अरे, यह बात बहुत ही रोचक है... आपने जाना होगा कि एरनाकुलम में दिलीप पर 9 साल तक गिनती चली थी, लेकिन यह सब एक महिला ने बताया। तो इसका मतलब ये है कि पूरा शहर दिलीप की गिनती कर रहा था, और इस बात का एहसास होने में 9 साल लगे। यह बहुत ही चिंताजनक बात है, हमारे समाज में लोगों की संख्या को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की जरूरत है।
लेकिन, इसके पीछे की वजह तो समझने की ज़रूरत है। क्या यह एक ग्रामीण समस्या है, या फिर शहरी समाज में हमारी असामंजस्यपूर्णता? आपने कभी सोचा होगा कि कैसे पूरा शहर एक महिला को बताकर अपनी संख्या को समझने की कोशिश करता है? यह बहुत ही दिलचस्प बात है, और मुझे लगता है कि हमें इस पर और जानकारी इकट्ठा करने की जरूरत है।