दिल्ली ब्लास्ट में घोस्ट सिम का खुलासा, फिजिकल SIM के बिना मैसेजिंग ऐप्स चलाए, एक्टिव सिम का नियम लागू हुआ। दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किला के पास हुए व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल के आतंकी डॉक्टरों ने घोस्ट सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था, जिससे वे पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ कोऑर्डिनेट करते थे।
आतंकी सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए डुअल-फोन प्रोटोकॉल फॉलो कर रहे थे, हर आरोपी के पास दो से तीन मोबाइल थे, जिनमें एक क्लीन फोन था जिसके नाम पर रजिस्टर्ड था, और दूसरा टेरर फोन था जिसके जरिए वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर बात करते थे।
डिवाइस में फिजिकल सिम के बिना मैसेजिंग ऐप्स चलाने की सुविधा का फायदा उठाकर ही ये लोग डॉक्टरों को यूट्यूब के जरिए IED बनाना सिखाते और हमले का निर्देश दे रहे थे।
जांच के खुलासे के बाद, टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट (DoT) ने पिछले साल 28 नवंबर को निर्देश दिए थे कि वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिगनल के लिए एक्टिव सिम कार्ड का नियम लागू किया है।
आतंकी सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए डुअल-फोन प्रोटोकॉल फॉलो कर रहे थे, हर आरोपी के पास दो से तीन मोबाइल थे, जिनमें एक क्लीन फोन था जिसके नाम पर रजिस्टर्ड था, और दूसरा टेरर फोन था जिसके जरिए वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर बात करते थे।
डिवाइस में फिजिकल सिम के बिना मैसेजिंग ऐप्स चलाने की सुविधा का फायदा उठाकर ही ये लोग डॉक्टरों को यूट्यूब के जरिए IED बनाना सिखाते और हमले का निर्देश दे रहे थे।
जांच के खुलासे के बाद, टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट (DoT) ने पिछले साल 28 नवंबर को निर्देश दिए थे कि वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिगनल के लिए एक्टिव सिम कार्ड का नियम लागू किया है।