दिल्ली के 300 घर यूपी सरकार ने क्यों सील किए: मस्जिद कॉलोनी के लोग बोले, आधार-वोटर कार्ड हैं, लेकिन सामान फेंका; दिल्ली की CM कहां

आजादी से पहले और कुछ समय बाद तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में यमुना नदी के पानी और नहरों के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संयुक्त प्रांत यानी आज के उत्तर प्रदेश की थी। अंग्रेजों के समय दिल्ली में कई नहरें बनाई गईं। उस समय सिंचाई से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का कंट्रोल यूपी के इंजीनियरों के पास था।
 
अंग्रेजों के शासन में दिल्ली में नहरों की बनावट में बहुत सारी रचनात्मकता आ गई थी। अगर आज भी हम वही नहरें देखें, तो उस समय यूपी के इंजीनियरों की जिम्मेदारी अच्छी लगेगी। लेकिन आजकल यमुना नदी का पानी और नहरों का मैनेजमेंट बहुत ही संभाल निकल रहा है। यह बात तो सच है, लेकिन हमें यह जानने की जरूरत है कि यह सुधार क्या हुआ, किसने इसे प्रभावित करने वाले कारकों का मानचित्र बनाया।
 
यमुना नदी की सेहत देखकर मुझे कुछ खुशी हुई 🌊। अगर आजादी से पहले और थोड़े समय बाद तक यूपी की जिम्मेदारियां इसी प्रकार रहती, तो हमें एक अच्छा सिंचाई प्रणाली मिल सकती। विशेषकर जब अंग्रेजों ने दिल्ली में कई नहरें बनाईं, और सिंचाई पर उनके इंजीनियरों का हाथ था, तो वह तो हमारी नदियों की देखभाल के लिए अच्छा कर सकते थे। आज भी, जब हम यूपी की नहरों और नदियों की देखभाल में बुराई-माली करते हैं, तो मुझे लगता है कि अगर उन्होंने थोड़ा खास काम सोचा, तो बहुत अच्छा नतीजा हो सकता।
 
मेरे दोस्त, यमुना नदी की बात करें तो ऐसा लगता है कि कई लोग नहीं जानते इसकी कहानी। आजादी से पहले और कुछ समय के लिए, उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी थी। तो हमें ये समझना चाहिए कि अगर अंग्रेजों ने ऐसी नहरें बनाईं, तो उन्होंने अपने इंजीनियरों को सिखाया और उनका अनुभव लिया।

मुझे लगता है कि हमें अपने पुराने इतिहास को फिर से देखने की जरूरत है। अगर हम आज भी उत्तर प्रदेश के इंजीनियरों की बात करें, तो उनकी मेहनत और ज्ञान को हमें विकसित करने का अवसर मिला। फिर से, यह सोच के लिए मुझे मजबूर हूं कि मेरे भारतीय दोस्तों को कभी नहरों या प्रोजेक्ट्स पर ध्यान न देना, और हम अपने विकास को बनाए रखने के लिए इंजीनियरों और अन्य लोगों की मदद करें।
 
यमुना नदी को देखकर लगता है कि यहां के लोग ना तो समझते हैं और ना ही सोचते। कहीं नहरें बनाकर कोई सिंचाई योजना बनाता है, परंतु जब पानी बहने लगता है तो सब चुपचाप बैठकर देखते हैं। इसके लिए तो उन्हें मक्की किराए पर आना पड़े।
 
यमुना नदी की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है 🌊 मेरी राय में यह समस्या न केवल दिल्ली की समस्या है, बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए भी बड़ी खतरा है। आजादी से पहले और कुछ समय बाद तक यमुना नदी के पानी और नहरों के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी हमारे देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण जगह है। अगर उस समय से लेकर आज तक उत्तर प्रदेश के इंजीनियरों ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो आज यह हमारे पास खड़ी है 🤦‍♂️

अब जब यमुना नदी का पानी बहुत कम होने लगा है, तो हमें अपने इंजीनियरों से बात करनी चाहिए और उन्हें इस समस्या पर ध्यान देने के लिए मजबूर करना चाहिए। अगर हम एक साथ मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें, तो हमारे पास यमुना नदी की समस्या का समाधान भी हो सकता है 😊
 
मुझे लगता है कि आजादी के बाद भी दिल्ली में नहरों का संकट बहुत ज्यादा बना हुआ है। मेरे फोन के स्पीड बहुत तेज़ होती है लेकिन जब मैं यमुना नदी की तस्वीरें देखता हूँ तो लगता है वहाँ का पानी कहाँ से आता है? और नहरों की जिम्मेदारी कब से उत्तर प्रदेश पर हुई? मेरे चाचा के दादाजी की कहानियाँ सुनते समय मुझे लगता है जब वह अंग्रेजों के समय थे तो नहरें बनाने में बहुत ज्यादा रुचि रखे थे।
 
