‘डॉ. अंबेडकर न दलित, न उन्होंने संविधान बनाया’: कौन हैं बाबा साहेब को अंग्रेजों का एजेंट बताने वाले एडवोकेट अनिल मिश्रा

डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने पर हुआ विवाद, अनिल मिश्रा ने कहा, "उन्होंने संविधान निर्माता का दर्जा नहीं दिया। उन्होंने संविधान सभा में भाग लिया था, लेकिन संविधान बनाने वाले होने का कोई दावा नहीं।"

अंबेडकर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद अनिल मिश्रा ने कहा, "उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था। इसलिए उनके बारे में कुछ कहने पर मेरे ऊपर सीसीटी एक्ट नहीं लगता।"
 
डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने वालों को यह अच्छा सोचा जाए कि वे हमारे देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व का सम्मान कर रहे हैं। लेकिन अनिल मिश्रा की बातें तो समझने में आसान नहीं हैं 🤔। अगर उन्होंने संविधान निर्माता का दर्जा नहीं दिया तो फिर क्या कहा जाए? 🤷‍♂️ और यह बात तो सच है कि डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था, लेकिन वह भी एक व्यक्तित्व हैं जिसने देश को बहुत कुछ दिया है। उनकी मूर्ति लगाने से हमें यह याद करने का मौका मिलता है कि हमारे देश में कई ऐसे लोग रहे हैं जिन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ दिया है। तो फिर हमें उनकी याद में स्मारक बनाने और उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का सही मौका न मिलना चाहिए। 🙏
 
अंबेडकर जी की मूर्ति लगाने में इतनी रुकावटें आ गई हैं? उनका योगदान संविधान की बनावट में बिल्कुल भी नहीं कम हुआ है, बस उन्होंने उसमें अपना छाप डाला। अनिल मिश्रा जी ने ऐसा कहकर यहां तक कि उनके धर्म पर भी टिप्पणी कर दी है। लेकिन यह तो बहुत बड़ा गलत समझा जा रहा है।
 
अंबेडकर की मूर्ति लगाने की बात है, तो यह तो बहुत दिलचस्प है 🤔। अनिल मिश्रा ने ऐसी बातें कही हैं जो मुझे थोड़ी अजीब लगती हैं। उन्होंने संविधान बनाने का क्रेडिट देने का प्रयास नहीं किया, लेकिन फिर भी उनकी बहुत बड़ी भूमिका थी।

मैंने एक आर्टिकल पढ़ा है जिसमें कहा गया है कि अनिल मिश्रा को संविधान सभा के सदस्यों में से एक नहीं माना जाता है, लेकिन उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी।

मैंने यह भी पढ़ा है कि अनिल मिश्रा ने अपनी टिप्पणी को विरोध करने वालों को सीसीटी एक्ट के तहत लागू किया गया। तो ऐसा लगता है कि उनकी प्रतिक्रिया थोड़ी भयानक थी।

मुझे लगता है कि यह मूर्ति लगाने की बात पर और अधिक चर्चा करनी चाहिए, न कि अनिल मिश्रा की टिप्पणियों पर। 🤷‍♂️

संविधान सभा के सदस्यों की सूची - https://en.wikipedia.org/wiki/Constitutional_Convention_of_India

अंबेडकर और उनकी भूमिका - https://www.bbc.com/news/world-asia-56421577
 
अंबेडकर जी को सम्मान देना चाहिए, हमें उनके योगदान को पहचानना चाहिए। उन्होंने भारत के लिए बहुत कुछ दिया, संविधान बनाया। उनके बारे में अपमानजनक बातें करना उचित नहीं है।
 
मैंने कभी नहीं सोचा था कि अनिल मिश्रा को इतनी भूलभुलैया क्यों लगी। डॉ. बी.आर. अंबेडकर की बहुत ही बड़ी कृति है और उन्हें हमारे देश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। लेकिन जब वो संविधान बनाने वालों के दर्जे का सवाल करते हैं तो मुझे लगता है कि वह थोड़ा गलत दिशा में जा रहे हैं।

और फिर उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाने की बात कही, यह बहुत ही अन्यायपूर्ण है। डॉ. अंबेडकर ने अपने जीवन को पूरी तरह से बदल दिया था और वह अपने नए धर्म में शांति और समानता की भावना को बढ़ावा देते रहे। 🙄
 
