दिल्ली सरकार ने ह्यूमन रेबीज को अब नोटिफायबल डिजीज घोषित कर दिया है, जिसका मतलब है कि संदिग्ध और कंफर्म केस आने पर उसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा। इस फैसले से रेबीज के मामलों पर समय रहते नजर रखी जा सकेगी, और मरीज के इलाज में देरी नहीं होगी। अब दिल्ली के सभी सरकारी-निजी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और निजी डॉक्टरों को ऐसे मामलों की तुरंत रिपोर्ट करनी होगी।
रेबीज से होने वाली एक भी मौत स्वीकार नहीं है, और यह फैसला समय पर इलाज और निगरानी में मदद करेगा। इस आदेश के तहत, रेबीज के 49 केस सामने आए हैं, जिनमें से डॉग बाइट के 35 हजार मामले दर्ज किए गए हैं। दिल्ली सरकार ने यह भी तैयारी की है कि अगर कोई रेबीज का संदिग्ध और कंफर्म केस आता है, तो उसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी।
भारत में रिपोर्ट किए गए 60% रेबीज के मामले और मौतें 15 साल से कम उम्र के बच्चों की होती हैं, क्योंकि बच्चों के काटने के मामले अक्सर रिपोर्ट नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल दुनिया में रेबीज के कारण करीब 59,000 लोगों की मौत होती है, और भारत में इससे हर साल 20,000 लोगों की जान जाती है।
रेबीज एक वायरल इन्फेक्शन है, जो आमतौर पर कुत्ते, बिल्ली और बंदर के काटने से होता है। यह संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या उसकी लार के किसी खुले जख्म के संपर्क में आने से इंसानों में फैल सकता है। रेबीज वायरस इंसान के ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर हमला करता है, अगर सही समय पर इलाज न मिले तो व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है।
रेबीज के लक्षणों में सबसे पहले काटने वाली जगह के आसपास चुभन और खुजली महसूस होती है, व्यक्ति को तेज बुखार और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। रेबीज वायरस धीरे-धीरे नसों के जरिए ब्रेन तक पहुंचता है, और इसके बाद के सभी लक्षण ब्रेन से जुड़े होते हैं।
रेबीज से होने वाली एक भी मौत स्वीकार नहीं है, और यह फैसला समय पर इलाज और निगरानी में मदद करेगा। इस आदेश के तहत, रेबीज के 49 केस सामने आए हैं, जिनमें से डॉग बाइट के 35 हजार मामले दर्ज किए गए हैं। दिल्ली सरकार ने यह भी तैयारी की है कि अगर कोई रेबीज का संदिग्ध और कंफर्म केस आता है, तो उसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी।
भारत में रिपोर्ट किए गए 60% रेबीज के मामले और मौतें 15 साल से कम उम्र के बच्चों की होती हैं, क्योंकि बच्चों के काटने के मामले अक्सर रिपोर्ट नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल दुनिया में रेबीज के कारण करीब 59,000 लोगों की मौत होती है, और भारत में इससे हर साल 20,000 लोगों की जान जाती है।
रेबीज एक वायरल इन्फेक्शन है, जो आमतौर पर कुत्ते, बिल्ली और बंदर के काटने से होता है। यह संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या उसकी लार के किसी खुले जख्म के संपर्क में आने से इंसानों में फैल सकता है। रेबीज वायरस इंसान के ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर हमला करता है, अगर सही समय पर इलाज न मिले तो व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है।
रेबीज के लक्षणों में सबसे पहले काटने वाली जगह के आसपास चुभन और खुजली महसूस होती है, व्यक्ति को तेज बुखार और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। रेबीज वायरस धीरे-धीरे नसों के जरिए ब्रेन तक पहुंचता है, और इसके बाद के सभी लक्षण ब्रेन से जुड़े होते हैं।