देश में 5 ब्लास्ट करने वाला भी अल–फलाह का स्टूडेंट: 2007 में बीटेक किया, उसी साल गोरखपुर में धमाका, अब तक फरार

अरे, यह तो बहुत दुखद है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छात्रों ने ऐसी गलतियां की हैं। यहां तक कि मिर्जा शादाब बेग जैसे व्यक्ति भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे। इसका मतलब है कि यूनिवर्सिटी ने अपनी शिक्षा को ऐसे तरीके से नहीं दिया था जिससे छात्र गलतियां न करें।

मुझे लगता है कि सरकार और एजेंसियों को इस पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं फिर से न हों। अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अपनी सच्चाई बतानी चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए।

यह भी सवाल उठता है कि यूनिवर्सिटी ने इतने समय से ऐसी गलतियां क्यों नहीं रोकी। इसका मतलब है कि उन्हें अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए बहुत बड़ी सजा देनी चाहिए।
 
अगर यह सच है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी से संबंधित कई छात्र आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे, तो यह बहुत बड़ा सवाल है। क्या हमारे देश के शिक्षा प्रणाली में ऐसे विद्यालय होने चाहिए जो आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देते हैं?

मुझे लगता है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी गुणवत्ता बढ़ाने और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए झूठे दावे किए हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी यूनिवर्सिटी को सरकारी मान्यता मिली है, जो बिल्कुल सही नहीं है।

मैं सोचता हूँ कि इस खुलासे से हमें अपने देश की शिक्षा प्रणाली पर और अधिक नज़र रखनी चाहिए। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे विद्यालय नहीं होने दिए जाएं जो आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देते हैं।

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