भागवत बोले- इंटरनेशनल ट्रेड किसी दबाव में नहीं होगा: कोई देश टैरिफ लगाता रहे, भारत आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलेगा

भारत इंटरनेशनल ट्रेड कर रहा है, लेकिन किसी देश के दबाव में नहीं है। हम एक ग्लोबल फैमिली के नजरिए से देखते हैं, जिसमें दूसरे देशों को रोजगार पैदा करने की चिंता नहीं करनी चाहिए, यह उनकी जिम्मेदारी है। भारत तभी सही मायने में योगदान देगा, जब वह ताकतवर और प्रभावशाली हो।
 
अरे, मुझे लगता है कि हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का यह तरीका सही है। हमें खुद पर भरोसा करना चाहिए और दूसरों के दबाव में नहीं चलना चाहिए। भारत एक शक्तिशाली देश बनने के लिए अपने उत्पादकता और तकनीकी क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए।

मुझे लगता है कि हमारे युवाओं को अपने देश के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। वे हमें एक ग्लोबल फैमिली के रूप में देखें, न कि एक व्यवसायिक समझौते। उन्हें अपने देश के लिए काम करने का प्रेरणा ढूंढनी चाहिए और अपने योगदान से हमारे देश को मजबूत बनाने में मदद करनी चाहिए।

मैं इस बात पर विश्वास करता हूँ कि अगर हम एकजुटता और समर्थन से आगे बढ़ते हैं, तो हम अपने देश को एक शक्तिशाली और समृद्ध भारत बना सकते हैं।
 
मुझे लगता है कि हमें अपने आर्थिक संबंधों में अधिक आत्मनिर्भरता बनाए रखनी चाहिए। अगर हमारे पड़ोसी देशों से रोजगार बनाने की बात कर रहे हैं तो यह उनकी समस्या नहीं है, बल्कि हमारी है। हमें अपने व्यवसायिक समझौतों में स्थानीय प्रौद्योगिकी और उत्पादों पर ध्यान देना चाहिए, जिससे न केवल रोजगार बढ़ते हैं बल्कि हमारे खुद के बाजार भी मजबूत होते हैं।
 
दुनिया एक बड़े परिवार की तरह है, जहां हर किसी को अपनी जगह मिल जाती है। लेकिन जब हम दूसरों की जरूरतों को पहले रखते हैं तो क्या हम वास्तव में खुद को मजबूत बना पाएंगे? भारत में इंटरनेशनल ट्रेड करने का निर्णय एक अच्छा कदम है, लेकिन यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हम अपने देश की रोजगार व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम करें। दबावों में फंसकर हम अपनी पहचान खोने की भी डर रहे हैं।
 
मेरी राय में, इंटरनेशनल ट्रेड से हमें अपना खुद का बाजार बनाने का मौका मिलता है। भारत में जो छोटे-छोटे व्यवसायी हैं उनकी सफलता की कहानियां मुझे बहुत प्यार आती हैं। लेकिन जब हम दूसरे देशों से ट्रेड करते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि वे भी अपने खुद के लोगों को रोजगार देने का प्रयास करें। भारत तभी सही मायने में योगदान देगा, जब वह अपने स्वाधीन और आत्मनिर्भर हो।
 
मेरे दोस्त 🤝, हमारा देश इंटरनेशनल ट्रेडिंग में बहुत आगे है। लेकिन क्या हम हमेशा इस बात पर ध्यान देते हैं कि किसी और देश को भारतीय उद्योगों में रोजगार पैदा करने की जरूरत है? मेरे ख्याल में नहीं, यह उनकी जिम्मेदारी है। हमें सिर्फ अपने देश की हितों पर ध्यान देना चाहिए। भारत तभी सही मायने में योगदान देगा, जब वह अपने आप एक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बन जाए और उसके प्रभाव को वैश्विक स्तर पर महसूस होने लगे।
 
भारत को विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने का समय आ गया है 🌟. हमारी अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने के लिए हमें नई रणनीतियों की जरूरत है। यह दबाव और दबाव हमेश से मौजूद रहा है, लेकिन अब हमें उन्हें समझना और अपनाना चाहिए। दूसरे देशों को हमारे ब्रांड्स पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है, हमें उनके साथ सहयोग करना चाहिए। भारत में रोजगार बढ़ाने के लिए हमें अपने युवाओं और कौशलों को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। तभी हम सही मायने में योगदान दे पाएंगे। हमें अपनी संस्कृति को दुनिया के सामने लाने की जरूरत है, न कि अपने आसपास के लोगों को दबाव में। भारत ताकतवर और प्रभावशाली बनने के लिए हमें अपने आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए। 🚀
 
