दिल्ली में जहां पत्थरबाजी, मस्जिद के पास उसके कागज नहीं: 113 साल पुराने पेपर गायब, मस्जिद कमेटी बोली- शायद वक्फ के पास होंगे

इस घटना में, दिल्ली पुलिस ने फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास कार्रवाई की, जिसमें 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। घटना के बाद कई लोगों ने कहा कि उन्हें पत्थर फेंके गए थे, और कई लोगों ने घटना पर विरोध किया।

मस्जिद की जमीन सुरक्षित है, जैसे कि डिप्टी कमिश्नर ने बताया। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में कोई लापरवाही नहीं थी, और घटना को रोकने के लिए कार्रवाई की गई थी।

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने घटनास्थल पर पूछताछ की है, और कहा है कि अतिक्रमण के नाम पर ज़ुल्म किया गया है। उन्होंने कहा है कि लोग इस तरह की घटनाओं से नहीं बच सकते, अगर उनके अधिकारों की रक्षा नहीं की जाती।

इस घटना ने दिल्ली में मस्जिद और अन्य धार्मिक स्थलों को प्रभावित किया है, और कई लोगों ने कहा है कि उन्हें यह घटना बहुत परेशान करती है।
 
आपको यह बात पसंद आएगी, मस्जिदों की रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं! 😊 पुलिस ने सही काम किया है, फिर भी ऐसी घटनाएं होना नहीं चाहिए। दिल्ली में मस्जिदों की सुरक्षा को लेकर बहुत परेशान होने वाला यह तो ठीक है... लेकिन इसके पीछे क्या कारण हैं? 🤔
 
अरे भाई, तो इस घटना में मस्जिद की जमीन सुरक्षित होने की बात कहीं कोई विरोध नहीं कर रहा 🙏, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस ने सही तरीके से कार्रवाई की? क्या उन्होंने देखा था कि लोग मस्जिद के आसपास बैठकर गीत गा रहे थे, तो फिर इतनी जोरदार कार्रवाई क्यों की गई? 🤔
 
बात बन गई तो फैज-ए-इलाही मस्जिद में क्या घट रहा है... पुलिस ने कार्रवाई की, लेकिन क्या वास्तव में उन्होंने इस जगह पर अधिकार की रक्षा की या नहीं? कुछ लोग कहते हैं कि पत्थर फेंके गए थे, लेकिन यह तो साफ़ नहीं है... और पुलिस ने कहा है कि इस मामले में कोई लापरवाही नहीं थी, लेकिन यहाँ पर बहुत बड़ा सवाल उठता है - क्या वास्तव में उन्होंने अतिक्रमण को रोकने की कोशिश की या नहीं?
 
मैंने फैज-ए-इलाही मस्जिद की तस्वीर देखी है और लगता है कि यहाँ कुछ गलत हो रहा है। पुलिस ने कहा है कि कार्रवाई की गई थी, लेकिन मुझे लगता है कि इसके पीछे कोई ठोस सबूत नहीं हैं। क्या वास्तव में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, या यह सिर्फ एक पूर्वाग्रह की बात है?
 
मुझे तो ये बहुत दुखद है कि एक ऐसी जगह जैसे फैज-ए-इलाही मस्जिद पर गैरकानूनी रूप से हमला हुआ। 🤕 मेरी बात है तो हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे सभी धार्मिक स्थलों और समुदायों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए, और उनकी रक्षा की जाए। 🙏 मुझे लगता है कि सरकार और पुलिस ने सही कदम उठाए हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हमारी सामूहिकता और एकता पर भरोसा करें। 💪
 
[संतृप्त चेहऱा]

कोई मस्जिद विरोध नहीं कर सकता, तो क्यों विरोध कर रहा है? [विवादास्पद विरोधी](https://i.imgur.com/L9yYBjL.png)

[पत्थर फेंकने वालों का एक संयुक्त चित्र]

कुछ लोग पत्थर फें्कते हैं, तो दूसरे लोग पत्थर मारने में असमर्थ हैं [मूर्ख](https://i.imgur.com/Dh1wBjL.png)

[सुरक्षा की एक निशानी]

कोई भी घटना से पहले सुरक्षा की जांच कर लेता, तो क्यों विरोध करते हैं? [बुद्धिमत्ता](https://i.imgur.com/W1yYBjL.png)

[सुरक्षित जमीन की एक निशानी]

कोई भी मस्जिद की जमीन पर अपना दावा नहीं कर सकता, तो क्यों विरोध करते हैं? [अधिकार](https://i.imgur.com/NyYBjL.png)

[समाज में शांति की एक निशानी]

शांति और सौहार्द को बनाए रखना ही सबसे बड़ा अधिकार है, तो क्यों विरोध करते हैं? [सौहार्द](https://i.imgur.com/M1yYBjL.png)
 
बस, ये तो दिल्ली में एक बार फिर से हिंसा का माहौल बन गया है। 🤯 पुलिस ने मस्जिद के आसपास कार्रवाई की, लेकिन यह सवाल उठता है कि ये क्यों हुआ? क्या वे लोग बस इसलिए ही धमकी देने आये, क्योंकि उनको पता नहीं था कि मस्जिद पर मुस्लिम समुदाय का यहां बहुत ज्यादा प्रभाव है। 🤔

मस्जिद की जमीन सुरक्षित है, लेकिन अगर हमें अपने पड़ोसियों को समझने और उनके साथ सहानुभूति रखने की जरूरत है, तो यह घटना नहीं होती। 👫 इसके अलावा, सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने बात की है और कहा है कि अतिक्रमण के नाम पर ज़ुल्म किया गया है। मुझे लगता है कि उन्होंने बोली है, लेकिन इस तरह की घटनाओं से हमारे समाज को खेलने का तंत्र होता है। 🎲
 
मुझे लगता है कि पुलिस की कार्रवाई से पहले क्या चेक किया गया था? 🤔 कोई गुंडागर्दी नहीं होने देना चाहिए, लेकिन यहां तो पत्थर फेंकने वालों को पकड़ने में भी बेअमली हुई। और नदवी जी सांसद ने कहा कि अतिक्रमण के नाम पर ज़ुल्म किया गया है, लेकिन पुलिस को यह बताना चाहिए कि कौन से लोग मस्जिद के आसपास विरोध कर रहे थे, और क्या उनकी हरकतें वैध थीं।
 
मैंने देखा कि अगर ऐसे मामले नहीं होते, तो फैज-ए-इलाही मस्जिद सुरक्षित होने लगे होगा। लेकिन अगर पुलिस ने पहले से ही जमीन को सुरक्षित कर दिया था, तो यह घटना कहाँ से घटी? यह जानने की जरूरत है कि कौनसे लोग इस तरह की घटनाओं में शामिल थे।
 
भाई, यह तो दिल्ली में हिंसा फैलने की राह ही खुल गई। पुलिस की भारी कार्रवाई से क्या अच्छा होगा, ज़बरदस्ती से जमीन पर कब्जा करने को कोई दूसरी जगह कहाँ जा सकता है? मस्जिद की जमीन सुरक्षित है, लेकिन यह तो पुलिस की राह में आने वाले लोगों की नाक लगाने का मतलब है।
 
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