एआई में आत्मनिर्भर भारत की तैयारी: पीएम मोदी बोले, पारदर्शी और सुरक्षित तकनीक ही रास्ता

पीएम मोदी ने कहा, "एआई में आत्मनिर्भर भारत की तैयारी करने के लिए हमें स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करना होगा। पारदर्शी और सुरक्षित तकनीक ही रास्ता है अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए।"

उन्होंने एआई स्किलिंग और प्रतिभा निर्माण पर बल देते हुए कहा, "हमें नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है, जैसे कि एआई मॉडलिंग, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग।" उन्होंने यह भी कहा, "हमें स्वदेशी विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। हमारा उद्योग जगत वैश्विक एआई प्रयासों में शामिल होने का काबिल दोस्त है।

बैठक में पैनलिस्ट्स ने कहा, "हमें एआई तकनीकों को स्थानीय स्तर पर लागू करने की जरूरत है।" इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा, "स्वदेशी समाधानों का उपयोग बढ़ाया जाए ताकि हम अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।"

पीएम मोदी ने इस बात पर स्पष्टता दिलाई, "हमें स्वदेशी विकास को बढ़ावा देने की जरूरत है। हमारा उद्योग जगत भारत को वैश्विक एआई प्रयासों में शामिल होने का प्रमुख गंतव्य बनाने का काबिल दोस्त है।"
 
बात अच्छी है प्रधानमंत्री जी ने इस बारे में कहा, एआई को बढ़ावा देना और स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करना हमारे लिए बहुत जरूरी है। अगर हम तैयार होते हैं तो कोई भी वैश्विक प्रयास हमें मिल सकते हैं। मेरा विचार है कि एआई स्किलिंग और प्रतिभा निर्माण पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
 
😊 लोगों को यह तय कर लेना चाहिए कि वे कौन सी तकनीकों पर भरोसा करना चाहते हैं और अपने जीवन में उन्हें कैसे उपयोग करना चाहते हैं। अगर हम स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करते हैं तो हम अपने देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर तकनीक विकसित कर सकते हैं। लेकिन अगर हम विदेशी तकनीकों पर भरोसा करते हैं तो हमें सुनिश्चित करना होगा कि वे हमारे देश की जरूरतों और मूल्यों को ध्यान में रखें। 🤔
 
प्रधमंत्री की बात सुनकर लगता है कि हमारे एआई लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वदेशी समाधान पर भरोसा करना जरूरी है। लेकिन इससे पहले हमें यह समझने की जरूरत है कि स्वदेशी विकास की ताकत क्या है?

कुछ लोगों का मानना है कि भारत को एआई तकनीकों को अपनाने की जरूरत है, और यह हमारे विकास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

लेकिन अगर हम स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करते हैं तो भारत में एआई तकनीकों की क्षमता कैसे बढ़ेगी?
 
मुझे लगता है कि PM Modi जी ने बिल्कुल सही कहा, स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करना और पारदर्शी और सुरक्षित तकनीक पर ध्यान देना ही हमें एआई में आत्मनिर्भर भारत की तैयारी करने में मदद करेगा। अगर हम नई तकनीकों जैसे कि एआई मॉडलिंग, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग को अपनाते हैं और स्वदेशी विकास पर ध्यान देते हैं, तो हम वैश्विक एआई प्रयासों में भारत को शामिल होने का एक बड़ा कदम उठा सकते हैं। मुझे लगता है कि सरकार और उद्योग जगत को मिलकर काम करना चाहिए ताकि हम अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें 🤖💻
 
कुछ लोग सोच रहे होंगे कि एआई हमारे जीवन को बेहतर बनाएगी, लेकिन मेरा मानना है कि हमें पहले अपनी खुद की समस्याओं को हल करना चाहिए। भारत में हमारे देश के विकास को बढ़ावा देने के लिए, हमें अपनी स्किल्स और टेकनोलॉजी पर भरोसा करना चाहिए। 💻👍
 
बात बात, पीएम मोदी जी ने एआई पर बहुत बोला है 🤔 स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करना, पारदर्शी और सुरक्षित तकनीक अपनाना, नई तकनीकों को अपनाना... तो यह सभी अच्छे विचार हैं! लेकिन मुझे लगता है कि हमें एआई स्किलिंग में भी बहुत ध्यान देने की जरूरत है। https://www.education.com.in/ai-skilling-in-india/

कुछ और पढ़ो, पैनलिस्ट्स ने कहा कि एआई तकनीकों को स्थानीय स्तर पर लागू करने की जरूरत है... तो यह सच है, हमें अपने देश में एआई को भी अच्छी तरह से समझने की जरूरत है। https://www.aiindia.org/
 
मुझे एआई पर सरकार की नीति बहुत आकर्षक लगी 🤔। लेकिन यह सोचने की जरूरत है कि हम यहाँ तक पहुँच गए हैं ताकि हम अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। मुझे लगता है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी एआई नीतियाँ मानवाधिकारों और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखें।
 
मैं समझ नहीं पाया, पीएम मोदी ने कहा कि हमें स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करना होगा? लेकिन मुझे एआई क्या है, और यह कैसे काम करता है? मेरे दोस्त ने बताया कि यह जैसे है कि एक बिल्कुल भी ज्ञात चीज़ जो हमारे द्वारा बनाई जाती है और फिर हम इसका उपयोग करके अपने जीवन में आसानी लाती है। लेकिन मुझे एआई स्किलिंग क्या है, और यह कैसे सीखने की जा सकती है? मैं ऑनलाइन देखूंगा कि इसके बारे में कुछ और।
 
