देश में 5.50 करोड़ केस कोर्ट में पेंडिंग: इनमें से 90 हजार सुप्रीम कोर्ट में, 25 हाई कोर्ट में 63 लाख मामले लंबित

मेरी राय है कि उत्तर प्रदेश में इतने बड़े केस चलाना व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और मनोबल को कैसे प्रभावित करेगा, यह बिल्कुल सोच-समझकर नहीं किया गया है। अगर सरकार ज़रूरत में लंबित मामलों को तुरंत हल करने की कोशिश करती है, तो शायद न्यायिक प्रणाली भी और जल्दी से जल्दी हल होने वाले मामलों पर ध्यान देने लगेगी। इससे यह समस्या कम होगी, लेकिन सरकार को बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की स्थापना करने पर भी पैसे खर्च करने होंगे, जिससे मामले चलाने वाले वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को भी फ़ायदा होगा।
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! 35 करोड़ केस जारी करने से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के बाहर घंटों खड़े रहना पड़ता है। मैंने देखा है कि मेरे दोस्तों को भी बहुत परेशानी होती है, वे अपने मामले की जानकारी नहीं पा सकते। सरकार ने लंबित मामलों को सुलझाने के लिए संकल्प लिया तो अच्छा होगा, अब ये मामले जल्द से जल्द सुलझाए जाएं। इससे हमारी शिक्षा जैसे व्यवस्थित काम करने वाली संस्थाओं की कार्यवाही भी सुचारू रूप से चलेगी। 📚💼
 
देखिए, ये जानकारी बहुत ही घब्राईकार है 🤔 उत्तर प्रदेश में 35 करोड़ केस, अरे भाई यह तो संख्या बड़ी जैसे कि बाजार में गोल्ड की बरसात हुई है! लेकिन सारी क्राइम रिपोर्ट्स में ये एक जरूरी बात है, सरकार ने लंबित मामलों को दूर करने पर संकल्प लिया है, जो बहुत ही अच्छी खबर है 🙌

मुझे लगता है कि सरकार की इस पहल से ये समस्या कुछ समय में हल हो सकती है, लेकिन अभी भी यह सवाल उठता है कि इन 35 करोड़ केसों में से कौन से मामले वास्तव में जांच से जुड़े हुए हैं? और सरकार द्वारा लंबित मामलों को दूर करने की योजना में शामिल क्या महत्वपूर्ण पहलें हैं? इन सवालों के जवाब तकनीकी मदद नहीं करेगी, हमें सिर्फ जांच-पrouch देखना होगा 🕵️‍♂️

लेकिन अगर सरकार अपनी पहल को सफलतापूर्वक लागू करने में सक्षम होती है, तो यह उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी राहत की बात होगी।
 
मुझे ये बात दिलचस्प लगती है कि उत्तर प्रदेश में इतने ज्यादा केस जारी हैं 🤔। 35 करोड़ केस! यह तो एक बड़ी चुनौती है ना। मुझे लगता है कि सरकार की इस संकल्पना से लंबित मामलों को दूर करने में मदद मिलेगी। 90 हजार सुप्रीम कोर्ट और 25 हाई कोर्ट में 63 लाख मामले लंबित! यह तो एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। सरकार की इस पहल से न्याय प्रणाली में बदलाव आ सकता है और न्यायपालिका की गतिविधियों में सुधार हो सकता है। लेकिन इसके लिए हमें अभी भी बहुत अधिक समय देना पड़ेगा। मुझे उम्मीद है कि सरकार की इस पहल से न्याय प्रणाली में सुधार होगा और लंबित मामलों को जल्द से जल्द सुलझाया जाएगा।
 
उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेटिक समस्याएं ही नहीं रुकेंगी, इसके साथ ही अपने खिलाफ 35 करोड़ केस भी जारी हैं। सरकार को ये तय करना होगा कि लंबित मामलों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाने हैं, परंतु कुछ प्रशासनिक स्तर पर नियमों की बूढ़ाई जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।
 
अगर 35 करोड़ केस जारी है तो क्या हमारी युवा पीढ़ी किस चीज़ के लिए इतने मामले लंबित करना चाहती है? 😕 मेरे अनुसार, यह देखकर दुख होता है कि 63 लाख मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं। यह तो हमारे समय में नहीं था, जब हम युवा थे। तो हमारे पास इतने विकल्प नहीं थे, लेकिन आजकल की युवा पीढ़ी को ऐसे विकल्पों से भरपूर मिल रहे हैं और भी खूबसूरत।

अब सरकार ने कहा है कि लंबित मामलों को दूर करने पर संकल्प लिया है। यह अच्छा है, लेकिन अभी पहले जितने मामले थे उन्हें भी हल करने का समय लगेगा, तो हमारी उम्मीदें कम न करें।
 
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