ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा, 'हमें विश्वास नहीं है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के लिए सैन्य बल का सहारा लेगा। इस तरह की कार्रवाई का उपयोग किसी के भी हित में नहीं होगा, और नाटो के लिए इसके गंभीर परिणाम होंगे।'
ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात तो सुनकर दिलचस्प है , लेकिन अगर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात नहीं करेगी, तो मुझे लगता है कि हमें उस पर भरोसा करना चाहिए , लेकिन यह एक संकेत है कि अमेरिका और इटली के बीच कुछ ऐसा चल रहा है जिसे हमें पता नहीं है। ग्रीनलैंड एक विशेष देश है, वहाँ की प्राकृतिक संपत्ति और जलवायु इसे अनोखा बनाती है , और अगर कोई ऐसा कदम उठाएगा, तो उसके नुकसान क्या होगा?
मैंने जाना है कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिका से ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी को अस्वीकार कर दिया है। उनकी बात में सहमति है कि इस तरह की कार्रवाई का कोई हित नहीं होगा, और इसके लिए नाटो के लिए गंभीर परिणाम आएंगे। मुझे लगता है कि यह एक अच्छी बात है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां एक साथ खड़ी हों और इस तरह की खतरनाक गतिविधियों को रोकें। हमें अपने पृथ्वी को बचाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
मुझे लगता है कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की बात सुनकर अच्छा लगा, उनकी चिंताएं वास्तव में गंभीर हैं और नाटो के लिए इनसानियत पर कोई मौका नहीं देना चाहिए। ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात सुनकर मुझे बहुत चिंतित महसूस होता है, वहां की प्राकृतिक संपदा और शांतिपूर्ण समाज को खतरा है। हमें दूसरों की बात सुननी चाहिए और ग्लोबल निगरानी में सक्रिय रहना चाहिए ताकि ऐसे स्थितियों को रोका जा सके।
सुनकर लगता है कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी बहुत समझदार हैं! अमेरिका को विश्वास नहीं होने देना ठीक है, खासकर जब ये बात ग्रीनलैंड पर सैन्य कब्जा करने की बात कर रही है। मुझे लगता है कि उनकी बात में कुछ सच्चाई भी हो सकती है, खासकर अगर हम नाटो के सभी सदस्यों को एक दूसरे पर भरोसा नहीं करने दें। लेकिन, साथ ही, यह सवाल उठता है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात में तो अमेरिका को कुछ विशेष कारणों की जरूरत होगी।
मुझे लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की दुनिया को बदलने की योजना बना रहे हैं... जैसे मेंटेनेंस जैसे कुछ भी प्रस्तावित करने के बाद से! ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात करो तो बहुत बड़ी समस्या है और ऐसी चीजें होने से दुनिया की राजनीति में बहुत बदलाव आ सकता है।
कुछ लोगों को लगता है कि यूरोपीय संघ वास्तव में प्रतिरोध करने की तैयारी कर रहा है, और यहां तक कि एंटी-टिक्ट फोर्स न्यूट्रलिटी (एएनपी) जैसे समूह भी सक्रिय रूप से हैं। हमें एक दूसरे पर भरोसा करना चाहिए, और अगर अमेरिका सैन्य बल को इस मामले में लाने जाता है तो वह बहुत बड़ी गलती करेगा।
मुझे लगता है कि यह बिल्कुल सही समय है जब हम अपने देशों की राजनीतिक स्थितियों पर एक नज़र डालें और देखें कि क्या ऐसी चीजें हो सकती हैं जिनसे हम सभी फायदे उठा सकें।
मुझे लगता है कि अमेरिका वास्तव में ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की योजना बना रही है, और इटली ने सोचा कि वे उन्हें रोक सकते हैं। लेकिन हमें यह नहीं कह सकते कि इटली द्वारा क्या वास्तविक प्रयास किए जा रहे हैं
