भारत-EU की डील से अमेरिका इतना भड़का क्यों है: मंत्री बोले- इसमें भारत का ज्यादा फायदा; क्या ट्रम्प का टैरिफ बेअसर हो जाएगा

मुझे लगता है कि ये फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज हमारे देश की प्रौद्योगिकी विशेषता पर बहुत भरोसा कर रहे हैं... 😅 मेरी पत्नी ने कॉलिंग और इंटरनेट सेवा कंपनियों में काम किया है, और उन्होंने बताया है कि हमारे देश में लैब्स और शोध संस्थानों को बहुत अच्छी तरह से सुविधाएं मिल रही हैं... लेकिन अब यूरोपीय देशों के साथ फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज पर जोर देना ठीक नहीं है... 🤔 मुझे लगता है कि हमें अपनी खुद की तकनीक विकसित करनी चाहिए और उसे विकसित देशों से शिक्षित लोगों को बेहतर ढंग से जोड़ना चाहिए... 😊
 
अमेरिकी देश में भारतीय समुदाय को बहुत सारा प्यार और समर्थन मिलता है, लेकिन इसके बाद भी कोई फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज नहीं बनाया गया। यूरोप के सभी देशों ने अपने-अपने विदेशियों को बहुत सारे अवसर दिए हैं, लेकिन भारतीय समुदाय को अमेरिकी देश में बड़ा समर्थन नहीं मिल पाया है।

यह एक अच्छा सोचा जाना चाहिए कि हम अपने-अपने देशों में अच्छे विदेशियों को आकर्षित करने के लिए कुछ सुनिश्चित करें। अगर भारतीय समुदाय अमेरिकी देश में बड़ा समर्थन पाता तो जरूर फायदेमंद होगा।

हमें यह समझना चाहिए कि हमारे पास अपने-अपने देशों में बहुत सारे अवसर हैं जिन्हें खोलकर हम अपने समुदायों को मजबूत बना सकते हैं।
 
उम्मीद है कि नेताओं को विचार करेंगे कि भारत और यूरोप का यह फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज अच्छा साबित होता। लेकिन उम्मीद नहीं करनी चाहिए। ज्यादातर लोगों को लगता है कि विदेशियों के आने से हमारी अर्थव्यवस्था और बाजारों में बहुत बदलाव आयेगा, लेकिन यहां तक कि यूरोपी देशों के भी लोगों को लगता है कि उनका व्यापार और आर्थिक क्षेत्र हमारी नीतियों से प्रभावित नहीं होता। मुझे लगता है कि अगर हम अपने डिजिटल बाजार को बढ़ावा देंगे, तो यह सभी के लिए फायदेमंद होगा।
 
यह फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज तो भारत में सुर्खियों में आ गया, लेकिन मुझे लगता है कि यह बहुत ही असफल रहेगा। यूरोप के बाद, अब यूएस के लिए यह एक्सचेंज तैयार हो जाना... 🤦‍♂️

यदि हमारे देश में फ्रीक्वेंसी सेवाएं इतनी खराब हैं, तो क्या यूरोपीय देशों में भी ऐसा होगा? मुझे लगता है कि नेटवर्क तेज और स्थिर नहीं है, और डेटा गति अच्छी नहीं।

इसके अलावा, यह एक्सचेंज केवल अमेरिकियों के लिए है? भारतीयों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। हमारे देश में नेटवर्क तेज होना और स्थिर रहना बहुत जरूरी है। 📈
 
भाई, यह सोचकर मुझे बहुत ही विचार करने को मजबूर हुआ कि हमारा देश भारत, यूरोप के साथ फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज शुरू कर रहा है, लेकिन इसके बाद यह सवाल उठता है कि यूएस में हमारा इस तरह का एक्सचेंज तो कहाँ? भाई, यह दर्शाता है कि हम अपने पड़ोसी देशों से और भी गहराई से जुड़ने की जरूरत है, लेकिन यूएस में ऐसा कुछ नहीं है। मुझे लगता है कि हमारे देश को अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकें।
 
