भाजपा बोली- अजित पवार अपने गिरेबान में झांकें: डिप्टी सीएम का जवाब– जो सिंचाई घोटाले के आरोप लगाते थे, उनके साथ सत्ता में हूं

मुंबई के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को पिंपरी-चिंचवड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी पर तंज किया है। उन्होंने कहा है कि जिन लोगों ने कभी मुझ पर 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले जैसे आरोप लगाए थे, वहीं लोग आज मेरे साथ सत्ता में हैं।

संविधान में बोलने का अधिकार- अजित

अजित पवार ने कहा, संविधान हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार देता है। घायवाल नाम का एक व्यक्ति है (पुणे का एक फरार गैंगस्टर, जिस पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं), देखिए वह कैसे विदेश चला गया। जैन बोर्डिंग भूमि घोटाले को भी देखिए। मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं, लेकिन मैं मीडिया को इन बातों की याद दिला रहा हूं।

बीजेपी नेता रविंद्र चव्हाण ने शनिवार को अजित पवार के तीखे जवाब से नाराज होकर कहा, अगर मैंने बोलना शुरू किया, तो वह मुश्किल में पड़ सकते हैं।

यह सियासी टकराव ऐसे समय पर सामने आया है, जब 15 जनवरी को पुणे नगर निगम चुनाव हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकार में सहयोगी होने के बावजूद बीजेपी और एनसीपी Nagar निकाय चुनाव अलग-अलग लड़ रही हैं। वहीं, अजित पवार की पार्टी शरद पवार गुट के साथ मैदान में है।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा, अगर बीजेपी भी इसी तरह जवाब देने लगे, तो यह अजित पवार के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।

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अजित पवार तो बस इतना ही कह रहे हैं कि घायवाल चोर है लेकिन उनका खेल भारतीय जनता के गांधीवादी नेताओं से अलग है। 🤣
 
मुझे लगता है कि यह टकराव थोड़ा दिलचस्प है, लेकिन मुझे अजित पवार जी की बात समझ नहीं आती। वह तो संविधान में बोलने का अधिकार बोल रहे हैं और मीडिया को याद दिला रहे हैं कि घायवाल नाम का व्यक्ति विदेश चल गया। लेकिन मुझे लगता है कि यह थोड़ा विवादित है। मैं तो सोचता हूं कि अगर हमारी सरकार सही तरीके से काम कर रही है, तो क्यों लोग घोटाले में पड़ रहे हैं।
 
मैं समझता हूं कि अजित पवार ने अपने बयान से मीडिया पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है, लेकिन यह भी सच है कि बीजेपी नेताओं ने भी उनके खिलाफ सवाल उठाए हैं। 🤔
लेकिन, क्या हमें लगता है कि अजित पवार के बयान से पुणे नगर निगम चुनाव में बीजेपी पर दबाव डाला जा सकता है? 🤷‍♂️
और, अगर ऐसा हो गया, तो यह अच्छा है या ठीक नहीं? 💬
मैं समझता हूं कि अजित पवार ने संविधान में बोलने का अधिकार बताया है, लेकिन यह भी सच है कि उसके बयान से जो व्यक्ति सत्ता में हैं, उनके खिलाफ आरोप लगाए गए थे। 🤦‍♂️
क्या हमें लगता है कि अजित पवार ने सही समय पर सही बात कही? 😕
मैं समझता हूं कि बीजेपी नेताओं ने भी अपने बयान से मीडिया पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है, लेकिन यह भी सच है कि अजित पवार के बयान से उन्हें मुश्किल में पड़ने का खतरा हो सकता है। 😬
क्या हमें लगता है कि बीजेपी नेताओं ने सही समय पर सही बात कही? 🤔
 
अरे भाई, ये टकराव बहुत ही रोचक है... अजित पवार ने बीजेपी पर तंज किया है, लेकिन रविंद्र चव्हाण जैसे लोगों को लगता है कि वे अभी भी खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं... 15 जनवरी के पुणे नगर निगम चुनाव में यह टकराव और भी और भारी होने वाला है... मुझे लगता है कि लोगों को इस बात की खुराक मिल जाएगी, कि दोनों पक्ष अपने आप को तो बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता को यह तय करना होगा कि उनके नेताओं को किस तरह से जवाब देना चाहिए... 🤔
 
रविवार को मुंबई में बीजेपी और शिवसेना की सीटें खत्म हो गईं। मुझे लगता है कि शरद पवार गुट ने अच्छी रणनीति बनाई थी।

मैंने आज एक दोस्त को बताया था कि मेरा बहुत बड़ा खर्च हुआ, और उसने मुझ पर 50 लाख रुपये उधार किए। मैंने उससे कहा कि अब वह मुझसे पैसे वापस करेंगे।