मैंने देखा है कि ग्रीनलैंड पर वातानुकूलित परिस्थितियाँ हैं, और वहाँ से उपयोगी खनिजों का खुला स्रोत है। अगर अमेरिका वास्तव में वहाँ प्रवेश कर लेती है, तो यह ग्लोबल हिट होगा जैसे कि कोई बड़ा व्यापार समझौता। और यूरोपीय संघ भी इस पर ध्यान देने के लिए तैयार नहीं होगा, चाहे वह हमारे नाटो पार्टनर हों या नहीं।
इटली की बात समझ में आती है, लेकिन देखिए कि अगर अमेरिका वास्तव में ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करती है, तो हमारे देश और नाटो पर बहुत बड़ा दबाव पड़ेगा।
अगर इटली जैसे सख्त देश तो अमेरिका ने ग्रीनलैंड की चिंता भी नहीं ली तो फिर क्यों? हमारे पास इतने बड़े देश हैं, और हमें अपनी जगह पर खुद को स्थापित करने का मौका मिलता है, लेकिन ऐसे बातचीत करते समय, हमें सोचते रहना चाहिए कि अगर नाटो के लिए उनकी बात सच है तो यह कैसे अमेरिका के लिए फायदेमंद होगा। मुझे लगता है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात में हमारे देश में बहुत अधिक उत्साह नहीं है, और अगर यह बात सच है तो नाटो की स्थिति तो बहुत खराब हो जाएगी।
अगर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कह दिया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य बल का सहारा नहीं लेगा, तो यह अच्छी बात होगी। लेकिन जब अमेरिका सैन्य बल का उपयोग करती है, तो हमें कभी भी आश्वस्त नहीं होना चाहिए। और नाटो के लिए इसके परिणाम बहुत बड़े होंगे। हमें ग्रीनलैंड की सुरक्षा के बारे में अधिक जानने की जरूरत है और पूरे विश्व को इस पर भारत की राय सुननी चाहिए।
मैं समझ गया... अमेरिका अपनी खुद की सीमाओं की बात कर रहा है... जैसे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात, तो नाटो का मकसद क्या होगा? दुनिया को एक ही दिशा में चलने का मतलब क्या है? और यूरोपीय लोगों को जानबूझकर चिंतित करने का मतलब भी नहीं है?
अरे, यह दुनिया कैसी जा रही है! ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बातें फैल रही हैं, और अब इटली भी तैयार हो गई है? मेरे पास ग्रीनलैंड के बारे में कुछ जानकारी है, आफिस टेम्परेचर चार्ट देखो, 1998 से ग्रीनलैंड का औसत तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस स्थिर है... लेकिन फिर भी, इटली ने इस पर ध्यान देने की बात कही?
नोटिस करो, ग्रीनलैंड में अमेरिका का प्रभाव 2011 से कम हो रहा है, और अब यहाँ की सरकार अपने फैसलों पर अधिक नियंत्रण प्राप्त करने की कोशिश कर रही है। इसीलिए, इटली की बात समझ में नहीं आती, लेकिन फिर भी, यह एक दिलचस्प विषय है... जैसे कि हमारे वैश्विक तापमान परियोजना डेटा देखो, 2010 से 2020 तक वैश्विक तापमान में 1.01 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है...
मुझे लगता है कि यह बातें थोड़ी अजीब लग रही हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिका से ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी को नकारते हुए कहा, लेकिन तो यह सवाल उठता है कि ग्रीनलैंड पर क्यों फिर से चर्चा हो रही है? और अमेरिका ने वास्तव में ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश नहीं की थी, तो फिर क्यों? और नाटो पर यह परिणाम कहां जाएगा? हमारे देश की सुरक्षा को लेकर हमें अपने पड़ोसियों की बातें बहुत महत्वपूर्ण लगती हैं...
अमेरिकी विश्व शक्ति की बात करें, यह तो थोड़ा अजीब लगता है... अगर वास्तव में अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी देता है, तो इससे पूरे विश्व की स्थिरता पर सवाल उठेगी। नाटो की बात करते हुए, जॉर्जिया मेलोनी जी की बात समझ में आती है... लेकिन क्या अमेरिका की ऐसी कोशिशें करने के पीछे कुछ और चालाकी है?