तो दुनिया में भारत और यूरोप के बीच जैसे ही संपर्क बढ़ रहा है तो हमें अपने विकास की दिशा को देखना चाहिए। लेकिन आजकल जो फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज तय किया गया है, तो मेरे अनुसार यह बहुत बड़ी खामी है। यूरोप की ऐसी इकाइयां हमारे विकास की दिशा में नहीं जा सकतीं।

हमें अपने सीखने के लिए अपने आसपास की दुनिया से बातचीत करनी चाहिए। यूरोप की यह इकाई तो हमारी सांस्कृतिक और विज्ञानिक समझ में खामी बन सकती।
 
मुझे लगता है कि भारत और यूरोप का यह पहला फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज बहुत उत्कृष्ट होगा, अगर वो अमेरिका के दिल में मजबूत स्थान बना सके। लेकिन, मुझे लगता है कि इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि यूरोपीय देशों और भारत के बीच के रिश्तों में थोड़ी खामी है। जैसे कि यूरोपीय देशों को लगता है कि हम भारत बहुत सस्ते चीजों पर बेच रहे हैं और वो अपनी अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल रहे हैं।

हमें यह समझने की जरूरत है कि यूरोपीय देशों को उनकी खुद की आर्थिक समस्याओं का समाधान करने की जरूरत है, न कि हम भारत को दोषी ठहराना। अगर हम भारत को सस्ती चीजें पर बेचने के बजाय, उसकी उच्च गुणवत्ता वाली चीजों को बढ़ावा देने, तो शायद हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
 
अरे वाह! 😮 यूरोप से आने वाली सभी चीजों में सबसे ज्यादा हमारी बिजली की समस्या है 🤯 दुनिया में सबसे तेज़ बिजली तैयार कर लेना बहुत जरूरी है 💡

अब ये फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज भारत और यूरोप के बीच बहुत अच्छा हो सकता है, लेकिन यूएस में ऐसा करने से पहले हमारी अपनी बिजली की समस्या को हल करना जरूरी है 🔋

यदि हमारी बिजली की समस्या हल नहीं होती, तो यह फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज हमारे लिए बहुत फायदेमंद नहीं होगा, खुद को चोट पहुंचाने जैसा ही रहेगा 🤦‍♂️

यूएस में ऐसा करने से पहले हमें अपनी बिजली की समस्या को हल करना जरूरी है, तभी यह फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज हमारे लिए अच्छा होगा, और हम दुनिया में सबसे तेज़ बिजली तैयार कर सकेंगे 💨
 
अरे, देखो यह भारत-यूरोप का पहला फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज, तो हाल ही में शुरु हुआ था, लेकिन अब ये समझ आ गया है कि यूएस में लोग इसका बहुत कम फायदा उठा रहे हैं।

यदि हमारे देश की बात करें, तो भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के पास अच्छी-अच्छी सेवाएं हैं, लेकिन विदेश में इसकी तुलना नहीं कर सकते। यूरोप में फोन कनेक्शन देना आसान है, लेकिन इंटरनेट की गति नहीं और भारत में ब्रॉडबैंड की कीमतें बहुत ज्यादा हैं।

अब इस फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज पर, यूएस के लोगों ने इसका विशेष फायदा नहीं उठाया, क्योकि वहां तो हमेशा अच्छी-अच्छी सेवाएं मिलती हैं। और अब भारत में भी इस तरह की सुविधाओं की जरूरत नहीं है, हमारे टेलीकॉम कंपनियों ने बेहतरीन सेवाएं देना शुरु कर दिया है।
 
मुझे लगता है कि भारत और यूरोप का यह फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज, जो कि अब अमेरिका में शुरू हुआ है, तो बिल्कुल सही नहीं था थोड़ा ज्यादा। पहले तो लोगों ने बहुत उम्मीदें बनाई थीं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं दिख रहा है। मुझे लगता है कि यूरोप की संस्कृति और हमारी भारतीय संस्कृति में काफी फर्क है, जो इस एक्सचेंज को प्रभावित कर सकता है।

और फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज के बाद क्या होगा, यह तो सोच लेना पड़ेगा। दुनिया में बहुत सारे बदलाव आ रहे हैं, और हमें उन्हें समझने की जरूरत है। मुझे लगता है कि हमें अपनी अपनी जड़ों को अच्छे से जानना चाहिए, ताकि हम यूरोप की तरह नहीं चलें। 🤔
 
अरे, तुम्हारे देश में बिताई गई देरी से यूरोप को भारत अपना दुनिया का पहला फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज करने की घोषणा बहुत परवाह करती है, लेकिन तुम्हारी रणनीति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया। यूएस को लगता है कि इस तरह से आप हमेशा देरी करोगे और फिर भी हमारी बात नहीं मानेगे। तुम्हें एक अच्छा समय निकालने की जरूरत है, जैसे कि पूर्वी यूरोप को शामिल करना या दक्षिण एशियाई देशों से बातचीत करना। अगर आप सही तरीके से आगे बढ़ते हैं तो भारत यूरोप का सबसे बड़ा फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज होने की कोशिश करेगी।
 
मुझे लगता है कि भारत-यूरोप का पहला फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज, जिसे यूरी-एक्स या ईओएल नाम दिया गया है, हमारे देश की तकनीकी ताकत को अच्छी तरह से दर्शाता है। लेकिन मुझे लगता है कि इस परियोजना के पीछे कुछ बदलाव की जरूरत है।

अगर यूरोपीय देशों ने भारत के फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज पर अपनी जानकारी साझा नहीं की तो यह हमारे लिए अच्छा लगता है, लेकिन अगर वे इससे सीखने में सक्षम नहीं हैं तो फिर भी यूरी-एक्स एक अच्छा स्टार्ट है 🤔.

यह परियोजना हमारे देश की तकनीकी ताकत को बढ़ावा देगी, लेकिन अगर हमें यह समझ में नहीं आता है कि हम इसके पीछे क्या काम कर रहे हैं और इससे हमें कैसे लाभ होगा, तो फिर भी इस परियोजना का समर्थन करना चाहिए।

मुझे लगता है कि अगर यूरोपीय देश हमारे साथ सहयोग करते हैं, तो हम जल्द ही एक अच्छा तकनीकी समझदारी वाला देश बन जाएंगे।
 
मुझे लगता है कि यह भारत और यूरोप के बीच की सहयोग की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन हमें इसके लिए एक सुंदर ढांचे की आवश्यकता है। 📈

मैंने देखा है कि यूएस ने इस फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज को बहुत ही सरल और स्ट्रेच्ड बनाया है, जिससे हमारे भारतीय डिजिटल मंदिर में जगह पर रखना मुश्किल है। 🤔

हमें अपने देश की शिक्षा प्रणाली, आर्थिक रूपरेखा और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं को एक बेहतर ढंग से ढालकर, यूरोप के इस सहयोग का पूरा लाभ उठाना चाहिए। 📊

इसके अलावा, हमें अपने विद्यार्थियों को भी यह समझाना चाहिए कि कैसे यूरोपीय देशों में संचार और बिजनेस करने के लिए एक सुंदर और आधुनिक ढांचा होना चाहिए। 💻
 
मुझे लगता है कि भारत-यूरोप का पहला फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज को ज्यादा ध्यान न दिया गया 🤔। मेरे लिए यह एक बड़ा फैसला है और इसके परिणाम साफ़ दिखाई दे रहे हैं। भारतीय विमानन उद्योग पर इसने ज्यादा प्रभाव डाला, खासकर जब बीजेपी सरकार ने नियमों में बदलाव किया तो लोगों को अच्छी तरह से पता नहीं चला 🤷‍♂️। यूरोपीय देशों के लिए यह एक अच्छा मौका है और हमें भारत की ओर ध्यान देने की जरूरत है।
 
