‘बजरंग दल से डरा परिवार, बेटी का स्कूल छूटा’: मुस्लिम दुकानदार का सपोर्ट करने वाले ‘मोहम्मद’ दीपक का जिम बंद, बजरंग दल बोला- टारगेट पर हो

उत्तराखंड के जिम ट्रेनर दीपक कुमार के साथ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का हंगामा। दीपक ने मुस्लिम दुकानदार पर हुए हमले को लेकर बताया, कि उन्हें पता चला था कि उनकी जान बचाई गई, लेकिन अब उनकी जान का खतरा बन गया है।
 
बिल्कुल सही मानने वालों के पास भी अपने दृष्टिकोण होते हैं... उत्तराखंड के मामले में तो हमारे देश में ऐसे कई मामले हुए हैं जहां लोग अपने अधिकारों का ख्याल करते हुए अपनी आवाज़ उठाते हैं। दीपक कुमार जैसे व्यक्ति ने जब उन्हें हमले के बारे में बताया तो लगता है कि उनकी चिंता को समझना बहुत जरूरी है। लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि ऐसे हमलों के पीछे क्या कारण है, और हमें अपनी सामाजिक संरचना में बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए।
 
🤔 उत्तराखंड में बजरंग दल के हंगामे से हमें बहुत परेशानी हुई, खासकर जब दीपक कुमार जी ने बताया कि उन्हें पता था कि उनके दोस्त की जान बचाई गई, लेकिन अब उनकी जान का खतरा बन गया है। यह बहुत ही दुखद बात है और मुझे लगता है कि हमें इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए एक साथ आएं। हमें अपने समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटनाएं कभी भी हो न सकें। 😕
 
अरे वाह, यह तो बहुत बड़ा मामला है 🤔। पुलिस ने तो बजरंग दल के सभी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन दीपक कुमार जैसे अधिकारी अभी भी खतरे में हैं ? यह तो बहुत अजीब है कि कैसे एक सामान्य आदमी इतनी बड़ा मामला घेर गया है। मुझे लगता है कि पुलिस ने जो सबूत इकट्ठा किए हैं, उनके आधार पर ही इस मामले का फैसला लिया गया होगा। सिर्फ इतना कहना है कि दीपक कुमार जैसे अधिकारी की सुरक्षा तो सबसे पहले प्राथमिकता होनी चाहिए। अब भी उनकी जान का खतरा बन गया है, यह तो बहुत बड़ा खतरा है।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत गंभीर मामला है और पुलिस ने जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। यह तो नहीं समझना चाहिए कि दीपक कुमार जी की बात हो रही है, लेकिन फिर भी उन्हें सुनना चाहिए। हमलावरों ने मुस्लिम दुकानदार की जान बचाई, लेकिन अब उनकी जान का खतरा बन गया है। यह बहुत अजीब है और हमें इसके पीछे कारण ढूंढने की जरूरत है।
 
अरे यार, देखा तो इस बात की भी बहुत बातें की जा रही है ना, कि क्या हमारा समाज सही से ठीक से चल रहा है? जैसे कि इस मामले में, जब कोई हमला होता है, तो हम सबको लगता है कि यहां तक कि हमें भी अपनी गल्लत करनी पड़ती है। लेकिन फिर सोचिए, अगर दीपक कुमार ने खुद भी जान बचाई होती, तो दूसरों को क्या पता? हमें यह नहीं मानना चाहिए कि हमारा कोई सही या गलत नहीं करता, लेकिन सोचिए, अगर एक व्यक्ति की जान बACHAI GI HOTTI TO Kya uska matlab hai ki wo janaa nahi chahata? humein apne mann ko dhyan mein rakhna chahiye aur samajhna chahiye ki kya humari sahi saamagri hain.
 
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