एयरपोर्ट पर यात्रियों में मारपीट, लात-घूंसे चले: कोई रोया, किसी ने हंगामा किया, महिला सिक्योरिटी से भिड़ी; इंडिगो संकट की 18 PHOTOS

दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों ने जमीन पर लेटकर रोते दिखाए, कोई मरपीट हुई, एक यात्री सुरक्षाबलों से भिड़ गई। बेंगलुरु एयरपोर्ट पर क्रू मेंबर्स की कमी के चलते कई फ्लाइट्स ग्राउंडेड हो गई हैं। लखनऊ एयरपोर्ट पर यात्रियों ने लंबी लाइन में खड़े होने के विवाद में आपस में भिड़ गए।

इंडिगो एयरलाइन की कई फ्लाइट्स ग्राउंडेड हो गई हैं। इंडिगो की 109 फ्लाइटें दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद जैसे एयरपोर्ट्स पर कैंसिल हुई हैं।

अहमदाबाद और मुंबई एयरपोर्ट पर भी लगातार रुकावट है। कई यात्रियों ने जमीन पर लेटकर रोते दिखाए।
 
क्या ये सही है कि हमारे पास सुरक्षा की समस्या हो गई? ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है और सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। कुछ लोग जमीन पर लेटकर रोते हैं तो फिर भी हम सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हमें अपने पास मौजूद संसाधनों का अच्छी तरह से इस्तेमाल करना चाहिए ताकि हर कोई सुरक्षित और आरामदायक यात्रा कर सके। 🤗🛫
 
मुझे बिल्कुल सही नहीं लगता कि एयरपोर्ट में जो स्थिति है, वह कैसे बदली! पहले तो यात्रियों ने अपनी समस्याओं को बताने के लिए शांतिपूर्ण तरीके अपनाए, फिर भी प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब जमीन पर लेटकर रोते दिखाई दे रहे हैं! यह तो बिल्कुल सही नहीं है... 🤦‍♂️
 
ज़रूरी तो यही कि सुरक्षा बनाम प्राथमिकता जैसी समस्याओं का समाधान निकल आए, दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों ने जमीन पर लेटकर रोते दिखाए, ऐसा तो बेंगलुरु और हैदराबाद में भी सार्वजनिक परिवहन को जैसे रोडवेज इस तरह काम नहीं कर पाया, इसका समाधान निकलना चाहिए।
 
मेरा दिल दुखी हो गया जब मैंने यह पढ़ा कि यात्रियों को भीड़भाड़ और जीवन की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। क्या हमारे पास इतनी सुविधाएँ नहीं हैं कि हमारे लिए एक अच्छा अनुभव बनाया जा सके? मुझे लगता है कि यात्रियों को सहन करने वाली हमारी दुनिया में कुछ गलत है।

मैं सोचता हूँ कि फ्लाइट्स कैंसिल होने की वजह से न ही हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न ही हमें अपने आसपास के लोगों की समस्याओं में खुद को भूलना चाहिए।

हमारे देश में इतनी विविधता और जीवन की गति है कि हर जगह अलग-अलग समस्याएँ आती रहती हैं। हमें अपनी समस्याओं को स्वयं को समझने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि दूसरों पर आरोप डालना। 🤔
 
एयरपोर्टों पर इतनी बुराई क्यों हो रही है? 🤔 ज़रूरत तो है कि एयरपोर्ट्स साफ़-सुथरे और कुशल कर्मचारियों वाले हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सब अपनी शिकायतें खुद बनाए बैठें। 🤷‍♂️

कुछ लोग अपनी निराशाओं को सामने लाने के बजाय, विवादों में फंस जाते हैं और आगे बढ़ने का मौका खो देते हैं। लेकिन अगर हम ध्यान रखकर बातचीत करें, तो शायद एयरपोर्ट सुरक्षित और सहज बन सकता है। 💡
 
ये तो दुखद है... एयरपोर्ट पर यह सब क्या हो रहा है? क्या हमारी हवाई यातायात प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है? इंडिगो ने इतनी फ्लाइट्स ग्राउंडेड की हैं तो शायद वो भी सोच रहे हैं कि क्या हमें उम्मीद करनी चाहिए? लेकिन, दूसरी ओर, यात्रियों की जिंदगी बहुत बुरी हो रही है... जमीन पर लेटकर रोते दिखाना क्या सही है? मुझे लगता है कि हमें सुरक्षा और सुविधा के बारे में अधिक ध्यान देना चाहिए।
 