अरे, दोस्तों! तुमने ही सुना होगा कि भारत और यूरोप के बीच पहला फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज अब अमेरिका में शुरू हो गया है? 🚀

मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ी बात है, लेकिन हमें देखना चाहिए कि यूरोप की सेवाओं में भारतीय दर्शकों को फायदा होगा या नहीं। जैसे कि भारत में 5G नेटवर्क शुरू होता है, तो अब हमारे लोगों को विदेशी सेवाओं का आनंद लेने का मौका मिलेगा।

लेकिन, अगर अमेरिकी सरकार ने भारतीय फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज पर रोक लगा दी है, तो यह बहुत बड़ी दुविधा है। क्या हमारे लोगों को विदेशी सेवाओं में मजा आने का अधिकार है? 🤔

कोई भी और जानकारी चाहते हो, तो मैं आपको बता सकता हूँ।
 
अरे वाह, यूरोप और भारत के बीच एक्सचेंज होने से हमारी अर्थव्यवस्था में बहुत ज्यादा फायदा होगा, तो यह सच है... लेकिन यूएस के लिए यह एक बड़ी खामी है, मुझे लगता है। वहाँ पर उनकी आर्थिक स्थिति कितनी मजबूत है, और हमारी ओर से भी हमें अच्छी तरह से तैयार करना होगा। मेरी राय में अगर यूरोप-भारत एक्सचेंज सफल हो जाता है तो हमें अपने पैसों को वहाँ के बाजार में निवेश करना चाहिए।

मैंने जब भी यूएस और यूरोप के साथ व्यापार किया था, तो मुझे लगता है कि हमें बहुत अच्छी तैयारी करनी पड़ती है, लेकिन यह एक्सचेंज अगर सफल होता है तो हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगा।

क्या तुमने यूरोप और भारत के बीच एक्सचेंज पर विचार किया है? मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मौका है।
 
યુનાઇટેડ સ્ટેટ્સમાં અનેક વોટર્સે તેમના બહુપક્ષી ડિજિટલ સેન્સસ દસ્યા તેનો અભ્યાસ કરવા માટે શરૂ થઈ છે.

આ ડિજિટલ સેન્સસનો ઉપયોગ ભારત-યુરોપીય ફ્રીક્વેન્સી એક્સચેંજમાં થઈ શકે છે અને આખા ઉદ્યોગને પ્રભાવિત કરી શકે છે.

આ એક્સચેંજમાં અમદાવાદનો મહત્વ છે, કારણ કે ભારતના ઉપકારી ટેકનોલોજીમાં અમદાવાદ એક મુખ્ય સ્થાન છે.

આ એક્સચેંજનો ઉપયોગ ભારતીય અને વિદેશી બજારોમાં આકર્ષણ પર ઘટકે છે, તેથી ભારતીય ઉદ્યોગને આગળ વધવામાં મદદ કરે છે.
 
अगर भारत और यूरोप की स्टेशनों में फ्रीक्वेंसी ट्रैफिक बढ़ जाए तो यूएस के लिए ये एक बड़ा हानि होगी, बात या तो ट्रैफिक में वृद्धि से शुरु होती है या फिर यूरोप से आये ग्राहकों के पास भारतीय स्टेशन पर विकल्प मिल जाएं, तो यूएस के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। 📺
 
वाह दोस्तों, मैंने पढ़ा है कि भारत और यूरोप के बीच अपनी पहली फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज शुरू करने का निर्णय लिया गया है, और यह यूएस में होगा। मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा कदम है भारतीय व्यापार और संस्कृति को दुनिया भर में पहुंचाने की ओर। लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं, जैसे कि यह पूरी तरह से यूएस में सफल होगी या नहीं। और हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि हमारी फ्रीक्वेंसी एक्सचेंज की गुणवत्ता कैसे बनाए रखी जाएगी, ताकि लोगों को अच्छा अनुभव मिले। 📺🌐
 
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