अंबेडकर जी की मूर्ति लगाने की बात तो बहुत ही रोमांचक है, लेकिन अनिल मिश्रा की बातें तो थोड़ी भ्रमित कर देती हैं 😕। क्या वास्तव में उन्होंने संविधान बनाने वाले होने का दर्जा नहीं दिया? यह तो बहुत ही गलत समझ है। हमारे देश के इतिहास में अंबेडकर जी ने बहुत सारा योगदान दिया है, और उन्हें अपना स्थान बनाना चाहिए।

और फिर उनके बौद्ध धर्म से जुड़ने की बात, यह तो एक अलग मुद्दा है। लेकिन विवादित बयान करने की बात तो नहीं समझी जा सकती। हमें अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना चाहिए और उनसे अन्य लोगों को भी आनंद मिले।
 
अंबेडकर जी की मूर्ति लगाने वालों को आशा है कि वे अपने देश के इस महान नेता के प्रति सम्मान और गर्व का भाव करेंगे। मुझे लगता है कि हमारे समाज में अभी भी बहुत सारे लोग बाहरी और असहज महसूस करते हैं जब उन्हें अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति गर्व करने को कहा जाता है। हमें अपने पूरे देश में एकता और सहिष्णुता की भावना को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि हमारे नायकों की याद में हम सभी एक साथ खड़े हो सकें।
 
Wow 🤯, ये विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अंबेडकर की मूर्ति लगाने के पीछे क्या सच्चाई है, इसका पूरा खुलासा करना जरूरी नहीं है, लेकिन उनकी भूमिका और योगदान को स्वीकार करना जरूरी है।
 
बच्चो की जिम्मेदारी तो वादा है, लेकिन वादों पर भरोसा करना बड़ा भूलबुलाया है 🤦‍♂️। डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने से पहले विवाद तो तो आ गया, लेकिन उनके देशभक्ति को बारीक बारीक सवाल उठने चाहिए 🤔। अनिल मिश्रा जी ने उन्हें संविधान निर्माता नहीं कहा, फिर क्यों अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं? 🙄 उनके बारे में तो कुछ कहने पर सीसीटी एक्ट चलना चाहिए, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत हमले करने की जरूरत नहीं है 😡
 
जानवर जैसे हुए डॉ. अंबेडकर की मूर्ति के पास जाकर विशेष दर्जा देना तो भूल चुके हैं लोग... अनिल मिश्रा ने ऐसा कहा, लेकिन ये तो बिल्कुल सही नहीं... डॉ. अंबेडकर ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया, भारतीय संविधान का आधार बनाया और देश के लिए बहुत कुछ दिया। उनकी मूर्ति लगाने पर विवाद हुआ, तो फिर उन्हें एक नागरिक के रूप में सम्मान देने की जरूरत थी।
 
मैं समझ नहीं पाया कि विवाद यहाँ क्यों हुआ? डॉ. अंबेडकर को हमेशा महान समाजविद् के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने भारतीय संविधान की रचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अनुभव और विचारों से हमारी देशभर की जनता बहुत प्रभावित हुई है। क्या यह सच में उन्हें संविधान सभा के बनाने वाले नहीं माना जाता? उनकी बौद्ध धर्म अपनाने की वजह से हमें लगता है कि उन्हें सम्मान और समाजिक स्वीकृति नहीं मिली थी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनिल मिश्रा ने ऐसी बातें कही, जो डॉ. अंबेडकर की उपलब्धियों को कम कर रही हैं। 🙅‍♂️
 
अंबेडकर जी की बहुत बड़ी भूमिका है हमारे देश की संविधान बनाने में, उनकी बुद्धिमत्ता और नेतृत्व को हमें हमेशा याद रखना चाहिए 🙌। उनकी मूर्ति लगाने पर विवाद तो हो सकता है, लेकिन यह बात जरूरी नहीं है कि हम उनके बारे में अपमानजनक बातें करें। हमें उनकी उपलब्धियों और उनके योगदान को समझना चाहिए, न कि उनकी धार्मिकता को 😊। अनिल मिश्रा जी की बातें तो समझने योग्य नहीं हैं, लेकिन हमें सिर्फ अपने देश के महान नेताओं को सम्मान देना चाहिए और उनकी याद में कुछ भी ऐसा करना चाहिए जिससे हमारे देश को आगे बढ़ने में मदद मिले। 🇮🇳💪
 