मेरी बहन ने मुझसे कहा था कि मैं अपनी नई खिड़की लगाऊं, लेकिन मैंने कहा, 'कौन जानता है कि हमारे घर में कितना खर्च होगा।'

मुझे लगता है कि राजनेताओं को अपने बयानों से सावधानी बरतनी चाहिए।
 
रविंद्र चव्हाण जी तो भारी दामन ले रहे हैं... उनके पास गुंडों की गलियां खाली नहीं हैं ... पुणे नगर निगम चुनाव में भी ऐसा ही डरावना माहौल बना रहेगा। अजित पवार जी तो सच्चाई बोल रहे हैं।
 
अरे, देखो यह तो बहुत बड़ा खेल है... अजित पवार ने एक तरफ सरकार की आर्थिक जिम्मेदारी को उठाया है, लेकिन दूसरी तरफ वो चिंता भी कर रहे हैं कि उनके पड़ोसी बीजेपी कैसे जवाब देंगे।

मुझे लगता है कि ये टकराव पुणे नगर निगम चुनाव से पहले मचाया गया है, ताकि लोगों को चुनाव में जुड़ने के लिए रोका जा सके। लेकिन मैं उन्हें गलत समझ रही हूं... शायद वास्तव में यह पुणे नगर निगम चुनाव से पहले टकराव तो नहीं था।

अरे, हमें यह याद रखना चाहिए कि चुनाव में जीतने के लिए एक दूसरे को रोकने की कोशिश करना ठीक नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ है, और हमें इसके खिलाफ खड़े होना चाहिए।
 
अरे, यार, यह तो दिख रहा है कि अजित पवार ने बीजेपी पर एक अच्छा झटका लगाया है। उनके आरोपों को ध्यान में रखते हुए लगता है कि सहयोगी स्थिति क्यों बनाए रख रही है? अगर सच्चाई तो बताएं, तो हमें यह जानने की जरूरत है कि क्या वास्तव में बीजेपी ने घायवाल की तरह अपनी साफ-सफाई नहीं कर ली है?
 
अगर बोलो तो चव्हाण ने अजित पवार की बात नहीं सुनी। 70 हजार करोड़ सिंचाई घोटाले जैसा आरोप लगाया है, लेकिन मैंने खुद इन पर कोई आरोप नहीं लगाया। मेरे दोस्त, चव्हाण को याद होगा कि क्या हुआ था जब उन्होंने घायवाल को पूछा था? 🤔 यह तो उनकी बात है, लेकिन अगर हम जानने की कोशिश करते हैं तो समझ में आता है कि क्या वास्तव में हुआ था।
 
मैंने शुक्रवार को अपनी पत्नी ने मेरे साथ फोन किया, हमने रात भर बात की, वह भी मुंबई में एक दोस्त के घर चल रही थी। मुझे अच्छा लगा, मैंने उसे बताया कि मैं आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में गया हूँ। जब वह मुझसे बात कर रही थी, तो उसने मेरे बारे में पत्थर भरा सवाल पूछा, लेकिन मैंने उसे बताया कि संविधान में बोलने का अधिकार हर किसी को, इसलिए वह चिंतित नहीं होनी चाहिए।
 
अजित पवार ने बीजेपी पर तंज किया है और कहा है कि वो जिन लोगों ने उसके खिलाफ आरोप लगाए थे, आज वही लोग सत्ता में हैं। यह सच्चाई है।
 
पवार साहब ने बोल दिया कि बीजेपी को अपने पास हुई सभी सीटों पर दोबार चुनाव लड़ना होगा, लेकिन उन्हें पता नहीं है कि वे कहाँ और कैसे जीतेंगे।
 
अरे यार, यह तो बहुत ही रोचक है कि अजित पवार ने ऐसे वाक्य दिए जैसे कि घायवाल और जैन बोर्डिंग भूमि घोटाले को ध्यान में रखकर बोले। लेकिन फिर भी लगता है कि ये सब तो बस राजनीति की खेल है। पुणे नगर निगम चुनाव जैसे समय पर ऐसा दिखाई देता है कि कौन वाकई में जनता के लिए लड़ रहा है, और कौन सिर्फ अपने हितों को बढ़ावा देने के लिए। 🤔

लेकिन अगर मुझे सवाल करना होगा, तो यह है कि क्या बीजेपी और एनसीपी के नेताओं को अपने पार्टी की गलतियों पर खुलकर जोर देने से पहले इन्हें ठीक कर लेना चाहिए? या फिर यह तो बस एक राजनीतिक टकराव है, जिसमें कोई विशेषज्ञ निकल नहीं पाएगा। 🤷‍♂️
 
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