मुझे लगता है कि जस्टिस बीआर गवई जी ने एसएससी मामले पर विचार करने से पहले अपने शब्दों को बहुत अच्छी तरह से सोच लिया होगा, ताकि वह सुनिश्चित कर सकें कि उनके द्वारा कहे गए वाक्यांश सुपरकारी हों। मैं समझता हूँ कि उन्होंने SC वर्ग में जो तर्क पेश किया है, वह शायद बुराई नहीं है। लेकिन कुछ भी ऐसा कहने से पहले उन्हें अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए, ताकि उनकी बात समझने में आसान हो।