दिल्ली ब्लास्ट-20 घंटे पहले मिला अलर्ट, फिर उमर कैसे भागा: डॉक्टर टेरर मॉड्यूल पकड़ा लेकिन खतरा कायम, IS फिर कर सकता है अटैक

अगर 10 नवंबर को दिल्ली में हुए ब्लास्ट को अंजाम देने वाले डॉ. उमर ने उसे पहले दिल्ली से श्रीनगर तक नहीं लाया था, तो शायद हमले को रोका जा सकता। इससे पहले उमर फरार हुआ था, जिसके बाद यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस ने उसकी फोटो और विस्फोटक से जुड़ी डिटेल्स साझा नहीं की, न ही वह दिल्ली में एक्टिव था, न ही उसने पहले यहां पर कुछ भी ऐसा किया था।
 
अगर उस नंबर को अंजाम देने वाले डॉ. उमर ने पहले से ही श्रीनगर तक ले जाया होता, तो हमला तो पूरी तरह से रुका होता। यह सवाल उठता है कि क्या हमारी पुलिस ने उसके बारे में पता नहीं था, या फिर वह भी ऐसा ही चालू छोड़ दिया था। और अगर पुलिस ने तो उसे पकड़ने की कोशिश की, तो दिल्ली से श्रीनगर तक लाने का मतलब यह नहीं कि उसने पहले से ही कुछ ऐसा किया है, बल्कि वह तो पहले ही चालू छोड़ दिया था।
 
अगर 10 नवंबर को दिल्ली में हुए ब्लास्ट को अंजाम देने वाले डॉ. उमर ने उसे पहले दिल्ली से श्रीनगर तक नहीं लाया था, तो शायद हमले को रोका जा सकता 🤔। यह सवाल हमें यह पूछता है कि हम अपने देश के विदेशियों पर इतनी अनिश्चितता से नज़र डालते हैं और उनके खिलाफ ऐसी आरोप लगाते हैं। लेकिन अगर वह पहले से ही फरार था, तो शायद हमें उन्हें पकड़ने में असमर्थ होने के बारे में सोचना चाहिए। नहीं, हमें उनके अपराधों के लिए दोषी ठहराना चाहिए, बल्कि इस हमले को रोकने के लिए हमें अपनी पुलिस और सुरक्षा प्रणालियों पर सुधार करना चाहिए। क्या हमें यह कभी नहीं सीखते?
 
वाह, ये तो बहुत गंभीर मुद्दा है 🤯, अगर डॉ. उमर ने ब्लास्ट लाने की कोशिश नहीं की तो शायद हमला हुआ नहीं होता, यह एक बड़ा सवाल है कि पुलिस ने उसकी फोटो और विस्फोटक से जुड़ी डिटेल्स साझा क्यों नहीं की। अगर वह फरार था तो शायद उसने पहले दिल्ली में कुछ भी ऐसा नहीं किया होता, यह एक बड़ा सवाल है कि पुलिस ने उसकी जांच कैसे की और फिर इतनी सावधानी बरती क्यों नहीं।
 
अगर उमर को पकड़कर पेश कर दिया जाता, तो शायद हमले से बचा जा सकता | लेकिन पुलिस ने इतनी धैर्य रखी, यह तो भी सवाल उठाता है कि क्यों इतनी गंभीरता नहीं ली गई, जब हमला हुआ था तो उमर से संपर्क में रहने वाले लोगों की फोटो और विस्फोटक से जुड़ी डिटेल्स साझा किए गए थे। यह ध्यान रखना जरूरी है कि एक्टिव होने से पहले या उसके बाद कुछ भी नहीं था, इसका मतलब यह न हो कि वह पूरी तरह से मुनाफा था।
 
ये बात सचमुच गंभीर है... अगर डॉ. उमर ने श्रीनगर तक नहीं लाया होता तो शायद हमारे देश में और खासकर अपने सैनिकों की जान बच जाती। पुलिस को बेहतर ढंग से जानकारी एकत्र करनी चाहिए, ताकि वह ऐसे खतरनाक लोगों का पता लगा सके। यह सवाल उठता है कि अगर उमर ने पहले दिल्ली में कुछ गलत किया था, तो पुलिस ने इसकी जानकारी साझा नहीं की, फिर भी उसकी तस्वीर और विस्फोटक से जुड़ी डिटेल्स साझा हुईं। यह देश की सुरक्षा के लिए बुरी तरह गड़बड़ी का संकेत है।
 
🤔 अगर वो डॉ. उमर ने पहले ही ये सब नहीं तय किया था, तो शायद हमला नहीं होता। लेकिन फिर भी, जैसे हमारे देश में कई बातें जो चालू हो सकती हैं और समझ में नहीं आती हैं। लेकिन हमें ऐसे सवाल पूछना चाहिए कि क्या पुलिस ने अपनी जानकारी साझा कर दी, ताकि जासूसी और जांच बेहतर हो सके। और शायद हमलावर की पहचान हुई, फिर भी हमें यह नहीं समझना चाहिए कि क्या सब कुछ सही तरीके से नहीं चला। 🤞
 
डॉ. उमर को इतनी ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया तो हमले से बचाया जा सकता था 🤔. मैंने पुरानी खबर पढ़ी है कि डॉ. उमर को पहले भी ऐसे ही हमलों के लिए पकड़ा गया था, लेकिन उस समय क्या उन्हें सही रास्ता दिखाया गया? 🤷‍♂️. पुलिस ने कितनी जिम्मेदारी ली थी, वह तो समझना ही मुश्किल है... 😕.
 
भले ही उमर को यह तय न हुआ होगा कि श्रीनगर तक यह हमला लाया जाए, फिर भी वह दिल्ली में पहले से ही कुछ ऐसा करने वाला था, और हमें पता चल गया है कि वहां कौन-कौन से लोग उसके साथ थे। क्या हमारी पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए अधिक जोर देना चाहिए? क्योंकि अगर पुलिस ने उनकी फोटो और विस्फोटक से जुड़ी डिटेल्स साझा नहीं की, तो यह हमला होने में कमजोर था।
 
मुझे लगता है कि पुलिस में कुछ गलत फिक्र थी! अगर उन्होंने डॉ उमर की तस्वीर और विस्फोटक के बारे में जानकारी साझा नहीं की, तो शायद हमले को रोका जा सकता था। यह सवाल उठता है कि पुलिस ने डॉ उमर को पकड़ने के लिए कह्या थी या नहीं, और अगर नहीं, तो फिर क्यों उसे दिल्ली में छोड़ दिया गया। इससे पहले जब डॉ उमर फरार हुआ था, तो मुझे लगता है कि पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी थी, लेकिन फिर कहीं खो गई। 🤔👮
 
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