भारत को ग्लोबल स्टेज पर आ गया है 🌎 बाकी देश हमारी खरीदारी में निवेश करने लगे हैं, लेकिन हम यह नहीं चाहते कि किसी एक देश के दबाव में चलने पड़े। भारत इंटरनेशनल ट्रेड कर रहा है, लेकिन हम इस बात पर खटला नहीं उठाएंगे कि हमारी ताकत कितनी है। हमारे पास जैसे ही बड़ा देश बड़े फैसले लेने में सक्षम हो रहा है, वैसे ही हम अपने स्थान पर खड़े हैं।
 
अरे, देश का विकास हमारी अपनी राहों पर चलने से होगा। किसी दूसरे देश की बात नहीं करनी चाहिए, जब हमें अपनी अर्थव्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है। भारत तभी सचमुच योगदान करेगा, जब वह सशक्त और प्रभावशाली हो। और देखें, यह रोजगार नहीं केवल भारत के लिए, बल्कि विदेशों में भी खुशियां लेकर जाएगा। 🤝
 
અરે પ્રગતિ, ભારત આજ સમગ્ર વिश્વને લીધે એક મહાન યોગદાન છે! 🌎

આજકાલ, પૈસા અને તકનીકી શક્તિ પર ફોકસ થવું જોઈએ, નહિ? આમ, ભારત આખી દુનિયાને રોજગાર અને વ્યાપારિક સંબંધો થવામાં મદદ કરી શકે. આ છે, જેથી વિવિધ દેશોને પણ લાભ હોય!
 
ब्रिटेन के साथ हमारा ट्रेड समझौता अच्छा है, लेकिन यह ध्यान रखें कि भारत का रुख अपने हितों की देखरेख में ही होगा। हम एक ग्लोबल फैमिली के नजरिए से देखते हैं, जिसमें हमारे दोस्त देशों को भी अपनी आर्थिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। अगर हमारे दोस्त देश हमें रोजगार प्रदान नहीं करते हैं, तो फिर यह उनकी जिम्मेदारी है।

क्योंकि भारत अभी तक अपनी अर्थव्यवस्था को विकसित करने की परियोजनाओं में निवेश नहीं कर पाया है, इसलिए हमें अपनी ताकत और सशक्ति को बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश करनी चाहिए।
 
बेटियों को कॉलेज में पढ़ाई करने की अनुमति देना सिर्फ एक सवाल नहीं है। हमें समझना चाहिए कि वे भविष्य की नेताओं और प्रेरणा बनेंगी। लेकिन फिर भी तो कई माता-पिता अपने बच्चों को बाहर जाने से रोकते हैं। मुझे लगता है कि यह एक गलत धारणा है। बेटियां घर पर भी बहुत कुछ सीख सकती हैं, और विशेषकर शिक्षित नागरिक बनने के लिए। हमें उन्हें खुद को सुरक्षित महसूस कराने देना चाहिए, ताकि वे अपने सपनों को पूरा करने में मदद की बात कह सकें।
 
मैंने हाल ही में फिलहाल जिंजर का पेड़ खाने जा रहे थे तो यह बात सोची, भारत विदेशों में ट्रेड करता है लेकिन हमारा देश अपना बोलबाला करने में समय नहीं देता, चाहे वह राजनीति या आर्थिक नीतियां की बात हो, तो हमें खुद अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। मुझे लगता है कि भारत का यह ध्यान विदेशों से ट्रेड करने पर है, वहाँ देशों को रोजगार पैदा कर रहे थे, लेकिन हम भारतीय किसी की मदद नहीं करते, तो फिर क्या हासिल होगा, मुझे लगता है भारत अपनी खुद की ताकत पर ध्यान देना चाहिए।
 
भारत को इंटरनेशनल ट्रेड करने का स्वागत है! 🙌 लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम दूसरे देशों के लिए रोजगार पैदा करने की जिम्मेदारी हैं। #भारतकीआतम

जैसे हम एक ग्लोबल फैमिली के नजरिए से देखते हैं, तो हमें यह नहीं समझना चाहिए कि हमें उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए दबाव में रहना है। हमें अपनी ताकत और प्रभावशालिता बनानी होगी ताकि हम सही मायने में योगदान दे सकें। #भारतकायोगदान

आजादी के बाद से, भारत ने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन अभी भी हमें अपने अर्थव्यवस्था और रोजगार क्षेत्र में सुधार करने की जिम्मेदारी है। #भारतकाभूत
 
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