क्या तो सब कुछ खराब हो गया है? पूरा देश एयरपोर्ट में डूबा हुआ है... 109 फ्लाइटें ग्राउंडेड, यह तो बिल्कुल अच्छा संकेत है। और लोग जमीन पर लेटकर रोते दिखाई दे रहे हैं, यानी वहीं उनकी मुश्किलें खत्म हो जाएंगी। कोई मरपीट हुई, एक लड़की सुरक्षाबलों से भिड़ गई, यह तो सब कुछ साफ-सफाई है... और क्रू मेंबर्स की कमी से फ्लाइट्स ग्राउंडेड, यह तो उनकी नौकरी खत्म हो गई है। लखनऊ एयरपोर्ट पर लंबी लाइन में खड़े होने का विवाद, यह तो सबके बीच का तनाव फैला रहा है। इंडिगो एयरलाइन की फ्लाइट्स ग्राउंडेड, यह तो यात्रियों के लिए अच्छी बात नहीं है, जैसे उनकी यात्रा पूरी नहीं हो पाएगी।
 
ये तो बहुत बड़ा संघर्ष है हमारे देश के लिए 🤯 पूरा देश जोर डाल रहा है, तो फिर भी इतनी मुश्किलें आ गईं हैं! इंडिगो एयरलाइन पर ऐसी स्थिति कैसे आ सकती है? कोई सोचते थे कि ये एयरलाइन कितनी बड़ी है तो फिर भी इतनी कमी वाली क्रू कैंसिल कर देना? और बेंगलुरु एयरपोर्ट पर क्रू मेंबर्स की कमी से लोगों ने क्यों ऐसा किया?

मेरा मानना है कि हमें अपने यात्रियों को सबसे पहले मदद करनी चाहिए, फिर बाकी सब देखें! अगर सरकार और एयरलाइनें एक साथ मिलकर लोगों की समस्याओं पर ध्यान देतीं, तो हमारा देश आगे बढ़ सकता है! 🚀
 
मुझे यह देखकर बहुत बुरा लगा 🤕, यात्रियों को ऐसा स्वागत करने वाली हवाई अड्डे में ऐसा व्यवहार कैसे हुआ? और क्यों इतनी कम जागरूकता? मुझे लगता है कि हमें अपने देश की इस समस्या पर सोचना चाहिए, और एक साथ मिलकर समाधान ढूँढना चाहिए।
 
बहुत बड़ा दुःख है दिल्ली, बेंगलुरु और अन्य हवाई अड्डों पर लोगों की इस तरह से मुश्किल में फसने का... पूरे देश में यात्रियों को बहुत परेशानी हो रही है और वे सभी जमीन पर लेटकर रोते दिखाई दे रहे हैं... यह बहुत बड़ा व्यवस्था की कमजोरी है कि इतनी ज्यादा फ्लाइटें ग्राउंडेड हो गईं। इंडिगो जैसी सुविधान्वित एयरलाइनों में भी ऐसा कुछ नहीं देखने को मिलता।
 
ये तो डरने का समय नहीं है 🙅‍♂️, यह एक बड़ा मेलबंदी हुआ है, ये देखकर कोई खुश नहीं होगा। इंडिगो एयरलाइन ने ऐसे दिन पेश किए हैं जब सुरक्षा के बारे में सोचने का समय नहीं है। लोगों की जिंदगी तो फ्लाइट्स पर ही नहीं, रुकावटों और ट्रैफिक में भी खिलवाड़ होती दिखाई देती है। और इतने पैसे चार्ज करते हैं कि अब यात्रियों को क्या करना? कोई मरपीट हुई, एक यात्री सुरक्षाबलों से भिड़ गई, तो यह सब तो देखकर ही चिंतित होना चाहिए।
 
😩 देश के हर एयरपोर्ट पर लगातार रुकावटें हो रही हैं, क्या स्वस्थ नहीं है? 🤕 यात्रियों की समस्याओं पर खास ध्यान नहीं देने से कुछ लोग जमीन पर लेटकर भी बैठ जाते हैं और रोते दिखाई देते हैं, लेकिन कोई उनकी मदद करने निकलता तो नहीं? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि यात्रियों को पहले अपने स्वयं के घर में बैठकर पूरे दिन रोते रहने का मौका नहीं मिलता, लेकिन एयरपोर्ट पर तो ऐसी स्थिति बन जाती है... 🤦‍♂️ और न ही कोई एयरलाइन उनकी समस्याओं को ठीक करने की कोशिश करती, जैसे इंडिगो में 109 फ्लाइटें ग्राउंडेड हो गई हैं... 😱
 
