दिल्ली के 300 घर यूपी सरकार ने क्यों सील किए: मस्जिद कॉलोनी के लोग बोले, आधार-वोटर कार्ड हैं, लेकिन सामान फेंका; दिल्ली की CM कहां

यमुना नदी के पानी और नहरों की बात करें, तो मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है। अगर आजादी से पहले यूपी की जिम्मेदारी थी, तो फिर भी हमें लगता है कि नहरों और पानी की बात करने के लिए स्थानीय लोगों को अपनी आवाज उठाने का मौका नहीं मिला। 🤔

अगर यूपी की इंजीनियरों ने तब ही इन प्रोजेक्ट्स पर काम किया, तो फिर आज भी देखा जा सकता था कि हमारे पास इतनी सुंदर नहरें और बांध बनाए गए हैं! 🌉 लेकिन, अब यूपी के इंजीनियरों को अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी। यह भी एक अच्छा मौका है कि हम अपने प्रदेश की सुंदरता और विकास पर काम करें। 🌈

आज भी यूपी के कई इलाकों में पानी की समस्या बहुत ज्यादा है। तो अगर यूपी के नेताओं द्वारा प्रयास किया जाता, तो फिर जल संसाधनों को और भी बेहतर बनाया जा सकता था। #जलसंसाधन #उत्तरप्रदेश #नहेरें
 
मुझे लगता है कि अगर हमारे देश में आजादी से पहले सिंचाई की समस्याओं पर ध्यान दिया गया था, तो आज हमारे देश में बहुत सारी नहरें बनाई जा सकती और फसलें बेहतर ढंग से उगाई जा सकती। पुराने यूपी के इंजीनियरों ने दिल्ली में कई नहरें बनाईं, लेकिन उन्हें उस समय राज्य की सरकार को कोई सहायता नहीं मिली।
 
यह तो देखकर राहत है 🙏 कि यमुना नदी के पानी और नहरों की जिम्मेदारी अब स्थानीय लोगों को मिल गई है। वह समय जब अंग्रेजों ने दिल्ली में कई नहरें बनाई थीं, तो ये सभी बहुत सुंदर और उपयोगी थीं। लेकिन आजादी के बाद, जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश एक अलग राज्य बन रहा था, इन नहरों की देखभाल पर ध्यान कम होने लगा।
 
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