ब्रिटेन में सिखों के साथ होने वाली बुराई की दूसरी रिपोर्ट ने दिखाया है कि भारतीय समुदाय के लिए जो खतरा सबसे ज्यादा है, वह हिंदूवाद और सांप्रदायिक तनाव का खतरा नहीं बल्कि सिखों के लिए जो खतरा सबसे ज्यादा है वह सिखवाद और सिख-विरोधी तनाव का खतरा है।
ब्रिटिश संसद में पेश 11वीं ब्रिटिश सिख रिपोर्ट ने बताया है कि ब्रिटेन में रहने वाले 49 प्रतिशत सिख असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्हें अपनी पहचान को बनाए रखने में परेशानी होती है। ये समस्या न केवल दशकों पहले शुरू हुई थी, बल्कि 9/11 आतंकी हमलों के बाद भी सिख समुदाय के लिए जारी रही।
यह चिंता केवल हालिया घटनाओं की देन नहीं बल्कि नस्लीय हमलों, घृणास्पद भाषा, शिक्षा और रोजगार में भेदभाव की समस्याओं से जुड़ी हुई है। ब्रिटेन में सिखों पर खुलेआम हमले और धमकियां होती रहीं हैं और उन्हें अक्सर गलत पहचान का शिकार होना पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सिख समुदाय को अपनी पहचान बनाए रखने में परेशानी होती है, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व से असंतोष भी बढ़ गया है। 46 प्रतिशत सिख अब सरकारों और राजनीतिक दलों को अपनी पहचान को बनाए रखने में मदद करने की उम्मीद नहीं करते।
इस समस्या का समाधान खोजने के लिए, ब्रिटेन में सिख समुदाय को अपनी आवाज़ उठाने की जरूरत है। सरकारें और राजनीतिक दलों को सिख समुदाय की चिंताओं को सुनना और उनकी मदद करनी चाहिए।
ब्रिटिश संसद में पेश 11वीं ब्रिटिश सिख रिपोर्ट ने बताया है कि ब्रिटेन में रहने वाले 49 प्रतिशत सिख असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्हें अपनी पहचान को बनाए रखने में परेशानी होती है। ये समस्या न केवल दशकों पहले शुरू हुई थी, बल्कि 9/11 आतंकी हमलों के बाद भी सिख समुदाय के लिए जारी रही।
यह चिंता केवल हालिया घटनाओं की देन नहीं बल्कि नस्लीय हमलों, घृणास्पद भाषा, शिक्षा और रोजगार में भेदभाव की समस्याओं से जुड़ी हुई है। ब्रिटेन में सिखों पर खुलेआम हमले और धमकियां होती रहीं हैं और उन्हें अक्सर गलत पहचान का शिकार होना पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सिख समुदाय को अपनी पहचान बनाए रखने में परेशानी होती है, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व से असंतोष भी बढ़ गया है। 46 प्रतिशत सिख अब सरकारों और राजनीतिक दलों को अपनी पहचान को बनाए रखने में मदद करने की उम्मीद नहीं करते।
इस समस्या का समाधान खोजने के लिए, ब्रिटेन में सिख समुदाय को अपनी आवाज़ उठाने की जरूरत है। सरकारें और राजनीतिक दलों को सिख समुदाय की चिंताओं को सुनना और उनकी मदद करनी चाहिए।