के एक हिस्से में नाराजगी और गहरी हो गई है। समुदाय के नेताओं ने इस घटना को गोसायों का अपमान बताया है।
श्यामनगर के एक मतुआ ‘गोसाय’ (धार्मिक गुरु) पर कथित हमले से मामले में आक्रोश बढ़ गया है। बताया गया कि गोसाय अपना नाम वोटर लिस्ट से हटने के बाद जवाब मांगने के लिए उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर मंदिर परिसर पहुंचे थे, जहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट हुई।
टीएमसी समर्थित ऑल इंडिया मतुआ महासंघ ने कहा है कि सोमवार को होने वाले सड़क जाम के दौरान गोसाय पर हुए हमले की तुरंत जांच और वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने की मांग की जाएगी।
मामले में टीएमसी समर्थित मतुआ नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह हमला केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के समर्थकों ने किया। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
राज्य में जारी एसआईआर के दौरान अभी तक 58 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इसके अलावा, करीब 1.36 करोड़ नामों में गड़बड़ी पाई गई है और लगभग 30 लाख मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ बताया गया है। इस तरह लगभग 1.66 करोड़ लोगों को दूसरे चरण की सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है।
मतुआ नेताओं का दावा है कि इनमें बड़ी संख्या मतुआ समुदाय के लोगों की है। इसके अलावा, गौरतलब है कि पूरे पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58,20,898 नाम हटाए गए हैं, जिससे मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई है।
इसके अलावा, करीब 1.36 करोड़ नामों में गड़बड़ी पाई गई है और लगभग 30 लाख मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ बताया गया है। इस तरह लगभग 1.66 करोड़ लोगों को दूसरे चरण की सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है।
मतुआ नेताओं का आरोप है कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के इशारे पर मतुआ धार्मिक नेताओं पर सुनियोजित हमला किया। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
इस दौरान ठाकुरनगर मंदिर इलाका टकराव का केंद्र बन गया था। टीएमसी नेताओं का दावा है कि इस झड़प में राज्यसभा सांसद ममता ठाकुर के कई समर्थक घायल हुए थे। इसके बाद से मतुआ समुदाय के एक हिस्से में नाराजगी और गहरी हो गई है। समुदाय के नेताओं ने इस घटना को गोसायों का अपमान बताया है।
श्यामनगर के एक मतुआ ‘गोसाय’ (धार्मिक गुरु) पर कथित हमले से मामले में आक्रोश बढ़ गया है। बताया गया कि गोसाय अपना नाम वोटर लिस्ट से हटने के बाद जवाब मांगने के लिए उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर मंदिर परिसर पहुंचे थे, जहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट हुई।
टीएमसी समर्थित ऑल इंडिया मतुआ महासंघ ने कहा है कि सोमवार को होने वाले सड़क जाम के दौरान गोसाय पर हुए हमले की तुरंत जांच और वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने की मांग की जाएगी।