देश में 5 ब्लास्ट करने वाला भी अल–फलाह का स्टूडेंट: 2007 में बीटेक किया, उसी साल गोरखपुर में धमाका, अब तक फरार

दिल्ली में हुए ब्लास्ट की जांच में अल फलाह यूनिवर्सिटी से संबंधित एक और खुलासा आया है। इस खुलासे से पता चलता है कि यह यूनिवर्सिटी का छात्र, मिर्जा शादाब बेग, देश में 5 बार ब्लास्ट करने वाले आतंकी मिर्जा शादाब बेग भी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से ही संबंधित था।

इस खुलासे से पता चलता है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र, मिर्जा शादाब बेग ने 2007 में इसी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। यही यूनिवर्सिटी दिल्ली में हुए ब्लास्ट के साथ संबंधित भी है, जिसमें 10 नवंबर को लाल किला पर ब्लास्ट हुआ था।

इस घटना से पहले भी कई अन्य आतंकी धमाकों में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से संबंधित छात्र शामिल रहे हैं। इन सभी घटनाओं की जांच एजेंसियों ने की है और अब उन्होंने यह भी पाया है कि इस यूनिवर्सिटी से संबंधित कई अन्य छात्र आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे।

इस खुलासे से पता चलता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए झूठे दावे किए हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी यूनिवर्सिटी को सरकारी मान्यता मिली है, जो बिल्कुल सही नहीं है।

इस खुलासे से पता चलता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र, मिर्जा शादाब बेग ने कई आतंकी धमाकों में भाग लिया था। इन सभी घटनाओं की जांच एजेंसियों ने की है और अब उन्होंने यह भी पाया है कि इस यूनिवर्सिटी से संबंधित कई अन्य छात्र आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे।

इस खुलासे से पता चलता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी को उसकी गुणवत्ता और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कड़ी सजा की जानी चाहिए। उन्हें अपनी सच्चाई बतानी चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए।

इस खुलासे से पता चलता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र, मिर्जा शादाब बेग ने कई आतंकी धमाकों में भाग लिया था। इन सभी घटनाओं की जांच एजेंसियों ने की है और अब उन्होंने यह भी पाया है कि इस यूनिवर्सिटी से संबंधित कई अन्य छात्र आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे।

इस खुलासे से पता चलता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अपनी सच्चाई बतानी चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्हें अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए कड़ी सजा की जानी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह खुलासा सच्चा हो सकता है, लेकिन मैं नहीं कह सकता कि यह विशेष रूप से सच्चा है। मिर्जा शादाब बेग की गिरफ्तारी और आतंकवादी गतिविधियों में उसकी भागीदारी की जांच करना बहुत जरूरी है, लेकिन मुझे लगता है कि यह जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए कड़ी सजा देना सही है, लेकिन मैं नहीं कह सकता कि यह सजा उचित रूप से दी गई है।

मुझे लगता है कि इस खुलासे से पता चलता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए झूठे दावे किए हैं, लेकिन मैं नहीं कह सकता कि यह पूरी तरह से सच्चा है। मिर्जा शादाब बेग की गिरफ्तारी और आतंकवादी गतिविधियों में उसकी भागीदारी की जांच करना बहुत जरूरी है, लेकिन मुझे लगता है कि यह जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है।

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मेरे दोस्त, यह तो बहुत बड़ा झटका है अल-फलाह यूनिवर्सिटी के लिए। उनकी गुणवत्ता और प्रतिष्ठा ऐसे स्तर पर नहीं थी जैसे उन्होंने कहा था। यह तो एक बड़ा मामला है और जरूरी है कि उन्हें अपनी सच्चाई बतानी चाहिए। उनके छात्रों को भी इस तरह के व्यवहार से बचने की कोशिश करनी चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी यूनिवर्सिटियां नहीं बनती जो झूठे दावे करती हैं और अपनी सच्चाई छुपाने की कोशिश करती हैं।
 
🤔 यह बहुत बड़ा झटका है दिल्ली में हुए ब्लास्ट के साथ अल-फलाह यूनिवर्सिटी से संबंधित खुलासे। लेकिन अगर हम इस पर ध्यान रखें तो यह भी एक अच्छी चीज़ है कि एजेंसियों ने अब यह जांच पूरी कर ली है और यूनिवर्सिटी के छात्र, मिर्जा शादाब बेग की सच्चाई बताई है। इससे हमें पता चलता है कि यूनिवर्सिटी ने अपनी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए झूठे दावे किए थे, लेकिन अब वे अपनी सच्चाई बताने के लिए मजबूर हैं। 🙏

इस तरह से हमें यह भी पता चलता है कि अगर हम जो बातें करते हैं उनका मूल्य विचार करना और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगना तो हम अपने देश को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं। 🌟
 
