अरे, यह तो सच है कि ज्ञान और विवेक अलग-अलग चीजें हैं
। हमें अपने शब्दों का चयन करना चाहिए, लेकिन क्या हमेशा सही तरीके से बोल पाते हैं? मुझे लगता है कि जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमें समझना चाहिए कि जब हम बोलते हैं, तो किस व्यक्ति के सामने हम बोल रहे हैं।
अगर मैं एक अच्छी तरह से पढ़ाई करके जाने वाली पेशेवर हूँ, तो शायद मुझे समझदारी भी होगी, लेकिन अगर मैं अपने अनुभव से, गलतियों से और सोच-विचार करने से सीखता हूँ, तो मेरे पास विवेक होगा।
आज की दुनिया में तुरंत राय बनाने की बात सचमुच सही नहीं है। हमें हर समय सोच-विचार करना चाहिए और समझदारी से अपने निर्णय लेने चाहिए। सिर्फ नियमों को ध्यान में रखने के साथ-साथ, समझदारी भी बहुत जरूरी है
अगर मैं एक अच्छी तरह से पढ़ाई करके जाने वाली पेशेवर हूँ, तो शायद मुझे समझदारी भी होगी, लेकिन अगर मैं अपने अनुभव से, गलतियों से और सोच-विचार करने से सीखता हूँ, तो मेरे पास विवेक होगा।
आज की दुनिया में तुरंत राय बनाने की बात सचमुच सही नहीं है। हमें हर समय सोच-विचार करना चाहिए और समझदारी से अपने निर्णय लेने चाहिए। सिर्फ नियमों को ध्यान में रखने के साथ-साथ, समझदारी भी बहुत जरूरी है