🤔 यमुना नदी और नहरों की बात करते हैं तो मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझने की जरूरत है। आजादी से पहले यूपी ने दिल्ली और आसपास के इलाकों की सिंचाई की जिम्मेदारी ली थी। यह तो अच्छा है कि अंग्रेजों ने दिल्ली में कई नहरें बनाईं, लेकिन यूपी ने अपने इंजीनियरों को इन परियोजनाओं का मैनेजमेंट सौंप दिया।

लेकिन आज भी देखें, वे नहरें और नहरों से जुड़े प्रोजेक्ट्स की स्थिति बहुत खराब है। यमुना नदी का पानी कई जगह सूख रहा है और नालियाँ बांध से भर गईं हैं। यह तो यूपी की पिछली सरकारों की गलतियों का परिणाम है।

आज भी, जब हम अपनी नदियों और नहरों की सुरक्षा के बारे में बात कर रहे हैं, तो हमें अपने इतिहास को समझने की जरूरत है और अपने वर्तमान की समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठाने होंगे।
 
यमुना नदी की समस्या से निपटने में हमेशा कुछ और सुधार करना चाहिए। अगर दिल्ली में यमुना के पानी को साफ और स्वच्छ बनाया जाए तो वहां की राहों पर घूमने वाले लोगों की सेहत कुछ कम ही खराब होती।
 
यमुना नदी की समस्या सुनकर मुझे बहुत गुस्सा होता है 🤬। जो लोग कहते हैं कि अब यमुना नदी का पानी दिल्ली में आसानी से उपलब्ध है, वे बिल्कुल भ्रमित हैं। इसके पीछे कोई जिम्मेदारी नहीं है। अगर अंग्रेजों ने दिल्ली में इतनी नहरें बनाईं, तो आज भी उस समय की तरह सिंचाई से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का कंट्रोल उत्तर प्रदेश के इंजीनियरों के पास होना चाहिए था। लेकिन ये नहीं हुआ। आज भी दिल्ली में पानी की कमी और कभी-तो बंद पड़ने वाली नहरें, यह सब एक बड़ा खेल है।
 
मुझे लगता है कि अगर आजादी होती, तो यह सब नहीं होता, और अब हमारे लोग मुख्य रूप से चेन्नई और बेंगलुरु शहरों में रहते हैं... 😕
हमारे देश की यमुना नदी के पानी और नहरों का मैनेजमेंट बिल्कुल सही न हो रहा है, तो क्या हम एकदम बदलाव लाएंगे? 🤔
कुछ समय पहले मैंने देखा था कि दिल्ली में पानी की समस्या बहुत ही, और वहाँ के लोगों ने कहा था कि अगर यमुना नदी का पानी हमारे शहर में पहुँच जाए, तो उसकी खुशी होती।
आज भी उत्तर प्रदेश के इंजीनियर्स और सरकार के लोगों को नहरों का निर्माण करने और सिंचाई पर काम करने का मौका मिलता है, लेकिन वो लोग बुरे ढंग से करते हैं... 😡
क्या हमारे देश की सरकार भी नहरों का निर्माण करने और पानी की समस्याओं को हल करने के लिए कुछ सही कदम उठा सकती है?
 
यमुना नदी की स्थिति को देखकर मुझे लगता है कि बाकी इलाकों की तुलना में हमारी सरकार बहुत ज्यादा बुद्धिमान नहीं है। किसने यमुना नदी को इस स्थिति पर पहुंचाया? अंग्रेजों ने जरूरी नहरें बनाईं, लेकिन अगर हम उनके प्रयासों को देखें, तो हमारी सरकार कुछ सीख सकती है। हमें अपने इंजीनियरों को यमुना नदी की स्थिति को देखने और उसे हल करने के लिए कहें।

मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश के इंजीनियरों को इस पर बहुत सोच-समझकर काम करना चाहिए। हमें अपने पर्यावरण की रक्षा करें, और जल संसाधनों का सही तरीके से प्रबंधन करें।
 
अगर मैं बोलूं तो यमुना नदी की मैनेजमेंट का कंट्रोल कहीं और नहीं होना चाहिए, लेकिन फिर अगर मैं बाकी बात करता हूं तो यूपी के इंजीनियरों ने बहुत अच्छी तरह से काम किया, लेकिन फिर भी पानी की कमी हमेशा एक समस्या रही है, और अगर मैं दिल्ली में नहरें बनाने वालों को बुलाता हूं तो वह अपने खुद के प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा ध्यान देते थे, और यूपी के इंजीनियरों को उनकी मदद करनी चाहिए थी, लेकिन फिर यह कहां तक सही है 🤔💦
 