ये तो बहुत बड़ी बात है 🤯, अल-फलाह यूनिवर्सिटी से देश में कई आतंकी धमाकों के पीछे एक छात्र होना कैसे हो सकता है? यह तो बहुत गंभीर मुद्दा है और इसके लिए कड़ी सजा चाहिए। यूनिवर्सिटी ने अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए झूठे दावे किए हैं, जो अब उनकी सच्चाई साबित हुई है।
 
मुझे लगता है कि यह खुलासा साबित करता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी सच्चाई छिपाने और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए झूठ बोले हैं। अगर वे कह रहे थे कि उनकी यूनिवर्सिटी को सरकारी मान्यता मिली है, तो यह साबित करता है कि वे सच नहीं कह रहे हैं! और अगर अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र, मिर्जा शादाब बेग ने कई आतंकी धमाकों में भाग लिया था, तो यह साबित करता है कि उन्होंने अपने भविष्य के लिए गलत रास्ता चुना है। 🤕
 
अरे ये तो बहुत बड़ा झगड़ा है। अगर अल-फलाह यूनिवर्सिटी से निकलने वालों में से एक भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था तो इसका मतलब यह है कि यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा पूरी तरह से खराब है। इसके लिए जरूर कड़ी सजा की जानी चाहिए।
 
बस मानसिक स्वास्थ्य की बात करें तो यह अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बहुत ही गड़बड़ी की है। इन्होंने अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए झूठ बोले हैं और अब उनकी सच्चाई सामने आई है। यह तो सरकार की दूरदर्शिता और एजेंसियों की जांच की बड़ी सफलता है कि उन्होंने खुलासे किए हैं। लेकिन फिर भी, मेरे दिल में एक सवाल है कि यह सब कैसे हुआ? क्या इन छात्रों को अच्छी शिक्षा नहीं मिली थी? क्या उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में लाने वाले लोगों से मिलने का मौका नहीं मिला था।
 
यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी सच्चाई छुपाई और झूठे दावे किए। यह तो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल छात्रों के लिए एक अच्छा उदाहरण नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए बुरा है।
 
अरे, यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में से छात्रों ने इतने खतरनाक काम किया है। अगर उनकी गुणवत्ता और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कड़ी सजा नहीं दी जाती तो यह समस्या खत्म नहीं होगी।

मुझे लगता है कि सरकार और एजेंसियों ने बहुत अच्छा काम किया है, उन्होंने इन छात्रों की गतिविधियों की जांच कर ली है और अब उनको सजा मिलनी चाहिए।

लेकिन, अगर हम इस समस्या से निपटने के लिए एक अच्छा रास्ता ढूंढ सकते हैं तो फिर यह बहुत अच्छा होगा। हमें अपने युवाओं को जागरूक करना चाहिए और उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल न होने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

किसी भी देश में सफलता के लिए एकजुटता और सहयोग बहुत जरूरी है। हमें अपने युवाओं को उनके भविष्य के लिए अच्छा रास्ता ढूंढने में मदद करनी चाहिए।

मुझे लगता है कि अगर हम एकजुटता और सहयोग से इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं तो फिर हम अपने देश को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।
 
जो भी होता है मेरा दिल खुश रहता है, हमेशा खुशियों से भरा रहना चाहिए, जैसे अच्छा छात्र होना अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र के लिए जरूरी है, लेकिन यही गलतियाँ हुए और अब उन्हें अपनी सच्चाई बतानी होगी। मुझे लगता है कि अगर हम सभी एक दूसरे की मदद करते हैं और सही रास्ते पर चलने की कोशिश करते हैं तो हम सबको अच्छा जीवन मिलेगा।
 
मैंने याद किया है जब दिल्ली में पहली बार साउदी अरब के छात्रों ने आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की बात कही थी। उस समय भी यह सब एक बड़ा चिंता का विषय था। लेकिन अब तो यह साबित होता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्रों में भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की बात सच है।

मुझे लगता है कि यह खुलासा एक बड़ा सबक सीखने का अवसर है। हमें अपने देश को और भी सुरक्षित बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अपनी सच्चाई बतानी चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए।

मैंने पिछले दिनों एक वीडियो देखा था, जिसमें एक सेना अधिकारी ने कहा था कि आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए हमें अपने युवाओं को शिक्षित करने और उन्हें अपने देश के प्रति गर्व महसूस कराने की जरूरत है।

मुझे लगता है कि यह खुलासा एक बड़ा सबक सीखने का अवसर है। हमें अपने देश को और भी सुरक्षित बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। 🤔
 
अरे, यह तो बहुत ही खेदनीय बात है… अल-फलाह यूनिवर्सिटी को ऐसा झूठा दावा करना और अपनी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए झूठ बोलते रहना। मैंने भी अपने बचपन के दिनों से सुना है कि अगर कोई छात्र अच्छी पढ़ाई करता है, तो वो अपना भविष्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत करेगा, न कि झूठ बोलकर अपना ख्याल दिखाएगा।

