अरे यार, देखा तो इस बात की भी बहुत बातें की जा रही है ना, कि क्या हमारा समाज सही से ठीक से चल रहा है? जैसे कि इस मामले में, जब कोई हमला होता है, तो हम सबको लगता है कि यहां तक कि हमें भी अपनी गल्लत करनी पड़ती है। लेकिन फिर सोचिए, अगर दीपक कुमार ने खुद भी जान बचाई होती, तो दूसरों को क्या पता? हमें यह नहीं मानना चाहिए कि हमारा कोई सही या गलत नहीं करता, लेकिन सोचिए, अगर एक व्यक्ति की जान बACHAI GI HOTTI TO Kya uska matlab hai ki wo janaa nahi chahata? humein apne mann ko dhyan mein rakhna chahiye aur samajhna chahiye ki kya humari sahi saamagri hain.