नदी की देखभाल में कुछ गलत हो रहा है 🌊। आजादी के बाद जब उत्तर प्रदेश बना, तो नदी की जिम्मेदारी उसी के हाथों में आ गई। लेकिन दिल्ली शहर की जरूरतें अलग हैं। वहाँ की सिंचाई और जल संचयन का काम अब सरकार के पास है। इससे पहले, इंजीनियरों की जिम्मेदारी थी, लेकिन अब सब कुछ एक मेनेजर के बawah आता है। मुझे लगता है कि यह नियंत्रण स्थानिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने देता है।
 
यमुना नदी को देखकर मुझे लगता है कि अगर आजादी हुई तो उत्तर प्रदेश के इंजीनियर सिर्फ सिंचाई पर काम कर सकते थे। वहां पर नहरें बनाने और पानी को सुखाकर भारतीय किसानों का जीवन आसान बना सकते थे। लेकिन अब देखकर बुरा लगता है कि यमुना नदी का पानी केवल निजी व्यवसायियों के लिए फंस गया है।
 
बिल्कुल अरे वाह यमुना नदी की बात करें तो मुझे लगता है कि अगर आजादी से पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों में यह नहरें बनाई गईं तो ये बहुत बड़ा प्रोजेक्ट था। जैसे की लाल किला और गurdwara की बात करें, अंग्रेजों ने दिल्ली पर बहुत ही अच्छा आर्किटेक्चर बनाया है लेकिन सिंचाई से जुड़े प्रोजेक्ट्स में ये भारतीय इंजीनियरों को बहुत मौका नहीं मिला। आजकल यमुना नदी और नहरों का पानी बहुत खराब हो गया है और मुझे लगता है कि अगर हम ये नहरें और सिंचाई सिस्टम बेहतर बनाएं तो यह हमारे देश को बहुत अच्छा करेगा।
 
मुझे लगता है कि हमारे देश की इतिहास में कई महत्वपूर्ण तथ्य बिल्कुल भूल गए हैं। आजादी से पहले और कुछ समय बाद तक यमुना नदी के पानी और नहरों का प्रबंधन उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी थी, यह तो बहुत जरूरी जानकारी है लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को अच्छी तरह से जानना चाहिए, न कि याद नहीं करना। 🤔📚
 
आजादी के बाद जब सरकार ने नहरों और जल संसाधनों को अपने हाथ में लिया, तो मुझे लगता है कि हमने बहुत ही गलत काम किया। अब दिल्ली के आसपास के इलाके जल संकट से जूझ रहे हैं, और पानी नहीं मिलता। अंग्रेजों के समय जब यमुना नदी के पानी को संभालने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के इंजीनियरों के पास थी, तो उन्होंने बहुत अच्छे नहरें बनाईं और सिंचाई परियोजनाएं शुरू कर दीं। आजकल जब भी यहां जल संकट होता है, तो लोगों को पानी ढोने के लिए गाड़ियाँ खरीदने पड़ती हैं। मुझे लगता है कि हमें अपने अतीत की शिक्षा लेनी चाहिए और जल संसाधनों के प्रबंधन के बारे में सोचना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि अगर आजादी से पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों में यमुना नदी के पानी और नहरों के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी हमारे खेतों को भी अच्छी तरह से नहीं चल रही थी। अगर इंजीनियर्स ने ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स का हाथ लगाया होता तो शायद यमुना नदी के पानी और नहरों का मैनेजमेंट अच्छा हुआ होता। आज भी यमुना नदी बहुत ज्यादा सूखी रहती है और खेतों में पानी की समस्या होने पर हम लोग बहुत परेशान हो जाते हैं।
 
मुझे तो लगता है कि अगर आजादी से पहले और कुछ समय बाद तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में यमुना नदी के पानी और नहरों के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संयुक्त प्रांत यानी आज के उत्तर प्रदेश की थी तो हमारा देश तो बहुत ही सुचारू रूप से संचालित होता। यहीं तक बात करते हैं अगर अंग्रेजों ने ऐसा नहीं किया होता तो आज भी हमें गड़बड़ी क्यों मिलती है 🤔. लेकिन जैसे ही यूपी ने नहरों का मैनेजमेंट छोड़ दिया तो सारा मामला और भी जटिल हो गया। अब यही सवाल उठता है कि क्या यूपी को पानी का मैनेजमेंट लेना चाहिए या फिर कुछ अन्य राज्य को 🤷‍♂️.
 
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