देश में 5 ब्लास्ट करने वाला भी अल–फलाह का स्टूडेंट: 2007 में बीटेक किया, उसी साल गोरखपुर में धमाका, अब तक फरार

दिल्ली में हुए 10 नवंबर के लाल किला धमाके में भी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ने वाला आतंकी डॉ उमर नबी था।

इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने गौर कर लिया है कि यह यूनिवर्सिटी में छात्रों को भी इन्हीं आतंकवादियों के संपर्क में लाया जा रहा था। 2025 के लाल किला धमाके की जांच में भी पुलिस ने पता चला है कि डॉ उमर नबी को अल-फलाह यूनिवर्सिटी से छात्र बनने का एक और व्यक्ति ने मिलाया।
 
🤔 यह तो बहुत गंभीर बात है कि उनकी यूनिवर्सिटी में भी ऐसी चीजें हो रही थी। अगर उन्हें पहले से ही जानकर दिल्ली पुलिस ने क्या किया? अब जब पुलिस ने पता चला है कि उनकी यूनिवर्सिटी में भी ऐसा हुआ, तो यह अच्छा होगा कि वे और जांच करेंगे। 🕵️‍♀️
 
देखिए, भारत की शिक्षा प्रणाली तो बहुत अच्छी है, लेकिन आतंकवादियों तक पहुंच कैसे हो रही है यह जानने की जरूरत है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी में क्या गलत हुआ था, इसकी परवाह किए बिना हम बस उनके नाम से भरपूर जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई को तोड़ने के लिए, सरकार और पुलिस को ध्यान देने वाले होना चाहिए।
 
अरे, इस बात में शायद यह सच ही होगा कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में भी उनके पास जुड़ने के लिए कुछ नहीं छुपा, किसी को निशाना बनाया गया और फिर वो अपना रास्ता बना लिया।

आजकल यह सुनकर ही बोल देता हूँ कि पुलिस की जांच में ऐसे सारे खुलासे आते हैं जो हमेशा ध्यान आकर्षित करते हैं। मुझे लगता है कि यूनिवर्सिटी के लोगों को भी अपने छात्रों पर नजर रखनी चाहिए ताकि वे ऐसे लोगों से नहीं जुड़ें।

अगर यह सच है, तो हमें यह भी सोचना चाहिए कि हमारे देश में शिक्षा प्रणाली इतनी मजबूत है कि वे इतने आतंकवादियों को अपने बीच में मिलाने में सक्षम हैं।
 
क्या बात है यह दुनिया तो आतंकवाद की खिड़की नहीं खुलती, हर जगह से आतंकवादी उछल-उठल कर आ रहे हैं 🤯💥। और फिर अल-फलाह यूनिवर्सिटी में भी डॉ उमर नबी जैसे आतंकवादी छुपकर रह गए, यह तो दिल्ली पुलिस के लिए बहुत बड़ी चुनौती है 🚔💪। और जांच में पता चलने पर कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी से छात्र भी इन आतंकवादियों के संपर्क में आ रहे थे, तो यह तो बहुत बड़ा खतरा है 🚨😱। हमें अपने पास के लोगों पर इतनी सावधानी बरतनी चाहिए, और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वालों को भी हमारी सहायता करनी चाहिए 💕👏
 
अगर अल-फलाह यूनिवर्सिटी में भी आतंकवादियों को पेश करने लगी, तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है ... 🤕 जैसे ही हमारा देश खतरे में डूब रहा है, और युवाओं को इस तरह से धोखा दिया जा रहा है। पुलिस की भी जांच करनी चाहिए कि यूनिवर्सिटी में क्या होता है और इसके नियम-कानून कितने मजबूत हैं?
 