नहीं तो यह और भी बड़ा होगा, स्वदेशी विकास पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एआई में आत्मनिर्भर भारत की तैयारी करने के लिए हमें पारदर्शी और सुरक्षित तकनीक पर भरोसा करना होगा। 🤖

हमारे उद्योग जगत को वैश्विक एआई प्रयासों में शामिल होने का काबिल दोस्त है, लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हम अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त करते समय, हमारी स्थानीय समानता और गरीबी मुक्ति पर ध्यान रखें। 💡
 
क्या ये एआई स्किलिंग और प्रतिभा निर्माण करने की कोशिश करोगे तो काम करेगा बिल्कुल, लेकिन हमें इसके लिए ठीक से स्वदेशी समाधानों को समझने की जरूरत है ना? मैं भारत में एआई प्रयासों के बारे में जानने के लिए दिल्ली आ रहा हूँ, इसलिए मुझे जानना होगा कि कौन-कौन से स्वदेशी समाधान हमें एआई तकनीकों में मदद कर सकते हैं?
 
तो अब भी कोई लोग सोचते हैं कि हमारे एआई लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें विदेशी तकनीक पर भरोसा रखना चाहिए? नहीं क्या! हमें अपने देश में स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करना होगा। यही हमारा एआई लक्ष्य होना चाहिए।

लेकिन देखो, कुछ लोग अभी भी कह रहे हैं कि हमें विदेशी तकनीक को अपनाना चाहिए, तो यह साफ नहीं है। मुझे लगता है कि हमें नई तकनीकों को अपनाने की जरूरत है, जैसे कि एआई मॉडलिंग, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग।

और यह भी सच है कि हमारा उद्योग जगत वैश्विक एआई प्रयासों में शामिल होने का काबिल दोस्त है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने देश को छोड़कर विदेशी तकनीक पर भरोसा करना चाहिए।

हमें स्वदेशी विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। हमें अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकों को लागू करना चाहिए। और यही हमारा रास्ता होना चाहिए।

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मुझे लगता है कि ये बात पूरी तरह से सही है, हमें अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें नई तकनीकों को अपनाने की जरूरत है। एआई मॉडलिंग, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग जैसी नए तकनीकों को अपनाकर हम अपने उद्योग जगत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ा सकते हैं 🚀

लेकिन इसके लिए हमें सबसे पहले स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करना होगा। हमें अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वदेशी विकास को बढ़ावा देने की जरूरत है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी एआई तकनीकें पैनलिस्ट्स जैसे क्षेत्र विशेषज्ञों को भी पसंद आएं 🤝
 
एआई से जुड़े देश की तैयारी करने की बात कर रहे हैं… लेकिन कुछ सवाल भी उठने चाहिए। क्या हम वास्तव में अपनी खुद की एआई तकनीक बनाने की कोशिश कर सकते हैं या हमें विदेशी से सहायता लेने को मजबूर रहना पड़ेगा? और क्या हमारी तैयारी में ब्रिटेन या अमेरिका जैसे देशों पर भरोसा करना होगा या नहीं?

मुझे लगता है कि हमें अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले स्वदेशी विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए। और इसके लिए हमें अपने उद्योग जगत को सशक्त बनाने की जरूरत है। 🤖
 
मुझे लगता है की एआई स्किलिंग और प्रतिभा निर्माण बहुत जरूरी हो जाए। हमारे देश में कई ताकतवर युवा हैं जिन्हें उन तकनीकों को सीखने की जरूरत है जैसे की एआई मॉडलिंग और मशीन लर्निंग। 🤖

और स्वदेशी विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। हमारा उद्योग जगत वैश्विक एआई प्रयासों में शामिल होने का बहुत बड़ा अवसर है, लेकिन इसे सही तरीके से नहीं चलाया जा रहा है। 😊

पैनलिस्ट्स ने बात की है की हमें एआई तकनीकों को स्थानीय स्तर पर लागू करने की जरूरत है, और मुझे लगता है की यह सच है। हमें अपने देश की समस्याओं को समझने और उन्हें समाधान देने के लिए एआई तकनीकों का सही तरीके से उपयोग करना होगा। 🤔
 
मुझे लगा कि एआई और स्वदेशी विकास की बात करने पर बहुत जोर दिया जा रहा है, लेकिन क्या हमने अपने युवाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करने की ओर कोई कदम नहीं उठाया है? 🤔

मेरे अनुसार, एआई स्किलिंग को विशेष रूप से महिलाओं और बैकवॉटर टाउन्स के लोगों के लिए प्राथमिकता देनी चाहिए। हमें अपने युवाओं को इन क्षेत्रों में स्वदेशी एआई तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
 
😊 ये तो बहुत अच्छी बात है कि पीएम मोदी ने एआई में आत्मनिर्भर भारत की तैयारी करने के लिए स्वदेशी समाधानों पर भरोसा करने का फैसला किया है। यह हमें अपने एआई लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा। मुझे लगता है कि अगर हम नई तकनीकों को अपनाते हैं और स्वदेशी विकास पर ध्यान देते हैं, तो हम वैश्विक एआई प्रयासों में शामिल होने के लिए तैयार हो जाएंगे। 🚀 यह हमारे उद्योग जगत के लिए बहुत अच्छा रुख है। 💪
 
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