भास्कर अपडेट्स: दिल्ली दंगा केस में उमर खालिद को अंतरिम जमानत मिली, 16-29 दिसंबर के बीच बहन की शादी में शामिल होंगे

दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी उमर खालिद पर अदालत से जमानत मिलने के बाद, उन्हें अपनी बहन की शादी में जुड़ने का मौका मिलेगा। ये शादी 16 से 29 दिसंबर के बीच होने वाली है।

दिल्ली दंगों को फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन का कारण बनता है। इसमें 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि यह एक साजिश थी, जिसमें चक्का जाम और हिंसा की योजना बनी। इसमें उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा समेत 7 लोग मुख्य आरोपी हैं।

गुवाहाटी स्वागता स्क्वायर कॉम्प्लेक्स में आग लगने के बाद भी नहीं बुझी है। इसके बारे में जांच जारी है और आग के पीछे के कारणों पर निरीक्षण कर रही हैं।
 
मेरा दिल अब तक तो धड़खलाहट से भर गया है 😱, और फिर यह बात सुनकर मुझे लगने लगा कि हमारे यहां ऐसी स्थितियाँ हो सकती हैं जहां लोग अपने परिवार की खुशी के लिए दंगों की वजह से नुकसान का बदला लेने के लिए तैयार हो जाते हैं। उमर खालिद की बहन की शादी में जुड़ने का यह मौका मुझे लगता है कि एक बड़ा सवाल उठाता है। क्या हमारे यहां न्याय प्रणाली इतनी कमजोर हो गई है कि दंगों के आरोपियों को जमानत मिलने के बाद भी उन्हें अपने परिवार के साथ जुड़ने का मौका मिल रहा है?
 
अरे, यह तो बहुत अजीब लग रहा है कि उमर खालिद को अदालत से जमानत मिलने के बाद वाह, वह अपनी बहन की शादी में जुड़ने का मौका मिलेगा। इसका मतलब ये है कि उनके आरोपों की जांच का परिणाम यह हुआ है। लेकिन, शायद हमें यह भी समझना चाहिए कि एक व्यक्ति को जमानत देने से उसके आरोप की गंभीरता निर्धारित नहीं होती है। फिर, उमर खालिद की बहन की शादी में जाने से कहाँ तक हम इसके बारे में सीखेंगे? 🤔
 
अगर साजिश थी तो फिर तो उन लोगों को खत्म किया जाना चाहिए, नहीं तो यह दिल्ली में फिर से होता। उमर खालिद की बहन की शादी में जुड़ना उसके लिए एक आसान निकाल निकालने का तरीका है। लेकिन सच्चाई यह है कि वह अपनी जिंदगी से नहीं बदल सकता, और हमारी देशभर में ऐसे कई उमर खालिद हैं जो हिंसा में डूबे रहते हैं।
 
अगर उमर खालिद को अपनी बहन की शादी में जुड़ने का मौका मिल गया, तो यह एक अच्छा संकेत है कि व्यक्ति को फिर से समाज में जगह मिलने की संभावना है। लोगों को एक दूसरे के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए और उनके परिवार के सदस्यों के साथ जुड़ने का मौका देना भी महत्वपूर्ण है।
 
अगर उमर खालिद को अपनी बहन की शादी में जुड़ने का मौका मिल गया तो यह अच्छा होगा, लेकिन मुझे लगता है कि इसके पीछे कुछ और जरूरी बातें भी हैं। अगर वह अपनी बहन की शादी में जुड़ने के लिए सुरक्षित हैं तो फिर क्यों नहीं थक कर रिहा कर दिया गया। यह भी एक सवाल उठता है कि उमर खालिद और अन्य आरोपियों को अभी तक मुकदमे के दरमियान सुरक्षित रखा जा रहा है या नहीं।
 
उमर खालिद को जमानत देने से पहले उन्हें इतना ही याद रखना चाहिए... उनकी बहन की शादी में जाना तो एक छोटी सी माफ़ी है, लेकिन यह तो भूल गये थे कि दिल्ली में 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए... यह तो एक बड़ा पलायन था!
 
अरे, दिल्ली दंगों का सोचते समय, तो मुझे लगता है कि यह बहुत ही गंभीर घटना थी। 53 लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए। यह तो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का कारण बनता है।

मुझे लगता है कि आग लगने की घटना में जांच जारी होनी चाहिए। गुवाहाटी स्वागता स्क्वायर कॉम्प्लेक्स में आग लगने के बाद भी नहीं बुझी है। इसके पीछे कारणों को समझने की जरूरत है। उमर खालिद और दूसरों पर आरोप लगाने से पहले उन्हें अपनी शादी में जुड़ने का मौका मिलेगा। लेकिन, मुझे लगता है कि यह एक ऐसी बात नहीं है जिसके लिए हमें खुश होना चाहिए।
 
अरे, यह तो बहुत अजीब लग रहा है, अदालत से जमानत मिलने के बाद उमर खालिद की बहन की शादी में जुड़ने का मौका? लगता है कि सब कुछ सही से नहीं चल रहा है। पहले तो दिल्ली दंगों में इतना बड़ा आंदोलन क्यों हुआ, और अब उसके आरोपियों को जमानत मिलने के बाद फिर वहीँ जीवन शैली जीने का मौका? यहाँ पर कोई अंतर नहीं है?
 
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