जैसे की मेरी यादें हैं मेरे बचपन के दिनों में, हमारे शिक्षक जी अच्छे-अच्छे पढ़ाई करते थे, लेकिन वो अपनी पढ़ाई का ध्यान अपने छात्रों पर रखते थे। वो हमेशा अपने छात्रों की मदद करते थे और उनकी बुराई करने की नहीं।

अब तो यह देखकर हैरानी है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने ऐसा झूठा दावा किया है। वो अपनी सच्चाई बतानी चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
 
अरे, तो यह यूनिवर्सिटी खुलकर झूठ बोल रही थी, अब सब पता चल गया। मेरे पुतले थोड़े समझ गए होंगे कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जो छात्र आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे, वे बिल्कुल भी अच्छे नतीजे देते हैं।
 
मुझे लगता है कि यह खुलासा सच्चाई से भरपूर है। मैं समझता हूं कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए झूठे दावे किए हैं।

मुझे लगता है कि सरकार को इस यूनिवर्सिटी पर कड़ी नज़र रखी जानी चाहिए और उन्हें अपनी सच्चाई बताने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए। यहाँ कुछ छात्रों के पास शिक्षा मिलती है जो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होते हैं।

मैं उम्मीद करता हूं कि एजेंसियां इस खुलासे से विश्वासपात्र होंगी और अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर आगे की जांच करेंगी।
 
वाह बोले दो ये खुलासा, अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र ने आतंकी गतिविधियों में शामिकी ली है और उनकी गुणवत्ता बहुत खराब है। यह जानकर कुछ नहीं चलेगा, अगर ऐसा होने की बात सच है तो यूनिवर्सिटी को पूरी तरह से बदनाम करना चाहिए।
 
अरे, यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी सच्चाई छुपाने की कोशिश की है। अगर वे अपनी गुणवत्ता बढ़ाना चाहते हैं और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी सच्चाई बतानी चाहिए।

मुझे लगता है कि यूनिवर्सिटी को कड़ी सजा की जानी चाहिए, खासकर जब उनके छात्रों ने कई आतंकवादी धमाकों में भाग लिया है। यह बहुत ही खतरनाक है और हमें इसके बारे में सावधान रहना चाहिए।

लेकिन, अगर यूनिवर्सिटी अपनी सच्चाई बताती है और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगती है, तो शायद हम उनकी गुणवत्ता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। लेकिन, यह जरूरी है कि उन्हें कड़ी सजा का सामना करना पड़े।

मुझे लगता है कि सरकार ने इस मामले में कुछ जानकारी देनी चाहिए, ताकि हम सब जानते हों कि यह वास्तव में कहाँ तक पहुँच गया है।
 
यह तो बहुत बड़ी बात है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी से संबंधित छात्र आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे। और यह भी सच है कि उन्होंने अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए झूठे दावे किए हैं। इसके लिए उनको कड़ी सजा की जानी चाहिए। 🤦‍♂️
 
अरे, यह तो बिल्कुल सही नहीं है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने झूठे दावे किए हैं और सरकारी मान्यता प्राप्त करने की कोशिश की है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम उन्हें पूरी तरह से छोड़ सकते हैं। उन्हें अपनी सच्चाई बतानी चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए।

यह तो एक बड़ा सबक है कि हमें अपने आसपास की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए कड़ी सजा की जानी चाहिए। अगर हम ध्यान नहीं देते हैं और अपने आप को बुरा समझते हैं, तो हमें बहुत बड़े नुकसान होने से बचने के लिए कड़ी सजा की जानी चाहिए।

मुझे लगता है कि इस खुलासे से हमें एक नई दिशा में जाने का मौका मिल गया है। हमें अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। 🤔👍
 
अगर अल फलाह यूनिवर्सिटी को सच्चाई बताने में खेद है तो अच्छी बात है! 🤔

लेकिन जब यह बताया गया है कि उन्होंने झूठे दावे किए और सरकारी मान्यता प्राप्त करने के लिए कोशिश की तो क्या सच्चाई नहीं बतानी चाहिए? 😐

और जब यह पता चला है कि उनके छात्रों ने कई आतंकवादी धमाकों में भाग लिया था तो उन्हें कड़ी सजा देनी चाहिए। 🚫

अगर अल फलाह यूनिवर्सिटी अपनी सच्चाई बताने के लिए तैयार है और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगने के लिए तैयार है तो अच्छा होगा। 🙏

लेकिन अगर उन्हें पता नहीं है कि वे क्या कर रहे हैं और उनकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कड़ी सजा देनी चाहिए तो उन्हें मदद की जानी चाहिए। 🤝

किसी भी स्थिति में सच्चाई बताना और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगना सबसे अच्छा है। 💯
 
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