दिल्ली में इंसानी रेबीज 'नोटिफायबल डिजीज’ घोषित: केस की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी; दिल्ली में 2025 में डॉग बाइट के 35 हजार मामले

दिल्ली सरकार ने ह्यूमन रेबीज को अब नोटिफायबल डिजीज घोषित कर दिया है, जिसका मतलब है कि संदिग्ध और कंफर्म केस आने पर उसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा। इस फैसले से रेबीज के मामलों पर समय रहते नजर रखी जा सकेगी, और मरीज के इलाज में देरी नहीं होगी। अब दिल्ली के सभी सरकारी-निजी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और निजी डॉक्टरों को ऐसे मामलों की तुरंत रिपोर्ट करनी होगी।

रेबीज से होने वाली एक भी मौत स्वीकार नहीं है, और यह फैसला समय पर इलाज और निगरानी में मदद करेगा। इस आदेश के तहत, रेबीज के 49 केस सामने आए हैं, जिनमें से डॉग बाइट के 35 हजार मामले दर्ज किए गए हैं। दिल्ली सरकार ने यह भी तैयारी की है कि अगर कोई रेबीज का संदिग्ध और कंफर्म केस आता है, तो उसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी।

भारत में रिपोर्ट किए गए 60% रेबीज के मामले और मौतें 15 साल से कम उम्र के बच्चों की होती हैं, क्योंकि बच्चों के काटने के मामले अक्सर रिपोर्ट नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल दुनिया में रेबीज के कारण करीब 59,000 लोगों की मौत होती है, और भारत में इससे हर साल 20,000 लोगों की जान जाती है।

रेबीज एक वायरल इन्फेक्शन है, जो आमतौर पर कुत्ते, बिल्ली और बंदर के काटने से होता है। यह संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या उसकी लार के किसी खुले जख्म के संपर्क में आने से इंसानों में फैल सकता है। रेबीज वायरस इंसान के ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर हमला करता है, अगर सही समय पर इलाज न मिले तो व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है।

रेबीज के लक्षणों में सबसे पहले काटने वाली जगह के आसपास चुभन और खुजली महसूस होती है, व्यक्ति को तेज बुखार और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। रेबीज वायरस धीरे-धीरे नसों के जरिए ब्रेन तक पहुंचता है, और इसके बाद के सभी लक्षण ब्रेन से जुड़े होते हैं।
 
रेबीज एक बड़ा मुद्दा है जो हमारे देश में खलल डाल रहा है। 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर इतनी बुरा प्रभाव पड़ना नहीं चाहिए। सरकार ने यह अच्छा फैसला लिया है कि अब रेबीज के मामलों को तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा। लेकिन अभी भी सवाल उठता है कि 60% रिपोर्ट किए गए रेबीज के मामले और मौतें बच्चों की होती हैं। इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि हमारे शिक्षा प्रणाली और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
 
रेबीज से लड़ने के लिए हमें अपने आसपास के लोगों और जानवरों को सावधान रहना चाहिए 🚨। मैंने देखा है कि बिल्कुल सभी लोग रेबीज के लक्षण पहचानने में असफल रहते हैं, इसलिए हमें अपने परिवार और दोस्तों को सिखाना चाहिए कि कैसे रेबीज के लक्षणों को पहचानना है और जल्दी मदद लेना चाहिए।

इसके अलावा, मैं समझता हूं कि बिल्कुल सभी बच्चे रेबीज से मरते हैं, इसलिए हमें अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहिए कि रेबीज से निपटने के लिए कैसे सावधान रहना चाहिए।

और मैं सोचता हूं कि अगर हम रेबीज से निपटने के लिए एकजुट होते हैं, तो हम इस बीमारी से लड़ने में सफल हो सकते हैं। 🙏

आइए, हम सब मिलकर रेबीज के खिलाफ लड़ने का प्रयास करें और अपने आसपास के लोगों को स्वस्थ रखने का प्रयास करें।
 
रेबीज से लड़ने का यह फैसला मेरे लिए बहुत प्रसन्नि का विषय है 🙏। मैंने देखा है कि कई बार रेबीज की पहली लक्षणों को गलत समझा जाता है, और इससे बच्चों की जान जाती है। इस फैसले से अब सरकार और निजी अस्पतालों में जागरूकता बढ़ेगी, और समय पर इलाज मिलेगा। लेकिन हमें यह भी याद रखना होगा कि रेबीज के लक्षणों को जल्दी पहचाना जाए, ताकि बच्चों को जिंदगी से विदाई न देनी पाएं। 👧
 
मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा फैसला है। अगर हम रेबीज के मामलों पर नजर रख सकते हैं तो मरीज का इलाज समय पर हो पाएगा। और अगर बच्चे काटने से गिर जाते हैं तो उनकी माँ-पापा ने भी पता लगाने का व्यार कर सकेंगे।
 
रेबीज को अब दिल्ली सरकार नोटिफायबल डिजीज घोषित कर दिया है। यह एक बहुत बड़ा फैसला है जिससे रेबीज के मामलों पर नजर रखी जा सकेगी। अगर ऐसा नहीं होता, तो भारत में 20,000 लोगों की जान जाती, और दुनिया में करीब 59,000 लोगों की मौत होती। यह फैसले से मरीज के इलाज में देरी नहीं होगी, और रेबीज वायरस इंसान को नुकसान पहुंचाने से रोका जा सकेगा। 🚨👍
 
