CJI: मुख्य न्यायाधीश बोले- विवेक ज्ञान से अलग है, कानून के शब्दों और मकसद को समझना जरूरी

अरे, यह तो सच है कि ज्ञान और विवेक अलग-अलग चीजें हैं 🤔। हमें अपने शब्दों का चयन करना चाहिए, लेकिन क्या हमेशा सही तरीके से बोल पाते हैं? मुझे लगता है कि जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमें समझना चाहिए कि जब हम बोलते हैं, तो किस व्यक्ति के सामने हम बोल रहे हैं।

अगर मैं एक अच्छी तरह से पढ़ाई करके जाने वाली पेशेवर हूँ, तो शायद मुझे समझदारी भी होगी, लेकिन अगर मैं अपने अनुभव से, गलतियों से और सोच-विचार करने से सीखता हूँ, तो मेरे पास विवेक होगा।

आज की दुनिया में तुरंत राय बनाने की बात सचमुच सही नहीं है। हमें हर समय सोच-विचार करना चाहिए और समझदारी से अपने निर्णय लेने चाहिए। सिर्फ नियमों को ध्यान में रखने के साथ-साथ, समझदारी भी बहुत जरूरी है 🙏
 
बिल्कुल सही है! जस्टिस सूर्यकांत की बात समझने वालों को जरूर अच्छी लगेगी, खासकर हमारी दुनिया में जहां तेजी से चल रही है और लोग जल्दबाजी में राय बनाने लगते हैं... 🤦‍♂️ यह समझदारी कितनी जरूरी है! मैंने भी कभी-कभी ऐसा महसूस किया है, जब मैं किसी समस्या को हल करने के लिए सोच रहा था, तो मुझे अचानक विचार आया कि शायद इस बात पर जोर देने की जरूरत नहीं है... 🤔 बस समझना और अनुभव प्राप्त करने से चीजें बेहतर होती हैं!
 
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