मुझे भारतीय इतिहास में डॉ. अंबेडकर का महत्व समझने में मदद कर रहा हूँ। उनके बारे में लोग बहुत गलतफहम हैं। अगर उन्होंने संविधान निर्माता का दर्जा नहीं दिया, तो फिर ये सच नहीं है। वह संविधान सभा में भाग लेकर, हमेशा स्वतंत्रता और समानता की लड़ाई लड़कर और बाद में संविधान बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर एक महान व्यक्ति थे। उनकी अपनी पहचान थी, वह बौद्ध धर्म अपनाकर, लेकिन इससे उनके योगदान को कम करने का कोई तरीका नहीं है। 😐
 
🤦‍♂️ यह टिप्पणी बहुत ही अजीब है! डॉ. अंबेडकर को संविधान निर्माता का दर्जा देने के बाद भी ऐसा कहना कि उन्होंने अपना धर्म बदल लिया, तो यह कैसे समझ में आता है? 🤔

अनिल मिश्रा की यह टिप्पणी सिर्फ़ निंदनीय है, लेकिन इससे भी गहरा सवाल उठता है कि आजकल क्यों ऐसे लोग बोल रहे हैं जो इतिहास और समाज की समझ में कमजोर हैं। 🤷‍♂️

आइए, हमें अपने देश के महान नेताओं और उनके योगदान को समझने का समय मिले, न कि उन्हें अपमानित करने का। 🙏
 
अंबेडकर जी की मूर्ति लगाने में रुकावट है तो यह सचमुच दुखद है। लेकिन अनिल मिश्रा जी की बात मानने से पहले उन्हें संविधान निर्माताओं की एकता और सम्मान की भावना को समझने की जरूरत है 🤔
 
डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने वालों को यह जानने दो, अनिल मिश्रा ने तो बस बौद्ध धर्म अपना लेने के बारे में कहा 🙄। लेकिन अगर उन्होंने संविधान बनाने वाले होने का दावा नहीं किया, तो फिर यह टिप्पणी क्यों कर रहे हैं? 🤔

अब, मैं समझता हूं कि अनिल मिश्रा ने संविधान सभा में भाग लेने के बारे में भी कहा, लेकिन यह तो सब कुछ नहीं है 💡। डॉ. अंबेडकर ने वास्तव में अपने जीवन में बहुत कुछ दिया था, और उन्हें हमेशा सम्मानित करना चाहिए।

लेकिन, यही सवाल उठता है, कि अगर हम डॉ. अंबेडकर को संविधान निर्माता के रूप में सम्मानित नहीं कर सकते, तो फिर क्या हम उन्हें एक महान नेता के रूप में नहीं देख सकते? 💥
 
अरे, यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है! डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने पर इतना विवाद, यह हमारे देश के इतिहास को दर्शाता है। लेकिन अनिल मिश्रा जी की बात तो समझ नहीं आई। अंबेडकर जी ने अपने जीवन में बहुत कुछ सीखा था, और उनकी मूर्ति लगाना उनकी यादों को सम्मानित करने का एक शानदार तरीका है।
 
अंबेडकर जी की मूर्ति लगाने की बात तो ठीक है, लेकिन अनिल मिश्रा की बोली तो बहुत अजीब है 🤔। उन्होंने संविधान निर्माता का दर्जा नहीं दिया, लेकिन ऐसा तो सिवाय संविधान सभा में भाग लेने वाले किसी और को नहीं। और फिर बौद्ध धर्म अपना लेने का मामला है? यह तो उनकी निजता है, उसकी परवाह क्यों कर रहे हैं? 🙅‍♂️
 
अंबेडकर की मूर्ति लगाने की बात तो हो गई, लेकिन अनिल मिश्रा की बात तो और भी ज्यादा अजीब है 🤔। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने संविधान बनाया, लेकिन हमें पता नहीं कि वे संविधान सभा में कितने बार उपस्थित थे। और भी कुछ नहीं। लेकिन फिर भी, उन्होंने अपने हिसाब से कहा कि अंबेडकर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद उन्हें सीसीटी एक्ट नहीं लगता। तो यह तो बहुत अजीब है 🙄। मुझे लगता है कि अनिल मिश्रा को अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि अंबेडकर के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना। और अंबेडकर की मूर्ति लगाने की बात तो हो गई, लेकिन हमें उनकी स्थिति और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए 💕
 
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