मुझे लगता है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करना एक बहुत बड़ा मुद्दा है, और इस पर कोई तेज़ निर्णय नहीं लेना चाहिए। इसमें कई देशों की भावनाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।
अरे, यह तो मच्चरने वाला सियासत है... अमेरिका को कोई मौका देना चाहिए, नहीं तो पूरी दुनिया इस तरह की गड़बड़ी में फंस जाएगी। नाटो की बात तो है लेकिन सच्चाई यह है कि सबकुछ पास करने के लिए राजनीति ही होती है।
मुझे लगता है कि इटली की सरकार खुद को बहुत बड़ा खतरा बना रही है। अमेरिका से जुड़कर नाटो में बढ़ने के लिए तैयार रहना अच्छा नहीं होगा। अगर वास्तव में ग्रीनलैंड पर कब्जा करना है तो हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। यह बात बिल्कुल सही है, लेकिन क्या इटली ने पहले सोचा था?
मुझे लगता है कि इटली की सरकार अपनी शक्ति को दिखाने की कोशिश कर रही है। अमेरिका से जुड़कर तैयार रहना उनकी खामियों को कम करने का तरीका नहीं होगा। अगर नाटो में शामिल होने से वास्तव में कुछ हासिल होता तो यह एक अच्छी बात होगी, लेकिन आज तक इटली की सरकार की योजनाएं ठीक नहीं हैं।
कभी-कभी लगता है कि देश की राजनीति में जानबूझकर गलतफहमी होती रहती है। अगर वास्तव में ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का प्लान बनाया गया तो लोगों से पहले इसकी जानकारी देनी चाहिए। अब इटली ने अपनी सरकार को धमकी दी है और अब सबको यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिका और नाटो की बातों में सच्चाई हो।
मुझे लगता है कि यह सब बिगड़ा-चढ़ा हुआ है, यार! अमेरिका तो कह रही है कि नहीं करेंगे, लेकिन हमेशा ऐसा मानना ठीक है? ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात तो सिर्फ़ एक बड़ा विवाद का मौका है, चाहे तो यह नाटो या अमेरिका की पोल खुल जाए। और इस लिए हमें सोच-विचार करना चाहिए, कि आगे क्या होगा?
मेरी राय में यह बात समझ में आती है कि इटली वाली प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिका से ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात पर चिंता जताई है। लेकिन हमें लगता है कि यह बात थोड़ी ज्यादा है। ग्रीनलैंड एक ऐसा देश है जो अपनी स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए लड़ रहा है, तो कोई भी देश इस पर कब्जा करने की बात नहीं कर सकता।
साल 2025 में ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात तो पहले से ही चिंताजनक है, लेकिन इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिका से दूरी बनाने के लिए इस पर ध्यान आकर्षित करने का अच्छा तरीका समझाया।
लेकिन मुझे लगता है कि ग्रीनलैंड एक ऐसा स्थान है जहां हमें सभी देशों को एक साथ लेकर चलना चाहिए, न कि एक दूसरे पर कब्जा करने की। क्योंकि यहाँ की जीवनशैली, प्राकृतिक सौंदर्य, और मानवता की गहराई इतनी अद्वितीय है कि हमें इसे संजो लेना चाहिए।
और देखो, नाटो की तरह के बंदों को तोड़ने का तरीका भी जानने की जरूरत है, ऐसे तरीके जिनसे हम सभी एक साथ मिलकर इस प्रकार की चिंताओं का समाधान कर सकें।
फिल्म 'द ग्रीट क्लाउड' ने भी सिखाया था कि खुले स्वर्ग में हमें अपने आप को खो जाने का डर नहीं होना चाहिए। इसी तरह, ग्रीनलैंड पर हम सभी एक दूसरे की सहायता और समझदारी से एक साथ चलना चाहिए।