रेबीज की यह समस्या हमारे देश में बहुत बड़ी मुश्किल है। 15 साल से कम उम्र के बच्चों को इतनी गंभीर बीमारी हो रही है, यह बहुत चिंताजनक है। हमें ऐसे मामलों की तुरंत जानकारी देना अनिवार्य होगा, ताकि वे समय पर इलाज प्राप्त कर सकें। और इसके अलावा, लोगों को भी रेबीज से बचने के तरीके सिखाने की जरूरत है। हमें अपने आसपास के जानवरों के बारे में अधिक शिक्षित होना चाहिए, ताकि हम उनके साथ सावधानी से व्यवहार कर सकें।
 
रेबीज को अब नोटिफायबल डिजीज घोषित करना एक अच्छा फैसला है 🙏। इससे रेबीज के मामलों पर समय रहते नजर रखी जा सकेगी, और मरीज के इलाज में देरी नहीं होगी। लेकिन, यह सवाल उठता है कि 49 केस सामने आने के बाद भी, रेबीज के मामलों पर इतनी ध्यान कैसे दिया जा रहा है? 🤔

मेरा मन चिंतित हो गया है, क्योंकि भारत में रिपोर्ट किए गए 60% रेबीज के मामले और मौतें 15 साल से कम उम्र के बच्चों की होती हैं। यह तो बहुत ही चिंताजनक बात है 🚨। हमें अपने बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए और अधिक जागरूक रहना होगा।
 
मुझे यकीन नहीं है कि लोग अब भी रेबीज के बारे में इतनी चिंतित होंगे, जैसा कि हम दो दशक पहले थे। मैंने अपने बचपन की कहानियां सुनाई हैं, जब हमारे पास आधुनिक दवाओं और इलाज की तकनीक नहीं थी। लेकिन अब, दिल्ली सरकार ने रेबीज को नोटिफायबल डिजीज घोषित कर दिया है, जिससे मरीजों के इलाज में देरी नहीं होगी। यह एक अच्छा फैसला है, लेकिन मुझे लगता है कि हमें अभी भी बच्चों को सुरक्षित रखने और रेबीज के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है। 🤔
 
🤕 दिल्ली में रेबीज से 20,000 लोग मरने की बात बोली जा रही है, और अभी भी बच्चों में इस बीमारी को कमजोर किया जा रहा है! 👶
 
रेबीज को अब नोटिफायबल डिजीज घोषित करने से हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द मरीजों का इलाज हो पाएगा। इससे रेबीज से जुड़े मामलों पर नजर रखी जा सकेगी और मौतों की संख्या कम होगी। दिल्ली सरकार ने बहुत अच्छा फैसला लिया है और अब तुरंत इलाज होने का मौका भी मरीजों को मिल पाएगा।
 
अगर दिल्ली सरकार ने रेबीज को अब नोटिफायबल डिजीज घोषित कर दिया है तो यह बहुत अच्छी बात है। 🙌

रेबीज से जूझते लोगों के इलाज में तेजी और समय पर नजर रखने से उनकी जान बचाई जा सकती है, तो दिल्ली सरकार ने बहुत अच्छा फैसला किया है। 💡

और अगर हम बात करते हैं तो रेबीज एक बहुत बड़ी समस्या है और भारत में इससे हर साल 20,000 लोगों की जान जाती है, तो हमें इसे समझने की जरूरत है कि यह एक वायरल इन्फेक्शन है। 🚨

और अगर हम बच्चों के काटने पर ध्यान देते हैं तो हमें समझने की जरूरत है कि बच्चों के काटने के मामले अक्सर रिपोर्ट नहीं किए जाते हैं, लेकिन अगर हम उन्हें भी सावधानी से देखें, तो उनकी जान बचाई जा सकती है। 👦
 
रेबीज को अब नोटिफायबल डिजीज घोषित करने से अच्छा माना गया, लेकिन अभी भी 60% रिपोर्ट किए गए मामले और मौतें बच्चों की ही, क्या सरकार ने ऐसे मामलों पर ध्यान देने के लिए कोई विशेष योजना बनाई है? 🤔

रेबीज एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है, और इसके लक्षणों में सबसे पहले चुभन और खुजली महसूस होती है, लेकिन अगर सही समय पर इलाज न मिले, तो व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है। 💉

अब दिल्ली सरकार ने रेबीज के मामलों पर नजर रखी जाएगी, लेकिन अभी भी रिपोर्ट किए गए मामले और मौतें बहुत अधिक हैं, क्या सरकार ने ऐसे मामलों पर ध्यान देने के लिए कोई विशेष योजना बनाई है? 🤷‍♀️

रेबीज से होने वाली एक भी मौत स्वीकार नहीं है, और यह फैसला समय पर इलाज और निगरानी में मदद करेगा। 🙏
 
मुझे लगता है कि ये फैसला बहुत जरूरी है। अब हमें रेबीज को समय पर पहचानने में मदद मिलेगी, और इससे बच्चों की मौतों में कमी आएगी। लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी अस्पतालों और डॉक्टरों को रेबीज के लक्षणों के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि वे समय पर इलाज कर सकें।
 
Back
Top