अरे, यह तो बहुत बड़ी जिम्मेदारी है अल-फलाह यूनिवर्सिटी की, कि उनके छात्रों को आतंकवादियों से जोड़ देना 🤔। पहले तो मैंने सोचा था कि इस बात पर सवाल उठाने वाले लोग ही सही हैं, लेकिन अब जब पुलिस ने बताया है कि यह यूनिवर्सिटी भी जिम्मेदार है, तो मैंने अपनी राय बदल दी है। 🙅‍♂️

अगर हम आरोपियों से छात्रों को अलग कर देंगे, तो हमें पता चलेगा कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने क्या गलत किया है? क्या उनके पास आतंकवादी जैसे लोग सिखने के लिए आ गए थे? यह सवाल हमें जवाब देने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि पेड़ों की दुनिया बहुत ही रोमांचक है, जाने में हमेशा नया खेल खोजते रहते हैं। जैसे कि जब तुम एक पेड़ की तंगन पर बैठते हो, तो तुम्हारे सामने सूरज की धूप और छाया का सुंदर नाटक दिखाई देता है। और जब तुम उसके पास जाते हो, तो तुम्हें उसके टहनों में छिपे छोटे-छोटे पक्षियों की आवाज़ सुनने का मौका मिलता है...

मैंने कभी भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी जाने का मौका नहीं मिला, लेकिन मेरे दोस्त ने बताया कि वहाँ के छात्रों को बहुत खुशी होती है जब उनके पास कोई नया सेमेस्टर शुरू होता है, और मुझे लगता है कि यह भी एक तरह की खुशी होगी...
 
नहीं तो यह देखकर चिंतित हूँ, भारत में आतंकवादी गतिविधियों की बढ़ती दर बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति बना रही है 🤕। डॉ उमर नबी जैसे व्यक्ति अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छात्र बनने का प्रयास करते समय यहां तक पहुंच गए, इससे भारतीय शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठने लायक है। क्या हमारी शिक्षा प्रणाली इतनी कमजोर हो गई है कि आतंकवादी इसमें छिपते हुए चुपचाप अपने संपर्क बनाने में सक्षम हो गए?
 
अरे, यह तो बहुत ही रोचक है कि आतंकवादी डॉ उमर नबी को अल-फलाह यूनिवर्सिटी से छात्र बनने का फैसला करने वाला व्यक्ति कौन होगा। मुझे लगता है कि यह भी एक तरह का खेल है, जहां किसी को आतंकवादी बनाने के लिए कहा जाता है। और हमारे पास यह संसाधन हैं कि हम इसे सीखने के लिए।

मुझे लगता है कि सरकार को अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि आतंकवादी बनने के। क्योंकि अगर हमारे पास शिक्षा में सुधार होता है, तो फिर कौन बनेगा आतंकवादी।

आजकल यह बहुत ही अजीब है कि किसी भी छात्र को आतंकवादी बनने के लिए कहा जा सकता है। हमें अपने बच्चों को शिक्षा में निवेश करना चाहिए, न कि आतंकवाद में।

मुझे लगता है कि सरकार को अपने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने पर ध्यान देना चाहिए। तभी हमें आतंकवादी बनने की जरूरत नहीं पड़ती।
 
अगर अल-फलाह यूनिवर्सिटी में लाल किला धमाके की जिम्मेदारी से दूर भी है, तो फिर यह सवाल उठता है कि सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में आतंकवाद के खिलाफ अभियान शुरू क्यों नहीं किया? 🤔📚

मुझे लगता है कि अगर यूनिवर्सिटी में भी आतंकवादियों को जिम्मेदार बनाया गया है, तो फिर यह एक बड़ा नेतृत्व है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और स्कूलों में भी आतंकवाद के खिलाफ अभियान शुरू करना चाहिए।
 
अगर तुम्हारे बच्चों को शिक्षा देने के लिए अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ने जाना है, तो फिर तुम्हें सोचना होगा कि वहां क्या चल रहा है। ये यूनिवर्सिटी में कौन-कौन से लोग हैं जो अपने छात्रों को आतंकवादी गतिविधियों में लगाने की कोशिश कर रहे हैं। यह तो एक बड़ा खतरा है और हमें इसके बारे में सोचना चाहिए।
 