ਕੀ ਲोग सोचते हैं कि एयरपोर्ट में रोकावट होना तो यात्रियों की गुस्सा जनक नहीं होगा? आज दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद जैसे एयरपोर्ट्स पर इंडिगो की 109 फ्लाइटें ग्राउंडेड हो गईं। लोग जमीन पर लेटकर रोते दिखाई दिए। क्या यात्रियों को सोच में लगने की जरूरत नहीं? कोई मरपीट हुई, एक यात्री सुरक्षाबलों से भिड़ गई... तो फिर कौन जिम्मेदार है?
 
मुझे ये सोचना दुखद है कि लोग यह तरह की समस्याओं में फंस गए हैं। एयरपोर्ट पर इतनी भीड़ और बाधाओं के चलते लोगों को कैसे पता चलता है कि उनकी यात्रा वापसी से नहीं हुई?

मैंने देखा है कि इन दिनों इंडिगो एयरलाइन की फ्लाइट्स बंद करने लगी हैं। लोगों को ये समझाना भी मुश्किल है कि एक साथ 109 फ्लाइटें ग्राउंडेड होने से उनकी यात्रा प्रभावित नहीं होती।

अगर सरकार और एयरपोर्ट अधिकारी इस समस्या पर ध्यान दें, तो लोगों को खुशियां मिलेंगी और वे अपनी यात्राओं का आनंद ले सकेंगे।
 
मुझे ये जानकर दिल से खेद हो रहा है कि इतनी बेरोकाबरी में कैसे यह दुर्घटनाएं घट रही हैं। तो क्या सरकार हमारे एयरपोर्टों की सफाई और रखरखाव पर ध्यान देने लगी? मैंने हाल ही में अपनी बेटी ने खिलौनों से बनाए हुए एक बहुत ही सुंदर पेड़ लगाया था, उसे देखकर मुझे यही सोच कि हमारे एयरपोर्ट पर भी ऐसे पेड़ लगाने चाहिए जिससे हमें शांति और आराम मिले।
 
भाइयो, यह तो बहुत बड़ा नुकसान है इंडिगो की फ्लाइट्स ग्राउंडेड होना। लेकिन मुझे लगता है कि यहां से हमें एक बात सीखनी चाहिए - अनुशासन और सहयोग। अगर सभी यात्रियों ने अपने-अपने समय पर बैठने की कोशिश की, तो इस तरह के दुर्घटनाएं नहीं होतीं। हमें यह भी सीखना चाहिए कि लंबी लाइन में खड़े होने और आपस में मतभेद करने से कोई फायदा नहीं है। हमें एक-दूसरे सहयोग करना चाहिए।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद और मुंबई जैसे एयरपोर्ट्स पर इतनी भीड़ लग गई है कि लोग जमीन पर लेटकर रोते दिखाई दे रहे हैं। यह तो यात्रियों का बहुत बड़ा परेशान है, और फ्लाइट की स्थिति खराब होने से भी सब परेशान हैं।

क्या हमें अपने एयरपोर्ट्स को सुधारने की जरूरत नहीं है? क्रू मेंबर्स की कमी और लंबी लाइन में खड़े होने के विवाद जैसी समस्याएं क्यों लग रही हैं? हमें अपने एयरपोर्ट्स को सुधारने के लिए कुछ काम करना चाहिए, ताकि यात्रियों को आराम मिल सके।
 
मुझे लगता है कि एयरलाइनें बहुत ज्यादा दबाव में हैं और उनकी सेवाओं पर गुस्सा होना समझने योग्य है। लेकिन जब यात्रियों को जमीन पर लेटना पड़ता है तो यह एक बड़ा समस्या है। मुझे लगता है कि एयरपोर्ट सुरक्षा और यात्री आराम को देखते हुए थोड़ी जिम्मेदारी अपनानी चाहिए। लेकिन अगर सेवाओं में बदलाव करना पड़ता है तो यह भी समझने योग्य है। कुछ एयरलाइनें ने इस स्थिति को देखते हुए अपनी फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं।

मुझे लगता है कि सरकार और एयरलाइनें एक साथ मिलकर समस्या का समाधान ढूंढनी चाहिए।
 
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