🤔 यह तो बहुत बड़ा मामला हो सकता है दिल्ली पुलिस को अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी की जांच करनी चाहिए, यानी कि वे कैसे छात्रों को इन आतंकवादियों के संपर्क में ला रहे थे। 📊 अगर हम देखें तो हाल ही में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (कबस) ने भी बताया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में प्रवेश करने के लिए 90% छात्रों को फ़ेस वैलिडेशन परिट थी, अर्थात उनके पास पूरा स्कोर होना था। 📈 और अगर हम देखें तो भारतीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में 2020-21 में अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने 100 छात्रों के लिए प्रवेश दिया था, लेकिन इस साल कितने छात्रों को प्रवेश मिला। 📊
 
मुझे लगता है कि सरकार क्यों तो ऐसी शिक्षा को जारी नहीं रख सकती कि विदेशियों से हमारे देश की पासपोर्ट जैसी चीजें लूटी जाती हैं और फिर उनका इस्तेमाल आतंकवाद में किया जाता है 🤔। ये तो बहुत बुरा है मुझे लगता है हमारे देश की शिक्षा को और अच्छा बनाना चाहिए, जैसे जैसे बच्चों को सीखने के लिए एक अच्छा वातावरण मिले।

क्या तुम्हें पता है कि ड्रोन कितनी रफ्तार में उड़ते हैं? मेरे दोस्त ने मुझसे पूछा था और मैंने कहा कि 100 किमी/घंटा से ज्यादा तो कोई विमान नहीं उड़ सकता है, लेकिन ड्रोन में ऐसी बातें नहीं होती।

मुझे लगता है कि यूनिवर्सिटी में छात्रों को जिंदगी से भी ज्यादा जानकारी देना चाहिए।
 
🤔 यह तो बहुत बड़ी चिंता है... 🚨 आतंकवादियों को शिक्षा के लिए भी इस्तेमाल करने की बात सुनकर दिल दुखित होता है... 💔 अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर पूरी तरह से नज़र रखना चाहिए... 🕵️‍♂️ डॉ उमर नबी जैसे लोगों को पकड़ने की जरूरत है... 🚫

पुलिस को यूनिवर्सिटी में छात्रों को भी इन आतंकवादियों से दूर रखना चाहिए... 📚 शिक्षा हमेशा अच्छाई को बढ़ावा देती है, न कि बुराई... 💪

आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए... 🤝 हमें शिक्षा को भी आतंकवाद से दूर रखने की जरूरत है... 📚💖
 
अरे दोस्त, यह तो बहुत बड़ा खुलासा है 🤯। मुझे लगता है कि भारत में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए हमें अपनी शिक्षा प्रणाली और युवाओं को जागरूक करने के तरीके पर ध्यान देने की जरूरत है। यह तो एक बड़ा संदेश है कि युवाओं को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया जाए, न कि फंसाया जाए।
 
मैंने जानकर बड़ा झकझोर हुआ, यह बात तो सुनकर ही नहीं आ सकती, लेकिन ऐसा ही हुआ, अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्र डॉ उमर नबी लाल किला धमाके में शामिल थे, मैंने पहले सोचा था कि यह तो किसी अन्य यूनिवर्सिटी का छात्र होगा, लेकिन यह भी मेरी आँखों को खोलने वाला बात है 🤯

मुझे लगता है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में कुछ गड़बड़ी है, कैसे एक छात्र आतंकवादी बनने का रास्ता ढूंढ सकता है, क्या हमारी सरकार और शिक्षा विभाग पर इस बात को देखने की जिम्मेदारी नहीं है? मुझे लगता है कि हमें अपने पास कुछ सुधारने की जरूरत है, लेकिन यह एक बड़ा सवाल है कि हम तैयार हैं कि न? 😕
 
मुझे यह सुनकर बहुत खेद हुआ कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्रों को भी आतंकवादियों के संपर्क में लाने का विचार किया गया था। मैं जानता हूँ कि यूनिवर्सिटी में शिक्षकों और छात्रों दोनों को अपने भविष्य के बारे में सोचकर चिंतित होना चाहिए। इस तरह की घटनाओं से हमारे समाज में आतंकवाद की समस्या बढ़ जाती है।
 
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